जागरण संवाददाता, पानीपत: सेक्टर-29 में फ्लोरा चौक स्थित मेडिकल स्टोर पर छापेमारी कर एक युवक को एमटीपी किट के साथ रंगेहाथ पकड़ने के मामले में स्वास्थ्य विभाग की टीम को मुंह की खानी पड़ी है। एसीजेएम तरुण सिघल ने ठोस सबूत नहीं होने के कारण आरोपित को बरी कर दिया है। छापेमारी वर्ष 2017 में की गई थी।

बरी हुए युवक के वकील विकास रोहल ने बताया कि गांव कुटानी निवासी मोहित पुत्र धर्मवीर का फ्लोरा चौक के पास मलिक मेडिकल स्टोर है। एक जुलाई 2017 को तत्कालीन डीसी के आदेश पर नायब तहसीलदार जय सिंह और डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. सुधीर बतरा ने मेडिकल स्टोर पर एक डिकॉय को 500-500 के दो नोट देकर एमटीपी किट खरीदने के लिए भेजा था। टीम ने दावा किया था कि दुकान पर बैठे रोहित नाम के युवक ने नोट लिए, डिकॉय को पांच गोली थमा दी। टीम में शामिल एसआई हरनारायण और एएसआइ हेमराज की मदद से उसे रंगेहाथ पकड़ा गया। आरोपित के खिलाफ मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (एमटीपी) अधिनियम 1971 की धारा 3,4,5 के तहत मुकदमा भी दर्ज कराया गया।

एडवोकेट विकास के मुताबिक रोहित को पकड़ने का दावा किया गया था, बाद में नाम मोहित कर दिया गया। केस की सुनवाई के दौरान स्वास्थ्य विभाग के वकील ने पांच गवाह पेश किए थे। कोर्ट में कोई ऐसा सबूत पेश नहीं कर सका, जिससे उनके मुवक्किल पर आरोप सिद्ध हो सके। इन दावों के आगे कमजोर पड़ा विभाग

-परामर्श पर एमटीपी किट बिक्री के लिए स्टोर रजिस्टर्ड था।

-पांच गोलियां गर्भपात के लिए थी यह साबित नहीं हो सका।

-गोलियों का रैपर या बॉक्स कोर्ट में पेश नहीं किया।

-आसपास चार दुकानें थी, निरीक्षण नहीं हुआ।

-मौके पर बनाए नक्शे में दुकान टेली कम्यूनिकेशन की थी।

-छापेमारी के लिए डीसी का ऑर्डर नहीं पेश किया गया।

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Posted By: Jagran