करनाल, जागरण संवाददाता। उत्तर भारत के मैदानी इलाकों जैसे पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान के पूर्वी और उत्तरी हिस्सों में पिछले कुछ दिनों से रुक-रुककर बारिश हो रही है। सावन में बरसात की झड़ी से ना केवल गर्मी व उमस से लोगों को राहत मिली है बल्कि धान की फसल के लिए भी संजीवनी का काम कर रही है। मौसम विभाग ने संभावना जताई है कि देश के उत्तरी मैदानी इलाकों में बरसात का सप्ताह आने वाला है।

तीसरा निम्न दबाव का क्षेत्र अच्छी तरह से चिह्नित हो गया है। जल्द ही यह तटीय इलाकों को पार करके पूर्वी भागों तक पहुंच जाएगा। इसके बाद, इस मौसमी सिस्टम के कमजोर भाग का अवशेष उत्तर भारत तक पहुंच जाएगा। इसके साथ ही यह सिस्टम मानसून टर्फ को भी को अपनी ओर खींच सकता है। इन मौसमी सिस्टमों के मिलने और मानसून टर्फ की हलचल के कारण इस क्षेत्र में बरसात की गतिविधियां होने के आसार है। हालांकि इन इलाकों में रुक-रुककर हो रही बरसात की तीव्रता में भिन्नता भी देखने को मिल सकती है।

उत्तरी मैदानी क्षेत्र में मौसमी सिस्टम पहुंचने के लिए लग सकते हैं चार से पांच दिन

मौसम विभाग का मानना है कि इस मौसमी सिस्टम को उत्तरी मैदानी इलाकों में पहुंचने में कम से कम चार से पांच दिन लगेंगे। देश के उत्तरी भागों में पिछले सिस्टमों के कारण वर्तमान में वर्षा हो रही है। वहीं एक चक्रवाती हवाओं का क्षेत्र अभी भी दिल्ली पर बना हुआ है। इस प्रकार, वर्तमान मौसमी सिस्टम को मानसून टर्फ और चक्रवाती हवाओं के क्षेत्र के साथ मिलकर काम करने में लगभग चार दिन लग सकते हैं। जिसके परिणामस्वरूप मानसून की बरसात जारी रहेगी। बारिश की यह गतिविधियां पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान के उत्तरी और पूर्वी हिस्सों में जारी रह सकती हैं। इसके साथ ही उत्तर भारत के पहाड़ी इलाकों जैसे उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश के कुछ हिस्सों में भी बारिश की गतिविधियां दिख सकती हैं।

मानसून की दस्तक के बाद अब तक प्रदेश में सामान्य से 24 फीसद अधिक बरसात

मौसम विभाग के मुताबिक मानसून की दस्तक से लेकर अब तक प्रदेशभर में सामान्य से 24 फीसदी अधिक बरसात हुई है। प्रदेश में अब तक 189.4 एमएम बरसात होनी चाहिए थी, जोकि अब तक 235.4 एमएम बरसात हो चुकी है। अंबाला, भिवानी, फरीदाबाद व पंचकूला में हालांकि सामान्य से कम बरसात दर्ज की गई है, जबकि अन्य जिलों में बरसात सामान्य से अधिक हुई है।

Edited By: Anurag Shukla