पानीपत, [सुनील मराठा]। पानीपत थर्मल पावर प्लांट का प्रदेश के विकास में अहम योगदान रहा है। इसी की बदौलत गांव-गांव घर-घर रोशन हुए। अब इसकी चार यूनिटों में से एक को विस्‍फोट से जमींदोज कर दिया गया। सुरक्षा के लिए सीआइएसएफ के सौ जवान और एंबुलेंस को तैनात है। 

दरअसल पानीपत थर्मल पॉवर प्लांट के जर्जर हो चुके चार कूलिंग टावरों में से एक को सोमवार तीन बजकर तीन  मिनट पर ध्वस्त कर दिया गया। तकनीकी टीम ने इन टावरों में विस्फोटक सामग्री लगाकर उड़ा दिया है। इस दौरान असंध रोड बंद रखा गया। शहर से आठ किलोमीटर की दूरी पर थर्मल पावर प्लांट के टावरों का निर्माण वर्ष 1974 से 1980 के बीच हुआ था। तीन साल पहले एक से चार नंबर कूलिंग प्लांट को कंडम घोषित कर दिया गया था। कूलिंग टावरों की ऊंचाई करीब 105 मीटर है। चारों यूनिटें लगातार बंद चल रही हैं। बिजली का उत्पादन इन यूनिटों से नहीं हो रहा है। इन चारों यूनिटों को यहां से हटाने के लिए एचआर कॉमर्शियल कंपनी को ठेका दिया गया था। एचआर कॉमर्शियल कंपनी ने ही थर्मल को खरीद रखा है।

धूल का उड़ा गुबार
थर्मल की एक यूनिट को जब विस्‍फोट से उड़ाया गया तो सीधे जमींदोज हो गई। इससे धूल का गुबार उठा। इसका धमाका आसपास के इलाके में सुनाई दिया। साथ ही आसपास की फैक्‍ट्री को भी हॉफ टाइम के बाद खाली करा दिया गया था। वहीं थर्मल के कर्मचारियों को भी बाहर कर दिया गया। इसे देखने के लिए आसपास के लोग भी एकजुट हुए। यातायात को भी पूरी तरह से रोका गया है।

12 ब्लॉक के 25-25 किग्रा विस्फोटक
पुलिस व प्रशासनिक सहायता के लिए प्रशासन को पत्र भेजकर अवगत करा दिया गया है। तीसरे पहर लगभग 3:02 बजे ब्लास्ट किया गया। 25-25 किग्रा के 12 ब्लॉक में विस्फोटक सामग्री फिट की गई थी।   

सुरक्षा कड़ी, दो एंबुलेंस होंगी तैनात
कूलिंग टावर गिराने के दौरान दो एबुलेंस मौके पर तैनात हैं। साथ ही सीआइएसएफ के 100 जवान तैनात किए गए हैं। आग पर काबू पाने के लिए तीन दमकल गाडिय़ां तैनात हैैं।   

हरियाणा की सियासत का भी केंद्र रहा
थर्मल पावर प्लांट प्रदेश की राजनीति का केंद्र भी रहा है। ओमप्रकाश चौटाला ने पानीपत थर्मल पावर प्लांट का नाम बदलकर चौधरी देवीलाल थर्मल प्लांट कर दिया था। भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने अपने पहले कार्यकाल में आते इसका नाम वापस पानीपत थर्मल पावर प्लांट कर दिया था। तब इनेलो ने इसका जबर्दस्त विरोध किया था।

ठ यूनिटों में होता था उत्पादन
वर्ष 1979 में थर्मल की पहली यूनिट से उत्पादन शुरू हुआ था। कोयले से चलने वाली आठ यूनिटों से 1370 मेगावाट बिजली का उत्पादन होता था। यहां कई बार कोयले की कमी के कारण बिजली उत्पादन प्रभावित भी होता रहा। इसके बाद ही सरकार ने यमुनानगर में थर्मल प्लांट स्थापित किया था। 

प्रशासन से मिली अनुमति
थर्मल के चीफ इंजीनियर एसएल सचदेवा ने बताया कि तकनीकी विशेषज्ञों की टीम चार कूलिंग टावरों में से एक को ध्वस्त किया गया। प्रशासन से इसकी अनुमति ले ली गई है। 

 

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Posted By: Anurag Shukla

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