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पानीपत में पिता की मौत, वीडियो कॉल पर देखा अंतिम संस्कार; दामाद और पांचों बेटियों ने किया आने से इनकार

Published: Sat, 07 Nov 2026 10:39 PM (IST)

पानीपत में एक 65 वर्षीय व्यक्ति के निधन के बाद, उनकी पांच बेटियों और दामादों ने अंतिम संस्कार में आने ...और पढ़ें

बेटियों ने वीडियो कॉल पर देखा पिता का अंतिम संस्कार। फोटो जागरण

बेटियों ने वीडियो कॉल पर देखा पिता का अंतिम संस्कार। फोटो जागरण

HighLights

  1. 65 वर्षीय व्यक्ति का निधन, परिवार अंतिम संस्कार में नहीं आया।

  2. बेटियों ने वीडियो कॉल पर पिता को अंतिम विदाई दी।

  3. जनसेवा दल ने पानीपत में पारंपरिक विधि से अंतिम संस्कार किया।

जागरण संवाददाता, पानीपत। जीवनभर बच्चों के भविष्य को संवारने के लिए कड़ा संघर्ष करने वाले एक पिता की अर्थी को कंधा देने के लिए अंततः उनका अपना कोई खून का रिश्ता आगे नहीं आया। मध्य प्रदेश के सिंगरौली के रहने वाले और पानीपत में रह रहे 65 वर्षीय सुशील कुमार सिंह के निधन के बाद ऐसा मार्मिक मामला सामने आया है, जिसने रिश्तों की संवेदनशीलता और पारिवारिक कर्तव्यों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

परिवार के सदस्यों और दामादों द्वारा दूरी व असमर्थता जताए जाने के बाद अंततः जनसेवा दल ने आगे आकर उनका पारंपरिक विधि-विधान से अंतिम संस्कार कराया। बेटियों ने पानीपत आने से इनकार करते हुए मोबाइल स्क्रीन पर वीडियो कॉल के जरिये पिता के अंतिम दर्शन किए और अंतिम विदाई की रस्म पूरी की।

सुशील कुमार सिंह ददलाना गांव की राधा स्वामी कालोनी में टाउनशिप के सामने रहते थे। वह पहले रिफाइनरी में नौकरी करते थे। सीने में दर्द होने से उनका निधन हो गया। पुलिस ने शव सिविल अस्पताल की मोर्चरी में रखवाकर स्वजन को सूचना दी। परिवार ने दूरी का हवाला देते हुए पानीपत आने में असमर्थता जताई। पोस्टमार्टम के बाद शव जनसेवा दल को सौंप दिया गया।

पिता की अंतिम विदाई ने रिश्तों की जिम्मेदारी पर उठाए सवाल

जनसेवा दल के सचिव चमन गुलाटी ने परिवार से संपर्क किया तो पता चला कि सुशील कुमार सिंह की पांच बेटियां हैं। उनकी पत्नी बीमार रहती हैं। तीन बेटियों की शादी हो चुकी है और दो अविवाहित हैं। बेटियों को पानीपत आने के लिए टिकट खर्च देने की पेशकश की गई, लेकिन कोई तैयार नहीं हुआ।

रिश्तेदारों और दामादों ने भी आने से मना कर दिया। बेंगलुरु में रहने वाले एक दामाद ने दूरी के कारण आने में असमर्थता जताई। आखिर में बेटियों ने वीडियो कॉल पर पिता का अंतिम संस्कार दिखाने का आग्रह किया।

आने-जाने का खर्च देने की भी पेशकश

जन सेवा दल ने विधि-विधान से उनका अंतिम संस्कार किया। चमन गुलाटी ने घटना पर दुख जताते हुए कहा कि माता-पिता पूरी जिंदगी बच्चों का भविष्य संवारने में लगा देते हैं। ऐसे में अंतिम समय में परिवार का साथ न मिलना पीड़ादायक है।

माता-पिता का सम्मान केवल जीवनकाल तक सीमित नहीं होना चाहिए; उनकी अंतिम विदाई भी संतान की जिम्मेदारी है। इंसान की कीमत केवल आर्थिक सहायता या मुआवजे से नहीं आंकी जा सकती, रिश्तों में संवेदना और कर्तव्य भी जरूरी हैं।

अस्थियां लेने भी नहीं पहुंचे स्वजन

अंतिम संस्कार के बाद जनसेवा दल ने परिवार से अस्थियां लेने पानीपत आने के बारे में पूछा। स्वजन ने आने में असमर्थता जताते हुए हरिद्वार में अस्थि विसर्जन करने का आग्रह किया। अंतिम संस्कार में किशन मनचंदा, चमन गुलाटी, कमल गुलाटी, समाजसेवी सतीश चुघ, बंटी गांधी, वासुदेव और मदन साइकिल वाले ने सहयोग दिया। परिजनों की अनुपस्थिति में जनसेवा दल ने सुशील कुमार सिंह को सम्मानपूर्वक अंतिम विदाई दी।

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