हरियाणा में धान खरीद नहीं होने पर किसानों ने हाईवे किया जाम, 4 मंडियों में प्रदर्शन; टिकैत ने दी बड़े आंदोलन की चेतावनी
हरियाणा में धान खरीद और उठान में देरी से किसान आक्रोशित हैं, मंडियों में लगभग 22 लाख क्विंटल धान फंसा ...और पढ़ें
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हरियाणा की मंडी में धान का लगा ढेर। फोटो जागरण
HighLights
मंडियों में 22 लाख क्विंटल धान खरीद-उठान के इंतजार में पड़ा है।
किसानों ने यमुनानगर हाईवे जाम कर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया।
राकेश टिकैत ने सरकार को समाधान हेतु एक सप्ताह का समय दिया।
जागरण टीम, पानीपत। पीआर धान की खरीद और उठान नहीं होने से मंडियां अट गई हैं। लगभग 22 लाख क्विंटल धान मंडियों में पड़ा है। करीब ढाई लाख क्विंटल की ही खरीद हुई और उठान न के बराबर हुआ है। इसी समस्या से जूझते किसान रविवार को विरोधस्वरूप हाईवे पर उतर आए।
यमुनानगर में भारतीय किसान यूनियन ने पंचकूला-कलानौर नेशनल हाईवे पर जाम लगा दिया। 30 मिनट तक राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत, एसडीएम और डीएसपी किसानों के बीच बैठे रहे। कुरुक्षेत्र के पिहोवा, करनाल के असंध और घरौंडा एवं अंबाला में किसानों ने प्रदर्शन किए।
रविवार को छुट्टी होने के कारण कोई खरीद नहीं हुई। भाकियू ने सोमवार को शाहाबाद में महापंचायत बुलाई है।
यमुनानगर में डीसी को बुलाने पर अड़े किसान
धान बेचने में आ रही समस्याओं, गन्ने का मूल्य 600 रुपये प्रति क्विंटल करने और अन्य मुद्दों को लेकर भाकियू (टिकैत) ने रविवार को पंचकूला-कलानौर नेशनल हाईवे जाम कर दिया। राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत, प्रदेशाध्यक्ष रतनमान और जिला प्रधान सुभाष गुर्जर सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे।
करीब 30 मिनट तक एसडीएम विश्वनाथ और डीएसपी सुनील कुमार किसानों के बीच बैठे रहे। किसान इस बात पर अड़े रहे कि जिला उपायुक्त प्रीति आकर उनकी समस्याएं सुनें। एसडीएम ने बताया कि डीसी जिले से बाहर हैं।
किसानों को आश्वासन दिया कि उनकी सभी मांगों को सरकार तक पहुंचाया जाएगा। राकेश टिकैत ने प्रशासन को एक सप्ताह का समय दिया और कहा कि यदि इस अवधि में किसानों की समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो बड़े आंदोलन की घोषणा की जाएगी।
महापंचायत में टिकैत ने कहा कि केवल हरियाणा के किसान ही नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश, राजस्थान और अन्य राज्यों के किसान भी भाजपा सरकार से त्रस्त हैं। फसल की बिजाई से लेकर मंडी में बेचने तक के लिए किसानों को आंदोलन करना पड़ रहा है।
सीएम नायब सैनी मंडियों का दौरा कर रहे हैं, लेकिन किसानों की दिक्कतों का समाधान नहीं हो पा रहा है। धान की खरीद के लिए तारीख तय नहीं हो पाई और जब तय हुई तो आधी-अधूरी तैयारियों के साथ सरकारी खरीद शुरू की गई।
पोर्टल जुलाई में बंद, सितंबर में 22 लाख एकड़ मिसमैच क्यों: चढ़ूनी
भारतीय किसान यूनियन (चढ़ूनी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढ़ूनी और किसानों ने अधिकारियों की मंशा पर सवाल उठाए हैं। जब 31 जुलाई को मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल बंद कर दिया गया तो 24 सितंबर को 22 लाख एकड़ का डाटा मिसमैच क्यों हुआ।
खरीद शुरू होने पर तीन दिन में पटवारी इस 22 लाख एकड़ को खेतों में पहुंचकर कैसे वेरिफाई कर सकते हैं। इसी वेरिफिकेशन के कारण गड़बड़ी होती है। अधिकारियों को जानकारी थी कि पोर्टल पर डाटा मिसमैच है। ऐसे में पोर्टल पर खरीद शुरू नहीं हो सकती।
इससे अधिकारियों की नियत में खोट साफ दिखाई दे रही है। जिस डाटा को अधिकारी 24 सितंबर को वेरिफाई करने की बात कह रहे हैं। उनमें से अगर किसी खेत से 10 सितंबर को 1509 किस्म का धान कट गया था। उस खेत में किसान ने आलू की बिजाई कर दी है।
ऐसे में उस खेत की वेरिफिकेशन कैसे की जाएगी? यही अधिकारी किसानों को बरगलाने का काम कर रहे हैं। इनकी नीयत ठीक होती तो 31 जुलाई से 15 सितंबर के बीच में ही वेरिफिकेशन का काम किया जा सकता था।
मएसपी से 150 रुपये कम में धान खरीद रहे मिलर्स
नरवाना में एक सप्ताह से किसान मंडियों में धान डाले हुए हैं। नरवाना में मिल अलाट हुए बिना मिलर्स पीआर धान की खरीद कर रहे हैं।
सरकार द्वारा 2461 रुपये न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारित किया गया है, लेकिन किसानों को 150 रुपये प्रति क्विंटल तक का घाटा उठाना पड़ रहा है। मिलर्स आढ़तियों को बारदाना उपलब्ध करा रहे हैं। जींद में 15 राइस मिलर्स ने पंजीकरण कराया है और 30 के आवेदन आ चुके हैं।
