कैथल, जागरण संवाददाता। हरियाणा सोलर ट्यूबवेल योजना का लाभ लेने के लिए ढांड रोड स्थित आइडीबीआइ बैंक में आवेदन जमा न करने पर किसानों का गुस्सा फूट पड़ा। किसानों ने बैंक के बाहर एकत्रित होकर बैंक प्रशासन के विरुद्ध रोष जताया। किसानों का आरोप है कि बैंक प्रशासन मिलीभगत करते हुए सिफारिश वाले लोगों के आवेदन जमा कर रहा है। जबकि दूरदराज से आए किसानों की कोई सुनवाई नहीं हो रही है। किसानों ने बताया कि सुबह तो लाइन में लगे 105 के करीब किसानों को टोकन दे दिए, लेकिन 29 आवेदन लेने के बाद आगे आवेदन लेने से मना कर दिया। किसानों ने कहा कि अपने चहेते किसानों के फार्म लेकर निर्धारित लक्ष्य को पूरा कर दिया, जबकि किसान लाइनों में इंतजार करते रहे गए।

करीब दो माह बाद खुला पोर्टल, दूसरे दिन ही हुआ बंद

डुमरखां गांव निवासी किसान विरेंंद्र, नरड़ निवासी गुरमीत, चौशाला निवासी सत्यवान, खनौदा निवासी विकास व अमन ने बताया कि स्कीम के तहत सरकार की तरफ से खेतों में सौर ऊर्जा के तहत ट्यूबवेल कनेक्शन देने के लिए आवेदन मांगे गए थे। सरल पोर्टल पर आवेदन करने थे। पहले यह सितंबर व अक्टूबर माह में खुला था, लेकिन कुछ दिनों के बाद ही पोर्टल बंद हो गया था, दोबारा से सोमवार को पोर्टल खुलने की जानकारी किसानों को मिली तो किसान बैंक में आवेदन जमा करवाने के लिए पहुंचे। किसानों को बैंक में अंदर जाने के लिए टोकन दिए गए, लेकिन मात्र 29 किसानों के ही आवेदन लिए गए, इसके बाद आवेदन लेने से इंकार कर दिया।

किसानों को हो रही परेशानी

किसानों ने बताया कि सर्दी के इस मौसम में दूर-दराज से आए किसानों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। किसान किराया लगाकर ठंड के मौसम में यहां आए हैं, लेकिन किसानों की कोई सुनवाई नहीं की जा रही है, यह कहकर आवेदन लेने से मना कर दिया कि विभागीय अधिकारियों ने आगे आवेदन लेना बंद कर दिया है। अब उनका क्या कसूर है, सुबह से बिना खाना खाए यहां लाइनों में लगे हुए हैं, यह किसानों के साथ अन्याय है। इस योजना के तहत किसानों को खेतों में सिंचाई को लेकर काफी फायदा है। न बिजली बिल और न ही बिजली आने-जाने की चिंता रहती है।

मंगलवार को 70 आवेदन लिए गए

आइडीबीआइ बैंक के मैनेजर सुरेश तनेजा ने बताया कि योजना के तहत आवेदन लेने के लिए दो दिन पहले ही पोर्टल खुला था। पहले दिन 102 आवेदन लिए थे। मंगलवार को भी सुबह के समय 70 आवेदन लिए गए थे। इसके बाद किसानों को टोकन देकर आवेदन लेने शुरू किए। 29 आवेदन लेने के बाद उच्चाधिकारियों की तरफ से आगे आवेदन न लेने बाद निर्देश जारी हुए। किसानों को इस बारे में बताया गया, लेकिन किसान कोई बात सुनने तो तैयार नहीं है।

Edited By: Rajesh Kumar