जागरण संवाददाता, पानीपत : शहर के एक नेताजी आजकल चर्चाओं में हैं। अब एक और नए मामले में नेताजी का नाम सामने आया है। शहर की एक बड़ी धार्मिक संस्था के पूर्व प्रधान और एक अन्य प्रतिष्ठित व्यक्ति ने इन्हीं नेताजी के सहारे एक अवैध कॉलोनी में फैक्ट्री और ऑफिस बना दिया। अवैध निर्माण की सूचना मिली तो पंजा लगाकर निर्माण गिरा दिया। फैक्ट्री टूटने लगी तो पूर्व प्रधानजी ने नेताजी को फोन लगाया। नेताजी फिर कहां फोन उठाने वाले थे। आंखों के सामने सपने टूटते देख नेताजी के साथ रहने वालों को फोन किया, लेकिन वे भी साथ छोड़ गए। पंजेवाले विभाग ने कुछ ही देर में सब धराशाही कर दिया। अब पूर्व प्रधान और दूसरे वाले भाई साहब की चिता है कि घर से लक्ष्मी भी गई और कुछ बचा भी नहीं पाए।

जोगिया शहर के एक व्यापारी संगठन के पदाधिकारी के पास बैठा था। तभी एक अन्य व्यापारी भी आ पहुंचा। 44 डिग्री तापमान में स्कूटी पर आए व्यापारी का चेहरा लाल था। पहले व्यापारी ने पूछा आओ सेठजी आप चाय लेंगे या ठंडा। स्कूटी वाला व्यापारी बोला भाई मुझे न तो चाय चाहिए और न ही ठंडा। मुझे तो कुछ देर का चैन चाहिए। वह बोला- पूर्व प्रधानजी ने काम धंधा बढ़ाने के लिए फैक्ट्री लगानी शुरू की थी। नेताजी ने पूरा भरोसा दिया था और लक्ष्मी भी अच्छी खासी ली थी। अब फैक्ट्री लेंटर तक पहुंच गई तो उसको पंजा लगाकर तोड़ दिया। नेताजी ने फोन तक नहीं उठाया। शाम को घर जाकर मिले तो नेताजी ने एक बात को दबाने के लिए दस तरह की बात बनाई।

ग्रुप डी वालों बने बाबूजी

पिछले दिनों सोशल मीडिया पर छाए रहे ग्रुप डी वाले अब फिर चर्चाओं में हैं। वे कुर्सी मिलने पर बाबूजी जो बन गए हैं। अच्छे पढ़े लिखे और शैक्षणिक योग्यता वाले इन कुर्सियों पर फीट भी बैठ रहे हैं। वह चाहे जिला मुख्यालय हो या फिर दूसरे विभाग। निगम में माली के पद पर काम करने वाले एक ग्रुप डी वाले को दो दिन पहले ही एक बडे़ अफसर का पीए बना दिया। ग्रुप डी को बाबू बनाने की तकरार सरकारी विभागों में भी खूब है। इनके आने पर पहले से सीटों पर बैठे बाबुओं को साइड में कर दिया है। कई दूसरे बाबू परेशान हैं।

प्रस्तुति : जगमहेंद्र सरोहा

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Posted By: Jagran

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