पानीपत [रवि धवन]। वैसे तो हरियाणा में मुख्यमंत्री मनोहर लाल से हाई कमान संतुष्ट है। लेकिन शाही पोलिट्रिक्स के बारे में कौन जानता है। परिवर्तन का मोदी मंत्र कब किसका संहार कर दे। राजनीति में सब संभव है। सो, मान लीजिए कि ऐसा होता है तो हरियाणा की महि (धरती) को पालने का दायित्व किसको सौंपा जाएगा। यदि उत्तराखंड की बात करें तो, जो मुख्यमंत्री बनाए गए हैं, उसके पहले वह कभी मंत्री नहीं रहे। हां, विधायक जरूर दूसरी बार चुने गए हैं। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से आते हैं। अब अगर यह फार्मूला देखा जाएगा तो अपने पानीपत के ही एक विधायक ही नजर आते हैं। पार्टी के प्रति निष्ठावान हैं। जनाधार भी है। और बड़ी बात यह कि वह वास्तव में किसान है और सच्चे किसान के शपथ लेते ही प्रदेश के आंदोलनकारी किसान खुशी-खुशी घरों को वापस लौट जाएंगे। प्रदेश में भाजपा की जीत का मार्ग भी प्रशस्त हो जाएगा।

पानीपत की पिच पर योगी की चुस्त फील्डिंग

पंजाब में सिद्धू के हिटविकेट होने के बाद हरियाणा के नेता सबक ले चुके थे। सो, सैलजा की कप्तानी को स्वीकार न करने वाला हुड्डा का पूरा खेमा पानीपत की पिच पर पहुंच गया। सैलजा का खेमा तो खैर था ही। देखने वाले हैरान थे। सुनने वाले मानने को तैयार नहीं थे। दरअसल, इसकी वजह थीं प्रियंका गांधी। प्रियंका गांधी को हिरासत में रखे जाने का विरोध कर सब मौके को भुनाना चाहते थे। तो साहब, सैलजा-हुड्डा खेमा एकजुट होकर बार्डर से लखीमपुर रवाना होने के लिए गाड़ियां स्टार्ट करने लगा। लेकिन यह क्या? योगी आदित्य नाथ की पुलिस ने पानीपत की पिच पर जबरदस्त फील्डिंग सजा रखा थी। उत्तर प्रदेश सीमा की बात ही छोड़िए, हरियाणा में दो जगह नाके लगा रखे थे। उत्तर प्रदेश पुलिस से कांग्रेसियों ने उलझने का कोई प्रयास भी नहीं किए। गाते हुए लौट आए, योगी हम यूपी न जा पाए तेरे राज में।

सेठ जी ने गलत लठ उठा लिया

हरियाणा में लठ उठाने का एक मनोहर बयान बेहद चर्चित हुआ। इसी से प्रेरणा लेकर पानीपत के सेक्टर 12 के एक सेठ जी ने लठ उठा लिया। धावा बोल दिया बंदरों पर। एक बंदर की सिकाई भी कर दी। इससे क्षुब्ध सेक्टर के सारे बंदर सेठ जी के घर पर पहुंच गए। लेकिन ये बंदर भी गांधी जी वाले थे। कोई नुकसान नहीं। कोई हिंसा नहीं, बस सेठ जी के घर के बाहर धरना देकर बैठ गए। रात भर घर के बाहर मौजूद रहे। किसी को बाहर नहीं निकलने दिया। आखिरकार सेठ ने बंदर पकड़ने वाले को फोन किया। वो सुबह तक आया भी, पर उसने भी सभी को पकड़ने से हाथ खड़े कर दिए। फिर घर के सदस्य बाहर आए। सेठ जी ने लठ फेंककर अपना कान पकड़ा। को नहीं जानत है कपि संकट मोचन नाम तिहारो का पाठ किया। तब कहीं जाकर सेठ जी को क्षमा दान मिला।

यारी है ईमान मेरा

यारों का यार है नीरज चोपड़ा। ये बातें नीरज के दोस्त गर्व से कहते हैं। कहें भी क्यों न। ओलिंपिक में स्वर्ण पदक जीता तो दोस्तों को लगा कि अब नीरज से बात नहीं हो सकेगी। क्या पता, कभी हाथ मिला सकेंगे या नहीं। गांव में जब स्वागत हुआ, तब नीरज किसी दोस्त से मिल भी नहीं सके। तब मन में ये सवाल और घर कर गया कि अब दोस्त दोस्त न रहा। पर निज्जू ने उन्हें गलत ठहरा ही दिया। चुपके से गांव में आए। केवल दोस्तों को फोन करके घर बुलाया। पूरे दो दिन घर में डीजे लगाकर जमकर पार्टी की। पुराने दोस्तों के साथ जीभर बातें, खूब फोटो कराए। जाते-जाते बोल भी गए, ये मत समझना कि नीरज बदल गया। आज भी निज्जू ही हूं। अपने पहले कोच जयवीर को दुबई तक ले जाकर भी बता दिया कि नीरज के लिए यारी ईमान है। यारी जिंदगी है।

Edited By: Anurag Shukla