करनाल, जेएनएन। खेती-बाड़ी में पानी बचाने की कवायद के तहत फसल विविधीकरण पर खास जोर दिया जा रहा है। इसमें अब सामाजिक क्षेत्र में अच्छा प्रभाव रखने वाले भी हरसंभव योगदान देने आगे आ रहे हैं। इसी क्रम में आर्य विद्वान एवं योग गुरु स्वामी संपूर्णानंद के आश्रम में भी मक्के की बिजाई की गई। स्वामी संपूर्णानंद ने अन्य किसानों को भी फसल विविधीकरण के फायदे गिनाते हुए यह सिलसिला इसी प्रकार आगे बढ़ाने पर बल दिया। 

नलवीखुर्द गांव स्थित स्वामी सम्पूर्णानंद के आश्रम के दो एकड़ क्षेत्रफल पर न्यूमेटिक मेज प्लांटर द्वारा मक्के की बिजाई की गई। सिमिट के सहायक वैज्ञानिक डॉ. योगेश कुमार और कुंजपुरा के कृषि विकास अधिकारी राकेश सहारण की देख-रेख में यह कार्य किया गया। हरियाणा में जमीन के घटते जल स्तर को बचाने के लिये सरकार ने मेरा पानी मेरी विरासत योजना शुरू की है। इस बाबत कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के उप निदेशक डा. आदित्य डबास ने बताया कि योजना का लाभ लेने के लिये पोर्टल पर पंजीकरण जरुरी है।

प्रति एकड़ मिलेंगे 7 हजार रुपये

योजना के तहत धान की जगह मक्का, कपास, अरहर, मूंग, मोठ, उड़द, सोयाबीन, तिल, मूंगफली व खरीफ सीजन के सभी चारे, खरीफ प्याज, बागवानी सब्जियां लगाने पर किसान को सात हजार रुपये प्रति एकड़ की दर से प्रोत्साहन राशि मिलेगी। यह राशि विभाग, द्वारा विभागीय अधिकारियों या कर्मचारियों द्वारा सत्यापन के उपरांत किसान के बैंक खाते में जमा की जायेगी। डा. डबास ने बताया कि मेरी फसल मेरा ब्यौरा पोर्टल पर पंजीकरण करवाने के उपरांत किसान न्यूनतम समर्थन मूल्य पर मक्के की फसल बेच सकते हैं। इस पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है। इसके बिना किसान को योजना का लाभ नही मिलेगा। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत मक्के की फसल का बीमा भी सरकार द्वारा करवाया जायेगा। 

लगातार दूसरे वर्ष की बिजाई

अपने आश्रम की भूमि पर मक्के की बिजाई के संदर्भ में योग गुरु स्वामी सम्पूर्णानंद  ने बताया कि मेरा पानी मेरी विरासत योजना के अंतर्गत उन्होंने गत वर्ष भी दो एकड़ क्षेत्रफल में जीरी की जगह मक्का की फसल की बिजाई की थी। सरकार की जल बचाने की जो मुहिम है, उसमें हर किसान को योगदान देना चाहिए क्योंकि धान की फसल में जल की बहुत खपत है। किसानों को ध्यान रखना चाहिए कि पानी की अधिक लागत के अलावा अन्य तरह की परेशानियां भी धान लगाने के समय आती हैं। ऐसे में धान की जगह अन्य वैकल्पिक फसलों को लेने से खेत की उर्वरक क्षमता बढे़गी और पैदावार भी ज्यादा होगी।

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