पानीपत, जागरण संवाददाता। बिजली टावर की शिफ्टिंग नहीं होने से डाहर स्थित नई शुगर मिल में डिस्टलरी के निर्माण को ग्रहण लगा है। मिल प्रबंधन ने रेलवे के डिमांड पर उसके खाते में 36 लाख रुपये जमा करवा दिए हैंं। टावर की साइट का निरीक्षण होना है। उसके बाद रेलवे को दिन और समय निर्धारित करना होगा। उसके बाद ही टावर की शिफ्टिंग हो सकेगी।

रेलवे को इसी टावर से मिलती बिजली

उल्लेखनीय है कि नई शुगर मिल चालू हो सकी है। मिल परिसर से गुजर रही 132 केवी हाईटेंशन तार डिस्टलरी के निर्माण में बाधक बना है। उक्त टावर से रेलवे को बिजली दी जाती है। ट्रेने चलती है। रेलवे को सोच समझकर इसका परमिशन देना है। जिससे यात्री सहित रेलवे को किसी तरह की परेशानी नहीं हो।

रेलवे ने बजट बनाकर दे दिया

करीब छह माह से शुगर मिल प्रबंधन द्वारा टावर को शिफ्ट करने का प्रयास किया जा रहा है। रेलवे से पहले मंजूरी ली गई है। फिर रेलवे ने बजट बनाकर दिया है। बजट के 36 लाख रुपये भी शुगर मिल ने रेलवे के खाते में अक्टूबर माह में जमा करा दिए हैं। अब भी रेलवे से टाइम निर्धारित नहीं किया जा रहा है। वहां से टाइम निर्धारित होने के बाद शुगर मिल टावर शिफ्टिंग की तैयारी करेगा। टावर हटाने के बाद डिस्टलरी निर्माण का टेंडर लगाया जाएगा। शार्ट टेंडर लगाकर ठेकेदार से सीजन के दौरान काम पूरा करने कहा जाएगा।

शुगर मिल के आय का मुख्य साधन है डिस्टलरी

डिस्टलरी शुगर मिल के आय के मुख्य संसाधनों में एक है। मिल को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सरकार ने इसके निर्माण का फैसला लिया है। शुगर मिल के सिरे से ही डिस्टलरी में शराब का निर्माण किया जाएगा। शुगर मिल के एमडी नवदीप सिंह ने बताया कि रेलवे की टीम टावर की साइट का निरीक्षण करने आएगी। उसके बाद शिफ्टिंग का समय दिया जाएगा।

Edited By: Anurag Shukla

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