जागरण संवाददाता, समालखा:

नगरपालिका अधिकारी को अब कस्बे के विकास की चिता सताने लगी है। सचिव ने डीएमसी के मार्फत शहरी स्थानीय निकाय के निदेशक से नियमित पालिका अभियंता (एमई) लगाने की फरियाद की है। विकास कार्यों के प्रभावित होने का हवाला दिया है। उल्लेखनीय है कि पालिका में करीब ढाई साल से अभियंता का पद रिक्त है। गन्नौर और पानीपत नगर निगम के अभियंता को अतिरिक्त प्रभार देकर कागजी काम करवाया जाता है। वर्क लोड का हवाला देकर अतिरिक्त प्रभार के एमई उच्चाधिकारी के बुलाने पर ही पालिका कार्यालय में दर्शन देते हैं। अधूरे विकास कार्यों के बारे में जानकारी नहीं होने की बात कहकर पल्ला झाड़ लेते हैं। नए टेंडर लगाने में भी दिलचस्पी नहीं लेते हैं। अभियंता के नहीं होने से सालों से कस्बे के विकास कार्य ठप पड़े हैं। सीएम घोषणा के फंड का भी टेंडर नहीं लगाया जा सका है। पुराने घोषणाओं के करोड़ों के कार्य भी अधूरे पड़े हैं। कार्यों की लागत भी बढ़ती जा रही है। रिवाइज टेंडर भी पास नहीं हो रहे हैं। अब तो गन्नौर के अतिरिक्त प्रभार के एमई के तबादले से विगत एक सप्ताह से नपा के पास कागजी हस्ताक्षर के लिए भी एमई नहीं है। करीब दर्जन के कार्यों पर लगा है ब्रेक

सीएम ने 2018 में जौरासी गांव की रैली में नपा के विकास के लिए 5 करोड़ रुपये देने की घोषणा की थी। पार्षदों के बीच चयनित कार्यों को लेकर विवाद और पालिका अभियंता की कमी से उक्त कार्य चार साल बाद भी सिरे नहीं चढ़ सके हैं। गत जुलाई में पालिका भंग होने के बाद विवाद भी शांत हो गया है, लेकिन अभियंता की कमी से टेंडर नहीं लगाया गया है। कस्बे में नए कार्य शुरू नहीं हो रहे तो पहले से चल रहे निर्माण कार्य अधूरे पड़े हैं। बारात घर, फाइव पाउंड, रेलवे पार्क, पंजाबी धर्मशाला आदि महत्वपूर्ण कार्य अधूरे पड़े हैं।

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सचिव मनीष शर्मा ने बताया कि डीएमसी के माध्यम से निदेशक के पास स्थाई एमई के लिए गुहार लगाई गई है। स्थाई एमई के आने से ही विकास कार्य संभव है। अधूरे कार्यों को दोबारा चालू करवाया जा सकता है।

Edited By: Jagran