अंबाला, जागरण संवाददाता। अंबाला में डेंगू का डंक बेकाबू होता जा रहा है। ट्रामा सेंटर के मेल व फीमेल वार्ड डेंगू मरीजों से हाउस फूल हो गए हैं। हालांकि मरीजों की सुविधा के लिए गैलरी में बेड बढ़ा दिए हैं। मेल व फीमेल वार्ड में डेंगू के मरीजों के लिए 29 बेड हैं, जबकि मरीजों की संख्या 31 पहुंच गई है। मजबूरी में एक बेड पर दो मरीजों का इलाज किया जा रहा है।

मालूम हो कि अंबाला में डेंगू के मरीजों का ग्राफ निरंतर बढ़ रहा है। जिले में अभी तक 122 डेंगू के मरीज मिल चुके हैं। वहीं मरीजों के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और सिविल अस्पताल में डेंगू के मरीजों के लिए आइसोलेशन वार्ड बना दिए हैं। इसके बावजूद भी ट्रामा सेंटर के मेल व फीमेल वार्ड में डेंगू मरीजों को इलाज के लिए बेड नहीं मिल रहे हैं। हालांकि बेड नहीं मिलने पर मरीजों के लिए गैलरी में चार बेड और एक कमरे में तीन बेड़ बढ़ा दिए हैं। इसके बाद भी डेंगू मरीजों को बेड का संकट बना है। मजबूरी में एक बेड पर दो मरीजों का इलाज किया जा रहा है। हालांकि सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर डेंगू वार्ड में मरीज नहीं हैं। यहां के मरीज भी छावनी और सिटी अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती होने के लिए पहुंचते हैं। इस वजह से ट्रामा सेंटर के डेंगू वार्ड में मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। इस संबंध में जिला महामारी नियंत्रक अधिकारी डा. सुनील हरि ने बताया कि जिले में डेंगू के अभी तक 140 मरीज मिल चुके हैं। मरीजों की सुविधा के लिए सीएचसी व पीएचसी पर आइसोलेशन वार्ड बना दिए हैंं।

वार्ड में स्टाफ कर्मियों की कमी

ट्रामा सेंटर के मेल व फीमेल वार्ड में मरीजों के लिए 29 बेड हैं, और 31 मरीज भर्ती हैं। इसके विपरीत रात व दिन में एक ही स्टाफ नर्स की ड्यूटी लगी है। ऐसे में एक नर्स 29 मरीजों की देखभाल करना संभव नहीं है। इस वजह से एक नर्स को मरीजों का इलाज करने में काफी परेशानी होती है।

अंबाला में वर्ष 2016 में डेंगू बेकाबू रहा था। इस दौरान वर्ष 2016 में डेंगू के 580 मरीज मिले थे। इसके बाद वर्ष 2017 में 325 मरीज मिले थे, तो वर्ष 2018 में डेंगू के 110 मरीज मिले थे। साथ ही वर्ष 2019 में डेंगू के 124 मरीज मिले थे। इसके बाद फिर से डेंगू बेकाबू होता जा रहा है। जिले में अभी तक 122 डेंगू के मरीज मिल चुके हैं।

Edited By: Anurag Shukla