कैथल, जागरण संवाददाता। कोरोना संक्रमण के बढ़ते केसों के कारण जिला नागरिक अस्पताल की ओपीडी पर भी असर पड़ा है। अब आधे मरीज ही बीमारियों की जांच को लेकर पहुंच रहे हैं, इसका कारण चिकित्सकों व स्टाफ के कोरोना संक्रमित होना है। अब तक जिला नागरिक अस्पताल के पांच चिकित्सक कोरोना संक्रमित हो चुके हैं, इनमें  दो  हड्डी रोग विशेषज्ञ, एक महिला रोग विशेषज्ञ, एक गला-नाक-कान रोग व एक टीबी व छाती रोग विशेषज्ञ शामिल है।

रोजाना 100 से ज्यादा महिलाएं जांच के लिए पहुंची थी, अब 50 से भी कम है ओपीडी

कैथल अस्पताल में पहले ही गायिनी व फिजिशियन की कमी है। वैसे तो तीन फिजिशियन हैं, लेकिन तीन में से दो छुट्टी पर चल रहे हैं और एक चिकित्सक ड्यूटी पर नहीं आ रहा है। इस कारण मरीजों को बिना इलाज के वापस लौटना पड़ रहा है, कोरोना महामारी के दौरान चिकित्सकों की कमी होना बड़ी परेशानी बढ़ रहा है। गायिनी वार्ड में भी ऐसी ही स्थिति है। यहां स्वीकृत पद तो छह हैं, लेकिन तीन चिकित्सक ही कार्य कर रहे हैं, इनमें से भी एक चिकित्सक कोरोना संक्रमित हो गई थी, उन्होंने सोमवार को दोबारा से ज्वाइन किया है। गायिनी वार्ड में गर्भवती महिलाओं की ओपीडी पहले से कम हुई है। कोरोना महामारी को देखते हुए गर्भवती महिलाओं को जरूरत अनुसार ही अस्पताल आने की बात कही जा रही है। एक माह की दवाई देकर अस्पताल से भेजा जा रहा है, ताकि संक्रमण के दौरान अस्पताल के चक्कर न लगाने पड़े।

एक महिला रोग विशेषज्ञ के कोरोना संक्रमित होेने से दो डाक्टरों पर बढ़ रहा काम का बोझ

जिला नागरिक अस्पताल की कार्यकारी पीएमओ डा. रेनू चावला ने बताया कि कोरोना महामारी के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए ऐसी सावधानी बरती जा रही है। ओपीडी में आने वाले लोगों को एक माह की दवाई देकर भेजा जाता है, ताकि बार-बार चक्कर न काटने पड़े। लोगों को जरूरत अनुसार ही अस्पताल आने की बात कही जा रही है। इस समय अस्पताल के तीन चिकित्सक कोरोना संक्रमित हैं, जो होम आइसोलेट में हैं। चिकित्सकों के संक्रमित होने से ओपीडी पर असर पड़ रहा है, क्योंकि पहले ही चिकित्सकों की काफी कमी है। फिल्ड से चिकित्सकों की ड्यूटी लगाकर काम चलाया जा रहा है।

Edited By: Naveen Dalal