जींद, [कर्मपाल गिल]। कोरोना महामारी ने अब शहर के साथ गांवों के लोगों को भी चपेट में लेना शुरू कर दिया है। खासकर शहर के साथ लगते गांवों में कोराेना से ज्यादा मौतें हो रही हैं। अप्रैल और मई में एकाएक हो रही मौतों ने गांवों के लोगों में भी डर बैठा दिया है।

जींद जिले के गांव किलाजफरगढ़ में मई महीने में ही दस लोगों की मौत हो चुकी हैं। इनमें 50 साल से कम उम्र के भी हैं और बुजुर्ग भी। बुधवार को गांव में तीन चिताएं जली थी। शुक्रवार भी दो की मौत हो गई। ग्रामीणों का कहना है कि सबको एक-दो दिन बुखार होता है और मौत हो जाती है। इससे गांव के लोगों में दहशत बढ़ रही है।

ग्रामीणों ने मांग की है कि स्वास्थ्य विभाग का पूरे गांव में सैंपलिंग करनी चाहिए और वैक्सीनेशन अभियान चलाना चाहिए। इसी तरह जींद शहर के साथ लगते गांव ईक्कस में भी अप्रैल और मई में आठ लोगों की मौत हो चुकी है। गांव के सरपंच हरपाल ढुल कहते हैं कि दिसंबर के बाद से गांव में खरड़ ही नहीं उठा है। एक की तेरहवीं होती है तो दूसरे की मौत हो जाती है। दिसंबर से अब तक 20 लोगों की मौत हो चुकी है। इसी तरह गांव खोखरी में बीते आठ दिन में छह लोगों की मौत हो चुकी है।

गांव के विरेंद्र बताते हैं कि इन मृतकों में एक कोरोना पॉजिटिव था। बाकी को कई दिन से बुखार चल रहा था। इनके अलावा कई अन्य गांवों में कोरोना संक्रमण और मौत के मामले बढ़ रहे हैं। नरवाना के उझाना गांव में भी कोरोना के कई मौत हो चुकी हैं और कई लोग पॉजिटिव आ चुके हैं। लापरवाही की हद यह है कि इन मौतों पर ग्रामीण कह रहे हैं कि ये बुखार या हार्ट अटैक से हो रही हैं, जबकि पहले एक ही महीने में कभी इतनी मौतें नहीं हुई।

बहबलपुर के सरपंच देवेंद्र दूहन कहते हैं कि गांवों को कोरोना से बचाने के लिए खुद ग्रामीणों को पहले ही सजग रहना होगा। ठीकरी पहरा जैसे बंदोबस्त करने पड़ेंगे और इकट्ठे बैठकर हुक्का व ताश खेलना छोड़ेंगे, तभी गांवों के लोगों को बचाया जा सकेगा। मास्क के प्रति वे गांवों के लोगों को जागरूक करने का अभियान चलाएंगे।

अभी भी ताश खेल रहे व इकट्ठे हुक्का पी रहे

गांवों में कोरोना ने इंट्री कर ली है, लेकिन ग्रामीण अब भी सतर्क नहीं हुए हैं। लोग इकट्ठे बैठकर ताश की बाजियां लगा रहे हैं और मंडली में बैठकर हुक्का पी रहे हैं। यही कोरोना के बढ़ने का बड़ा कारण माना जा रहा है। दैनिक जागरण ने कई गांवों के लोगों के साथ बातचीत की तो ज्यादातर का कहना था कि गांव में दो प्रतिशत लोग भी मास्क नहीं लगाते। सभी खुले मुंह लापरवाही से घूम रहे हैं। गांव मेहरड़ा के चांदराम आर्य बताते हैं कि गांव में कोई भी कोरोना के नियमों का पालन नहीं कर रहा। मास्क लगाना तो बहुत दूर की बात है।

युवा थोड़े सजग, बुजुर्ग नहीं मान रहे कोरोना

दैनिक जागरण ने कई गांवों के लोगों से बातचीत की तो निष्कर्ष निकला कि ज्यादातर युवा अब कोरोना को महामारी मान रहे हैं। इसलिए वे वैक्सीनेशन भी लगवा रहे हैं और सावधानी भी बरत रहे हैं। लेकिन बुजुर्ग अब भी यही कह रहे हैं कि कोरोना कुछ नहीं है। यह तो घोटाला है। लोगों को डराया जा रहा है ताकि सरकारों की नाकामी पर लोगों का गुस्सा न फूट सके। अपनी विफलता छिपाने को कोरोना का नाम लेकर डरा रहे हैं। जबकि गांवों में बुखार व कोरोना से मरने वालों में बुजुर्गों की संख्या ज्यादा है।

सीएमओ डा. मनजीत सिंह बोले: बड़े स्तर पर करेंगे सैंपलिंग

सवाल: गांवों में कोरोना के केस बढ़ रहे हैं। विभाग की सैंपलिंग की क्या योजना है?

जवाब: हमारे पास 12 हजार रैपिड किट आ गई हैं। दो-तीन हजार और जाएंगी। गांवों में बड़े स्तर पर सैंपलिंग करेंगे। हर गांव को कवर किया जाएगा। सैंपलिंग की रिपोर्ट भी तुरंत आ जाएगी।

सवाल: गांवों में वैक्सीनेशन अभियान को लेकर क्या रणनीति है?

जवाब: सभी सीएचसी और पीएचसी स्तर पर वैक्सीनेशन अभियान चला रहे हैं। बड़े गांवों में सब सेंटर पर कैंप लगा चुके हैं। गांवों के लोग कम वैक्सीनेशन करवा रहे हैं। अब दोबारा फिर वैक्सीनेशन के प्रति जागरूकता अभियान चलाएंगे और टीके लगाए जाएंगे।