यमुनानगर, [संजीव कांबोज]। यमुनानगर के दामला में रहने वाले किसान धर्मवीर सिंह के संघर्ष की कहानी पढ़कर सीबीएसई (सेंट्रल बोर्ड आफ सेकेंडरी एजूकेशन) के 12 वीं कक्षा के विद्यार्थी स्वरोजगार अपना सफलता की सीढ़ी चढ़ना सीखेंगे। सीबीएसई ने बिजनेस स्टडीज पार्ट- 1 की किताब में 10 वीं पास किसान की उपलब्धियों और संघर्ष के बारे बताया है। दिल्ली की गलियों में रिक्शा चलाने से लेकर सफल उद्यमी बनने के सफर के बारे में पढ़ाया जाएगा।

धर्मवीर सिंह 1986-87 में काम की तलाश दिल्ली गए थे। करीब सात महीने तक उन्होंने वहां रिक्शा चलाया। इस दौरान कार से एक्सीडेंट होने पर रिक्शा चलाना छूट गया और धर्मवीर वापस घर आ गए। कुछ समय तक परंपरागत खेती की , लेकिन बहुत कमाई नहीं हो रही थी। 1996 में धर्मवीर ने औषधीय पौधों की खेती शुरू की, लेकिन इसमें भी धर्मवीर का ज्यादा मन नहीं लगा।

धर्मवीर कुछ अलग और नया करना चाहते थे। साल 2006 में धर्मवीर ने एक मशीन बनाई। इस मशीन से फल-सब्जियों से विभिन्न उत्पाद तैयार किए जा सकते थे। इस मल्टीप्रोसेसिंग मशीन को बनाने के बाद धर्मवीर के जीवन ने करवट लेना शुरू किया। पड़ोसी देश नेपाल और बांग्लादेश के साथ-साथ अमेरिका और अफ्रीकी देशों नाइजीरिया, युगांडा, कीनिया, जिम्बाब्वे, इथोपिया में भी इस मशीन की काफी मांग है। इसके अलावा सब्जियों को सुखाने के लिए ट्रे ड्रायर मशीन व स्टोरेज टैंक भी धर्मवीर तैयार करते हैं।

नेशनल इनोवेशन फाउंडेशन ने दिया स्थान

कठोर परीश्रम के दम पर सफल उद्यमी बने धर्मवीर जब छठी कक्षा में थे तब उन्होंने इलेक्ट्रिक हीटर व बोरिंग करने की मशीन का माडल तैयार कर दिया था। धर्मवीर की खोजों को नेशनल इनोवेशन फाउंडेशन इंडिया ने प्रमुखता से स्थान दिया है। सीबीएसई ने धर्मवीर के बारे में तमाम जानकारी यहीं से ली।

दो वर्ष पहले सीबीएसई के सचिव ने किया था फोन

धर्मवीर ने बताया कि दो वर्ष पहले उनके पास सीबीएसई के सचिव का फोन आया था। तब उन्होंने पूछा था कि यदि आपकी उपलब्धियों को हम सीबीएसई के पाठ्यक्रम में शामिल करें तो आपको एतराज तो नहीं। शुक्रवार को जयपुर से जानकार डा. महेंद्र मधूप ने धर्मवीर को फोन किया। उन्होंने बताया कि उनके दोहते की सीबीएसई की पुस्तक में धर्मवीर के बारे में लिखा है। यह सुनकर धर्मवीर की खुशी का ठिकाना न रहा।

एलोवेरा और तुलसी की खेती के साथ फूड प्रोसेसिंग मशीनें निर्यात करते हैं धर्मवीर

इन दिनों धर्मवीर एलोवेरा व तुलसी की खेती कर रहे हैं। गांव दामला में ही धर्मवीर फूड टेक्नोलाजी प्राइवेट लिमिटेड नाम से कंपनी चला चला रहे हैं। इसमें मल्टीपर्पज फूड प्रोसेसिंग मशीनें बनाई जा रही हैं। इनके द्वारा निर्मित मशीनें कीनिया, जिंबाब्वे, नाइजीरिया, युगांडा, गिनी, न्यूयार्क, आस्ट्रेलिया व जापान की जायका कंपनी ने मशीनें खरीदी हैं। जल्द ही मलेशिया में भी मशीनें निर्यात की जाएंगी। उनकी कंपनी का सलाना टर्नओवर करीब सवा करोड़ रुपये है।

ये उपलब्धियां की हासिल

वर्ष 2009 में तत्कालीन राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने कृषि जगत में उत्कृष्ट कार्य करने पर सम्मानित किया

वर्ष 2010 में तत्कालीन केंद्रीय कृषि मंत्री शरद पवार ने फार्मर साइंटिस्ट अवार्ड दिया

वर्ष 2013 में फूड प्रोसेसिंग मशीन बनाने पर फर्स्ट नेशनल अवार्ड दिया गया

वर्ष 2014 में एक जुलाई से 30 जुलाई तक राष्ट्रपति के अतिथि बनकर रहे

वर्ष 2015 में जिम्बांबवे के राष्ट्रपति राबर्ट मुगांबे ने मल्टीपर्पज मशीन बनाने के लिए सम्मानित किया

Edited By: Anurag Shukla