पानीपत/कैथल, जेएनएन। कैथल में सीबीआइ ने मस्ताना राइस मिल में रेड की है। सीबीआइ की टीम के साथ रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया का कोई अधिकारी भी है। मस्ताना राइस मिल और उनके घर दोनों जगह टीम ने छापा मारा है। न किसी को अंदर और न किसी को बाहर जाने दिया जा रहा। 

मस्ताना फूड प्राइवेट लिमिटेड कैथल के दो भाई के पार्टनरशिप में है। इसमें एक भाई अनिल मस्ताना है। इनका हुडा में निवास भी है। साथ ही राइस मिल कुरुक्षेत्र रोड में है। सुबह करीब साढ़े दस बजे सीबीआइ की दो टीमें छापे के लिए निकलीं। एक टीम मिल में गई तो दूसरी टीम उनके घर पहुंच गई। 

कल रात को ही आ गई थी टीम

सीबीआइ की टीम बुधवार रात को ही दिल्ली से कैथल में आ गई थी। कैथल के लोक निर्माण रेस्ट हाउस में करीब 14 सदस्य रुके थे। इसमें एक रिजर्व बैंक का अधिकारी भी बताया जा रहा है। टीम के होने की सूचना किसी को भी नहीं लग सकी। 

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सुबह दो टीमों में निकले सदस्य

सुबह करीब 10 बजे दो टीमें निकलीं। दोनों में सात सात सदस्य थे। एक टीम कुरुक्षेत्र रोड स्थित मस्ताना राइस मिल में पहुंची तो दूसरी टीम हुडा स्थित मस्ताना निवास में गई। टीम ने दोनों जगह एक साथ छापेमारी की। इससे किसी को भी सतर्क होने का मौका नहीं मिल सका।

न कोई अंदर जा सकता न बाहर

टीम के पहुंचते ही कुछ लोग बाहर भी निकलने लगे तो टीम ने रोक दिया। कुछ मीडिया कर्मी पहुंचे तो सीबीआइ अधिकारी ने बाद में बात करने को कहते हुए बाहर रोक दिया।

बैंक से भी जुड़ा है मामला

बताया जा रहा है कि चार महीने पहले आरबीआइ की ओर से राइस मिल में एक सुरक्षाकर्मी तैनात किया गया था। इस रेड में भी आरबीआइ के एक अधिकारी शामिल हैं। ऐसे में बैंक से लेन देन का भी मामला बताया जा रहा।

दूसरे राइस मिलों में मचा हड़कंप 

सीबीआइ की छापेमारी से दूसरे राइस मिल मालिकों में हड़कंप मच गया है। राइस मिल संचालक छापेमारी की जानकारी जुटाने में लगे हैं।  

धान घोटाले से भी जोड़कर देखा जा रहा छापा

कैथल केे राईस मिल में लगे सीबीआई के छापे के बाद राइस मिलों में हड़कंप मचा हुआ है। कैथल में छापा लगने की सूचना तेजी से करनाल पहुंच गई। इसके चलते राइस मिल संचालकों ने करनाल स्थित अपने-अपने प्रतिष्ठानों में रिकॉर्ड दुरुस्त करना शुरु कर दिया। इसके साथ ही कैथल में चल रही कार्रवाई पर भी नजर रखनी शुरु कर दी। हालांकि किसी राइस मिल संचालक को यह पता नहीं चला कि यह छापा किस वजह से लगा है। इस छापे को धान घोटाले से भी जोड़कर देखा गया। कई राइस  मिल संचालकों का मानना है कि इस छापे से धान घोटाले का कोई लेना देना नहीं है। बावजूद इसके मन में ये शंका भी रही कि घोटाले के आरोपों की वजह से यह कार्रवाई ना हुई हो। बता दें कि धान के सीजन में राइस मिल संचालकों पर गड़बड़ करने का आरोप लगा था। ये आरोप था कि राइस मिल संचालकों ने कागजों में ही धान की खरीद की है। इसके चलते प्रदेश सरकार ने इस मामले की जांच भी करवाई और दो बार राइस मिलों में जाकर धान की स्टॉक की फिजिकल वेरिफिकेशन की गई। इसी दौरान पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने घोटाले की जांच सीबीआई से करवाने की मांग उठाई थी इसी वजह से सीबीआइ का छापा लगने के साथ ही राइस मिल संचालकों में हड़कंप मच गया है।

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