पानीपत/यमुनानगर, जेएनएन। जमात से लौटने वाले जमातियों पर अब पुलिस ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। यमुनानगर जिले में जमातियों पर पहला केस सदर पुलिस थाना यमुनानगर में दर्ज हुआ है। इन जमातियों ने प्रशासन को गुमराह किया और सूचना नहीं दी। इन्होंने मेडिकल चेकअप भी नहीं कराया था। इसके बावजूद लगातार जमात अलग-अलग जगहों पर जा रही थी। पुलिस प्रवक्ता चमकौर सिंह ने बताया कि लापरा के सादीन, आरिफ, शहजाद, नफीस, जीशान व मोहम्मद इंतजार के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। ये सभी मरकज से लौटे थे। वहां से लौटने के बाद न तो मेडिकल कराया और न ही प्रशासन को सूचना दी।

तब्लीगी जमाती अब भी प्रशासन को सूचना देने के लिए आगे नहीं आ रहे हैं। सरकार की सख्ती के बाद अब पुलिस ने इनकी कुंडली खंगालनी शुरू कर दी है। पुलिस के मुताबिक, सीआइए टू की टीम तब्लीगी जमातों से आने वाले लोगों की जांच कर रही थी। इस दौरान टीम गांव दयालगढ़ निवासी अब्दुल कलाम उर्फ अदरीश के पास पहुंची। अदरीश ने पुलिस को बताया कि वह अपने अन्य साथियों के साथ तब्लीगी जमात में बडोदरा (गुजरात) गया था।

उनके साथ आठ फरवरी को गांव के ही अब्दुल कादिर, सुल्तान, करीम खान, मोहम्मद रफीक, अमीर, मुस्तकीम और लापरा के सादीन, आरिफ, शहजाद, नफीस, जीशान व मोहम्मद इंतजार हमीदा मरकज से बडोदरा गए थे। 17 मार्च को बडोदरा से दिल्ली के लिए चले। सभी तुर्कमान गेट हज कमेटी दिल्ली में रुके थे। यह मरकज के पास था। यहां से 19 मार्च को वह ट्रेन से वापस यमुनानगर आए।

रात को रेलवे स्टेशन के पास जुमा मस्जिद में रुके। 20 मार्च को अपने घर चले गए थे। सीआइए टू के इंचार्ज महरूफ अली के मुताबिक, जमात का अमीर अब्दुल कलाम उर्फ अदरीश था। उसने बताया कि जमात से आए दयालगढ़ के सभी लोगों ने मेडिकल चेकअप कराया था, लेकिन लापरा के जमातियों के बारे में नहीं पता। इस पर लापरा के सादीन, आरिफ, शहजाद, नफीस, जीशान व मोहम्मद इंतजार के बारे में जांच की गई। ये अपने घर पर भी नहीं मिले।

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