संवाद सहयोगी, थर्मल-मतलौडा : फसल अवशेष जलाने से न केवल जमीन खराब होती है, बल्कि प्रदूषण भी होता है। कृषि विभाग के अधिकारी किसानों को जागरूक कर रहे हैं। इसके बावजूद कहीं न कहीं फसल अवशेष जलाने की घटना हो जाती है। फसल अवशेष जलाकर सबसे अधिक प्रदूषण फैलाने वाले गांव को रेड जोन में व उससे कम स्तर पर प्रदूषण फैलाने वाले गांव को येलो जोन में बांटा गया है। पूरे पानीपत जिले में सिर्फ एक गांव को रेड जोन की श्रेणी में डाला गया है। मतलौडा ब्लाक का उरलाना कलां गांव रेड जोन में आता है। इसके अलावा पूरे पानीपत में 15 येलो जोन के गांव हैं। नारा, दरियापुर, बोहली, कवी, वैसर व थिराना सहित छह गांव अकेले मतलौडा ब्लाक के हैं। इन सभी गांवों में फसल अवशेष को जलाने से रोकने के लिए कृषि विभाग की टीम बार-बार गांवों में जाकर फसल अवशेष प्रबंधन के लिए किसानों को जागरूक कर रही है।

इन सभी गांवों में किसानों को बिना ड्रा के सब्सिडी पर कृषि यंत्र उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इसके अलावा बेलर की सहायता से फसल अवशेष की गांठ बनवाने पर एक हजार रुपये प्रोत्साहन राशि दी जा रही है। कृषि विभाग ने इन सभी गांवों के लिए स्पेशल स्कीम चलाई है। इन सभी गांव में कंबाइन से कटवाई गई धान के फसल अवशेषों को बिना जलाएं प्रबंधन करने के लिए सरकार द्वारा मुफ्त में वेस्ट डी कंपोजर का स्प्रे भी करवाया जा रहा है। इस स्प्रे की सहायता से फसल अवशेष को मिट्टी में मिला कर खाद बनाया जा सकेगा।

खंड कृषि विभाग के एडीओ डा. संजीत मलिक ने बताया कि फसल अवशेष को जलाने से रोकने के लिए कृषि विभाग की पूरी टीम निगरानी के लिए गांव गांव घूम रही है। इसके अलावा इस पर निगरानी रखने के लिए तहसीलदार, पटवारी, बीडीपीओ, ग्राम सचिव व गांव के नंबरदारों की ड्यूटी लगाई गई है। उन्होंने बताया कि इसके उपरांत भी यदि किसान फसल अवशेष चलाता है तो उसके विरुद्ध कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

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