पानीपत, जेएनएन। बैंक के मैनेजर के साथ मिलकर सवा करोड़ रुपये ठग लिए गए। मामले की परत दर परत खुली तो हर कोई हैरान रह गया। बैंक को फर्म की ओर से किराए पर दिया जेनरेटर भी चोरी दिखा दिया गया। इस पूरे मामले में शिकायतें डीजीपी बीएस सिंधू के पास पहुंची, वहां से एसपी कुलदीप सिंह के पास यह शिकायत पहुंची, तो उन्होंने जांच करवाई। जांच के बाद इस मामले में कुलभूषण नारंग व ऋषिकांत शर्मा पर चोरी, धोखाधड़ी समेत अन्य धाराओं के तहत केस दर्ज हुआ है। यह शिकायत फर्म के दूसरे साझीदार अखिलेश चावला निवासी मॉडल टाउन करनाल ने दी थी। मामला यमुनानगर का है।

अखिलेश चावला के मुताबिक, जगदंबा इलेक्ट्रिकल एलॉय के नाम से उनकी फर्म है। कृष्णा कॉलोनी निवासी कुलभूषण नारंग भी सांझीदार था। 2010 में यह फर्म शुरू की गई। फर्म का कार्यालय कमानी चौक के पास कुलभूषण नारंग के आवास पर बनाया गया था। पहली बिल्डिंग पर फर्म का कार्यालय था। जबकि ग्राउंड फ्लोर पर देना बैंक का कार्यालय था। कुलभूषण नारंग इसी बिल्डिंग के दूसरे हिस्से में रहता था। फर्म का ज्वाइंट अकाउंट देना बैंक में ही खुलवाया गया था।

नियम था कि पैसे एकसाथ ही निकलेंगे
यह ज्वाइंट अकाउंट था। जिसमें यह था कि जब भी फर्म के नाम से कोई पैसा बैंक से निकलेगा, तो उसमें दोनों साझीदार के हस्ताक्षर होंगे। कुलभूषण नारंग ने अलग-अलग 17 चेकों पर  केवल अपने साइन कर खाते से 15 लाख रुपये निकलवा लिए। इसके बाद 19 लाख रुपये और फर्म के खाते से निकाले गए। यह पैसा बैंक अधिकारियों की मिलीभगत से निकला, क्योंकि 19 लाख रुपये जिस चेक से निकाले गए, उस पर न तो अखिलेश और न ही कुलभूषण नारंग के साइन थे। आरोप है कि 100 चेक ऐसे हैं, जिन पर अखिलेश चावला के साइन हैं और साझीदार के तौर पर कुलभूषण नारंग के बच्चों ने साइन कर पैसे निकलवाए। यह करीब 90 लाख रुपये है।

मार्च 2014 में फर्म पर लगाया ताला
फर्म में धोखाधड़ी के बाद दोनों पक्षों में विवाद हुआ, तो कुलभूषण नारंग ने फर्म के कार्यालय पर ताला लगा दिया। कार्यालय में रिबेट, स्विच व चांदी की 115 किलो तार भी थी। करीब 65 लाख रुपये का यह माल था। इस मामले में अखिलेश चावला कोर्ट में गए, तो कोर्ट के आदेश पर फर्म का ताला खोला गया। वहां से चांदी की तार के स्थान पर एल्यूमिनियम की तार मिली। जबकि अन्य सामान गायब मिला।

2013 में बनाई नई फर्म
2013 में कुलभूषण नारंग ने जगदंबा इलेक्ट्रिक के नाम से एक अलग फर्म बनाई और उसमें फर्जी एफिडेविट देकर बैंक से साढ़े 21 लाख रुपये का लोन ले लिया। इसकी गारंटी अखिलेश चावला की फर्म के नाम दिखा दी। देना बैंक के मैनेजर के साथ मिलीभगत कर यह धोखाधड़ी की गई।

जेनरेटर के किराये का पैसा भी नहीं दिया फर्म को
जगदंबा इलेक्ट्रिकल एलॉय की ओर से 2010 में देना बैंक में किराये पर 25 केवीए का जेनरेटर रखवाया गया था। इसकी सर्विस व रिपेयर का कार्य फर्म करवाती थी। इसका भी लगभग दस लाख रुपये का किराया फर्म के खाते में नहीं भेजा गया। बल्कि यह पैसा कुलभूषण नारंग की पत्नी के खाते में भेज दिया गया। इस मामले में अखिलेश चावला ने कोर्ट में अर्जी लगाई थी। कोर्ट के आदेश पर जब 26 जुलाई 2018 को वह देना बैंक में मशीन, जरनेटर व टूल का कब्जा लेने के लिए पहुंचे, तो वहां से जेरनेटर भी गायब मिला। आरोप है कि यह बैंक अधिकारियों व कुलभूषण नारंग ने मिलीभगत कर बेच दिया।

केस दर्ज हो गया है 
गांधीनगर चौकी के इंचार्ज भूपेंद्र राणा का कहना है कि एसपी के पास अखिलेश चावला की शिकायत पहुंची थी। उन्होंने जांच करवाई। जांच के बाद कुलभूषण नारंग व देना बैंक के मैनेजर ऋषिकांत शर्मा के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज किया गया है।

Posted By: Ravi Dhawan

अब खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस, डाउनलोड करें जागरण एप