जागरण संवाददाता, पानीपत : नेशनल प्रोग्राम फॉर प्रिवेंशन एंड कंट्रोल ऑफ कैंसर डायबिटीज कार्डियोवस्क्यूलर डिजीज एंड स्ट्रोक (एनपीसीडीसीएस) के तहत सिविल अस्पताल के मीटिग रूम में आशा वर्कर्स को ट्रेनिग दी गई। उन्हें बताया गया कि घर-घर सर्वे कर 30 वर्ष से अधिक आयु के महिला-पुरुषों से बातचीत और लक्षणों के आधार पर शुगर, ब्लड प्रेशर, मुंह, स्तर और बच्चेदानी के कैंसर से पीड़ित मरीज का पता लगाया जाना है। जिला आशा वर्कर्स समन्वयक पूनम ने सोमवार को आशा वर्कर्स को ट्रेनिग देते हुए ये बातें कही।

पूनम ने वर्कर्स को बताया कि समुदाय आधारित मूल्यांकन प्रपत्र का एक रजिस्टर दिया जाएगा। इसमें आशा वर्कर का नाम, स्वास्थ्य केंद्र का नाम, क्षेत्र सहित मरीज की पूरी डिटेल दर्ज की जाएगी। रोगियों को उपचार के लिए प्रेरित किया जाएगा। मरीज को सीएचसी या सिविल अस्पताल स्थित एनसीडी क्लीनिक में इलाज के लिए लाया जाएगा। किसी पुरुष की छाती में कैंसर के लक्षण दिखने पर उसे भी अस्पताल भेजा जाएगा।

जिला आशा वर्कर्स समन्वयक के मुताबिक आरामदायक दिनचर्या, खानपान में बदलाव, नशा आदि के कारण शुगर, ब्लड प्रेशर, मुंह, स्तन और बच्चादानी कैंसर के रोगी सामने आ रहे हैं। लेडी हेल्थ विजिटर सुदेश कुमारी ने भी आशा वर्कर्स को स्क्रीनिग सर्वे की बारीकियां बताई।

लेप्रोसी केस डिटेक्शन कैंपेन शुरू

स्वास्थ्य विभाग की 216 आशा वर्कर्स ने घर-घर दस्तक देकर संभावित कुष्ठ रोगियों की तलाश शुरू कर दी है। यह अभियान सात जुलाई तक चलेगा। डिप्टी सिविल सर्जन एवं नोडल अधिकारी लेप्रोसी डॉ. सुधीर बतरा ने बताया कि अभियान के दौरान स्लम व हाई रिस्क एरिया पर ज्यादा फोकस रहेगा। एएनएम और वॉलियंटर इनकी मदद करेंगे। वर्कर्स प्रत्येक सदस्य की त्वचा की जांच करेंगी। संदिग्ध मरीजों को टेस्ट के लिए नजदीकी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भेजा जाएगा।

Posted By: Jagran

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