अंबाला, जागरण संवाददाता। जब किसी के परिवार का कोई सदस्य साथ छोड़ जाना बहुत कष्टकारी होता है, इसके बाद शव को ले जाने के लिए जब कोई साधन नहीं मिलता तो समस्या और भी बढ़ जाती है। यह समस्या अंबाला शहर से लेकर छावनी में रोजाना देखने को मिलती है।

कोरोना महामारी के दौरान चल रही एंबूलेंस भी अब हो गई कंडम 

ट्विनसिटी की करीब साढ़े 8 लाख की आबादी को स्वास्थ्य विभाग की तरफ से एक ऐसी गाड़ी नहीं मुहैया कराई जा सकी, जो दुनिया छोड़ चुके सदस्य के शव को घर अथवा श्मशान घाट तक पहुंचा सके। कोविड के समय शवों को लेकर चलने वाली एंबुलेंस भी कंडम हो गई, इसके बाद से शवों को पहुंचाने के लिए कोई भी एंबुलेंस अथवा गाड़ी स्वास्थ्य विभाग के पास नहीं है। समय की पीड़ा झेल रहे ऐसे लोगों को शव घर अथवा श्मशानघाट तक ले जाने के लिए प्राइवेट एंबुलेंस करने पर लोगों को 5 सौ से 3 हजार रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं।

संस्थाओं ने शुरू की शव वाहन सेवा

अंबाला शहर से लेकर छावनी में करीब 15 धार्मिक अथवा समाजसेवी संस्थाओं ने शवों को घर से श्मशान घाट तक पहुंचाने के लिए गाड़ी तैयार कर सेवा में उतार दिया है। जबकि स्वास्थ्य विभाग की डायल 108 में शव को पोस्टमार्टम हाउस से स्वजनों के घर तक पहुंचाने के लिए किसी भी एंबुलेंस को नहीं लगाया गया है।

मिशन के तहत सरकार से डिमांड

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की संचालित डायल 108 की एंबुलेंस सेवा की तरफ से शवों को स्वजनों के घर अथवा श्मशान घाट तक पहुंचाने के लिए नई एंबुलेंस की डिमांड की गई है। हालांकि डिमांड पर अभी मुख्यालय से कोई अपडेट नहीं आया है।

अधिकारी के अनुसार

कोरोना के समय एंबुलेंस थी, जो अब कंडम हो चुकी है और नई एंबूुलेंस के लिए डिमांड की गई है। उम्मीद है कि जल्द ही मुख्यालय से एंबुलेंस अंबाला के खाते में आएगी।

----अंजली शर्मा, मैनेजर डायल 108 अंबाला।

Edited By: Naveen Dalal

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