स्वतंत्रता सेनानी की विधवा बेटी को मिलेगी पेंशन, हाई कोर्ट ने खारिज की केंद्र की अपील
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने स्वतंत्रता सेनानी की विधवा बेटी को पेंशन देने का आदेश दिया है। अदालत ने केंद्र ...और पढ़ें
-1793873905796_m.webp)
स्वतंत्रता सेनानी की विधवा बेटी को मिलेगी पेंशन।
HighLights
हाईकोर्ट ने स्वतंत्रता सेनानी की बेटी को पेंशन देने का आदेश दिया।
केंद्र सरकार की अपील को अदालत ने तकनीकी आधार पर खारिज किया।
स्वतंत्रता सेनानी दाताराम की बेटी कमलेश को मिलेगा पेंशन लाभ।
राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। स्वतंत्रता सेनानियों के परिवारों को मिलने वाली आर्थिक सहायता पर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने कहा कि आश्रितों का पेंशन दावा केवल तकनीकी आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता, खासकर जब स्वतंत्रता सेनानी होने के पर्याप्त दस्तावेजी प्रमाण मौजूद हों। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने स्वतंत्रता सेनानी की विधवा बेटी को पेंशन देने के आदेश के खिलाफ केंद्र सरकार की अपील खारिज कर दी।
जस्टिस सुवीर सहगल और जस्टिस राजेश गौड़ की खंडपीठ ने केंद्र सरकार को भिवानी निवासी कमलेश को स्वतंत्रता सैनिक सम्मान पेंशन योजना, 1980 के तहत नियमानुसार लाभ देने का निर्देश दिया।
मामले के अनुसार, कमलेश के पिता दाताराम भारतीय राष्ट्रीय सेना के सदस्य के रूप में स्वतंत्रता संग्राम में शामिल हुए थे। हरियाणा सरकार ने उन्हें स्वतंत्रता सेनानी माना था और 11 अगस्त 1981 को वित्तीय सहायता मंजूर की थी। उनकी मृत्यु के बाद यह सहायता पत्नी छन्नो देवी को मिलने लगी और उनकी मृत्यु तक जारी रही।
इसके बाद दाताराम की विधवा बेटी कमलेश ने केंद्र की योजना के तहत आश्रित पेंशन मांगी, लेकिन केंद्र सरकार ने दावा खारिज कर दिया। केंद्र ने अदालत में कहा कि दाताराम ने जीवनकाल में इस योजना के तहत आवेदन नहीं किया था और न ही उन्हें पेंशन मंजूर हुई थी। इसलिए बेटी को आश्रित पेंशन का अधिकार नहीं है। केंद्र ने 6 अगस्त 2014 के संशोधित दिशा-निर्देशों का भी हवाला दिया।
खंडपीठ ने यह दलील स्वीकार नहीं की। अदालत ने कहा कि राज्य सरकार की मान्यता और उपलब्ध दस्तावेज महत्वपूर्ण साक्ष्य हैं। केंद्र की योजना के तहत जीवनकाल में पेंशन मंजूर न होने के आधार पर इन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। योजना का उद्देश्य स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान का सम्मान और पात्र आश्रितों को आर्थिक सहायता देना है। इसका क्रियान्वयन इसी भावना से होना चाहिए।
अदालत ने कहा कि एकल पीठ के 2 मई 2019 के फैसले में हस्तक्षेप योग्य कोई कानूनी त्रुटि नहीं है। केंद्र की अपील खारिज करते हुए फैसला बरकरार रखा गया और कमलेश को आठ सप्ताह में पेंशन लाभ जारी करने का निर्देश दिया गया।
देश और दुनिया की ताजा खबरों के लिए Hindi News देखें। Live Cricket Score , IPO Listings, Shiv Chalisa, राशिफल और दुर्गा चालीसा पर अन्य जानकारी पाएं।