राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। हरियाणा में कोरोना जहां काफी हद तक नियंत्रण में है, वहीं नवरात्र के साथ शुरू हो रहे त्योहारी सीजन में तीसरी लहर का खतरा बरकरार है। भीड़ में मास्क, स्वच्छता और दो गज की शारीरिक दूरी का मंत्र भूले तो अंजाम घातक होगा। इस बीच डेंगू के बढ़ते मामलों ने स्वास्थ्य विभाग के सामने नई चुनौती रख दी है। बीते एक पखवाड़े से डेंगू रोगियों के ग्राफ में अचानक उछाल आया है। प्रदेश में इस साल अब तक 989 लोग डेंगू की चपेट में आ चुके हैं। इस दौरान मलेरिया के 45 और चिकनगुनिया के भी पांच मरीज मिले हैं।

अब तक 989 लोग आ चुके डेंगू की चपेट में, मलेरिया के 45 और चिकनगुनिया के पांच मरीज मिले

सरकारी रिकार्ड में अभी तक डेंगू से किसी मरीज की मौत नहीं हुई है। हालांकि पलवल के छायसा में ही बुखरा से कई बच्चे मर चुके हैं। अभी जापानी बुखार का कोई मरीज सामने नहीं आया है। बीते एक माह में फरीदाबाद में सर्वाधिक 100 से अधिक डेंगू मरीज मिले हैं, जबकि इसके बाद गुरुग्राम, नूंह, पंचकूला, सिरसा, अंबाला और कैथल में 50 से अधिक मरीज मिले हैं। इस दौरान झज्जर में दो और पलवल में सिर्फ छह डेंगू मरीज मिले हैं।

मच्छर जनित बीमारियों से निपटने के लिए मौजूदा सीजन में करीब 50 हजार से अधिक मकान मालिकों को नोटिस जारी किए गए हैं जिनके घरों में मच्छर का लारवा पाया गया। प्रभावित क्षेत्रों में शहरी निकाय विभाग और पंचायतों द्वारा फागिंग कराई जा रही है। वर्तमान में कुल 1410 हस्त संचालित मशीनों और 35 व्हीकल माउंटेड फागिंग मशीनों की मदद से फागिंग का काम किया जा रहा है।

भीड़ में मास्क, स्वच्छता और दो गज की शारीरिक दूरी का मंत्र भूले तो जकड़ सकता कोरोना

इसके अलावा एचएमएससीएल (हरियाणा मेडिकल सर्विसेज कारपोरेशन लिमिटेड) के जरिये 25 फागिंग मशीनों की खरीद प्रक्रिया शुरू की गई है। इसी तरह पंचायत विभाग ने भी फागिंग मशीनों की खरीद प्रक्रिया शुरू की है। इन मशीनों को पंचायत स्तर पर उपलब्ध कराया जाएगा। उच्च जोखिम वाले 57 जोन में इनडोर अवशिष्ट स्प्रे (आइआरएस) किया जा रहा है, जहां पिछले तीन वर्षों में मलेरिया के मामले सामने आए थे। इसके अलावा गम्बूसिया मछली को छोड़ने के लिए लगभग 8023 जलाशयों की पहचान की गई है। इनमें से 7167 जलाशयों में गम्बूसिया मछली को छोड़ा जा चुका है।

छह साल से डेंगू, चिकनगुनिया और मलेरिया से कोई मौत नहीं

पिछले छह वर्षों में मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया और जापानी बुखार के मामले लगातार घटे हैं। वर्ष 2015 में मलेरिया के 9308, डेंगू के 9921 और जापानी बुखार के पांच केस मिले थे, जबकि वर्ष 2016 में चिकनगुनिया के सर्वाधिक 1970 केस मिले थे। तब डेंगू से 13, मलेरिया से तीन और जापानी बुखार से दो लोगों की मौत हुई थी। इसके बाद के वर्षों में मलेरिया और डेंगू से कोई मौत सरकारी रिकार्ड में नहीं है। हालांकि जापानी बुखार से वर्ष 2017 में एक व्यक्ति की मौत जरूर हुई।

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ऐसे घटते गए डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया और जापानी बुखार के मरीज

बीमारी -             2015  -      2016  -       2017 -         2018  -       2019  -      2020  -            2021   

1. मलेरिया -        9308 -      7866 -         5996 -         3154 -        1497 -        111 -              45

2. डेंगू -              9921 -       2494 -         4550 -         1936 -        1207 -        1377 -          989

3. चिकनगुनिया -   01 -           1970 -       06 -              03 -             00 -            14 -              05

4. जापानी बुखार -  05 -            02 -          04 -              00 -             00 -            00  -              00

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यह बरतें सावधानी

 डेंगू पैदा करने वाला मच्छर यानी एडीज एजिप्टी घर में साफ ठहरे हुए पानी में पनपता है। पानी के कंटेनर जैसे कूलर, ओवरहेड टैंक, प्लास्टिक बेग, बोतलें, कप, फेंके गए कचरे और छत पर फेंके गए सामान, फूल के बर्तन, फ्रिज के पीछे स्थित ट्रे, पक्षियों के लिए रखे गए बर्तन और टायरों में जमा होने वाले पानी में यह मच्छर पनपते हैं। इसलिए नियमित रूप से इनकी सफाई करते रहें।

स्‍वास्थ्य विभाग सतर्क: डा. ऊषा गुप्ता

'' मच्छर जनित बीमारियों से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने तमाम इंतजाम किए हैं। प्रदेश में 27 प्रयोगशालाओं में डेंगू की मुफ्त जांच की जा रही है। निजी अस्पतालों और प्रयोगशालाओं में भी डेंगू की जांच के लिए अधिकतम 600 रुपये फीस ली जा सकती है। सभी निजी अस्पतालों के लिए डेंगू मरीजों की रिपोर्ट सरकार को देना अनिवार्य है। डेंगू से मौतों को रोकने के लिए सरकारी अस्पतालों में मुफ्त सिंगल डोनर प्लेटलेट्स (एसडीपी) की व्यवस्था की गई है, जबकि पहले मरीजों से 8500 रुपये प्रति यूनिट एसडीपी वसूल किए जाते थे। सभी जिलों में 380 घरेलू प्रजनन जांचकर्ता (डीबीसी) तैनात किए गए हैं जो मच्छर जनित बीमारियों की रोकथाम और नियंत्रण में अहम भूमिका निभा रहे हैं। लोगों को जागरूक करने के लिए लगातार अभियान चलाया जा रहा है।

                                                                           - डा. ऊषा गुप्ता, निदेशक, स्वास्थ्य सेवाएं, हरियाणा।

 

Edited By: Sunil Kumar Jha