राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़ । हरियाणा कांग्रेस के अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के बीच दरार कम होने का नाम नहीं ले रही है। हुड्डा और तंवर खेमों में दिल्ली में हुई मारपीट के बाद कांग्रेस हाईकमान भले ही पूरे मामले को ठंडे बस्ते में डालने का मन बना चुका है, लेकिन तंवर चुप नहीं बैठ रहे।

उधर, तंवर पर हुए जानलेवा हमले के मामले को राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने गंभीरता से लिया है। आयोग ने दिल्ली पुलिस के कमिश्नर को तलब करते हुए रिपोर्ट मांगी है। अदालत में भी तंवर इस मामले को लेकर जा रहे हैैं, जिसमें दूसरी बार 19 नवंबर तारीख लगी है। एसवाइएल के मुद्दे पर सर्वदलीय मीटिंग के दौरान गत दिवस हुड्डा और तंवर दोनों मौजूद थे, लेकिन उनमें कोई बातचीत नहीं हुई। दोनों ने एक-दूसरे से हाथ जरूर मिलाए।

हुड्डा वहां मुख्यमंत्री मनोहर लाल के नजदीक बैठे थे, जबकि अशोक तंवर और किरण चौधरी साथ-साथ नजर आए। मीटिंग में किरण और हुड्डा एकसाथ पहुंचे थे। लेकिन बैठक में किरण पूर्व मुख्यमंत्री हुड्डा के बजाय तंवर के साथ बैठी। वापस भी तंवर के साथ ही लौटी। तंवर के साथ मारपीट के आरोपित हुड्डा के पीएसओ भी चंडीगढ़ स्थित हरियाणा निवास में दिखाई पड़े।

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कांग्रेस हाईकमान इस विवाद के बाद हुड्डा और तंवर के बीच समझौते के तमाम प्रयास कर चुका है। तंवर हालांकि सार्वजनिक रूप से कोई टिप्पणी नहीं कर रहे, मगर कानूनी तौर पर उन्होंने लड़ाई तेज कर दी है। तंवर ने पिछले दिनों आरोप लगाया था कि अनुसूचित जाति आयोग दबाव में आ गया है, इसलिए कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। तंवर के इस आरोप के बाद आयोग ने दिल्ली के पुलिस कमिश्नर को तलब कर दिया है। उन्हें 19 नवंबर को ही आयोग में जवाब देना है।

यूपी चुनाव तक टलेगी शिंदे कमेटी की रिपोर्ट

दूसरी तरफ पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे के नेतृत्व वाली कमेटी की रिपोर्ट भी अब ठंडे बस्ते में चली गई है। तंवर के दबाव के चलते हालांकि शिंदे कमेटी ने पिछले सप्ताह रणदीप सुरजेवाला और कु. सैलजा के विचार जानने के बाद रिपोर्ट पूरी होने की औपचारिकता कर ली, मगर अभी तक भी शिंदे की रिपोर्ट पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। कांग्रेस हाईकमान चाह रहा कि उत्तर प्रदेश चुनाव तक मामले को शांत रखा जाए।

हमारे साथ बहुत अधिक ज्यादती हुई-अशोक तंवर

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अशोक तंवर का कहना है कि दिल्ली में हमारे साथ ज्यादती हुई है। हमें ही चुप रहने को कहा जा रहा है। हम चुप भी हैं मगर मुझे जाने से मारने की कोशिश करने वाले खुलेआम घूम रहे हैं। सरकार भी ऐसे लोगों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर रही है। उन्होंने बताया कि अनूुसूचित जाति आयोग में सुनवाई चल रही है। वहां दिल्ली पुलिस की ज्यादती और राम मनोहर लोहिया अस्पताल में स्टाफ द्वारा अपनाए गए असहयोगात्मक रवैये की जानकारी दी गई, जिसके बाद दिल्ली पुलिस के कमिश्नर को स्थिति साफ करने के लिए बुला लिया गया है।

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