जेएनएन, चंडीगढ़। हरियाणा के स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज दूसरी बार हुड्डा सरकार का फैसला बदलवाने में कामयाब रहे। मनोहर सरकार ने विज के निर्वाचन क्षेत्र अंबाला छावनी को अंबाला नगर निगम से बाहर कर दिया है। विज का शुरू से ही निगम को भंग करने का दबाव था, लेकिन सरकार ने इसके लिए बीच का रास्ता निकाला है। अंबाला सिटी और इसके साथ लगते गांवों को इसमें शामिल कर अंबाला शहर का निगम का दर्जा बरकरार रहेगा। अब अंबाला छावनी को पहले की तरह नगर परिषद का दर्जा मिलेगा।

चंडीगढ़ में सीएम मनोहर लाल खट्टर की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में यह फैसला लिया गया। हालांकि सोमवार को जारी किए कैबिनेट एजेंडे में निगम का मुद्दा शामिल नहीं था लेकिन बैठक के दौरान ही यह मामला कैबिनेट एजेंडे में शामिल कर लिया गया। निकाय विभाग के प्रधान सचिव आनंद मोहन शरण ने इसके लिए मौके पर प्रस्ताव तैयार किया। पूर्व की हुड्डा सरकार ने एक साथ सात शहरों में निगम बनाए थे। उनमें यमुनानगर, करनाल, पानीपत, रोहतक व हिसार के साथ पंचकूला और अंबाला निगम भी शामिल थे।

 अनिल विज अंबाला नगर निगम बनाने के खिलाफ थे। अक्टूबर-2014 में भाजपा के सत्तासीन होने के समय से ही वे निगम को भंग करने की मांग कर रहे थे। पंचकूला निगम को भंग करने की मांग भी भाजपा विधायक कर रहे हैं। यह मामला अभी पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में लंबित है। ऐसे में अब सरकार ने अंबाला नगर निगम से अंबाला सदर छावनी को बाहर कर दिया है। साथ ही, अंबाला सदर में नगर परिषद के गठन की स्वीकृति भी प्रदान की है। 

निगम के लिए तीन लाख की आबादी होने की शर्त है। ऐसे में कैबिनेट ने अंबाला सिटी को नगर निगम बनाने के लिए इसके साथ लगते 12 गांवों को इसमें शामिल किया है। अंबाला नगर निगम में शामिल होने वाले गांवों में डांगदेहरी, मानकपुर, लोहगढ़, ददियाना, देवी नगर, निजामपुर, घेल कलां, घेल खुर्द, कंवाला, कंवाली, कालू माजरा और लिहारसा को रखा गया है। 

अंबाला सदर अंबाला शहर के मुख्य नगर निगम कार्यालय से लगभग 10 से 12 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। निगम के निगमायुक्त तथा सभी शाखा प्रमुखों के कार्यालय मुख्य कार्यालय में स्थित हैं। अंबाला सदर क्षेत्र के अधिकांश गांव मुख्य कार्यालय से आगे स्थित हैं। नगरपालिका से संबंधित अपने अधिकांश कार्यों और शिकायतों के निवारण के लिए अंबाला सदर क्षेत्र के लोगों को अंबाला शहर स्थित निगम कार्यालय आना पड़ता है। अब यह समस्या नहीं रहेगी। 

दादूपुर नहर की जमीन वापस लेने को दो माह का समय

बरसों से अधूरी पड़ी दादूपुर नलवी नहर के लिए एक्वायर (अधिगृहित) की गई जमीन उनके मालिकों और उत्तराधिकारियों को वापस होगी। मुख्यमंत्री मनोहर लाल की अध्यक्षता में हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में 820 एकड़ जमीन को डी-नोटिफाई करने के फैसले को मंजूरी प्रदान कर दी गई। इस नहर के लिए जिन किसानों ने अपनी जमीन दी थी, वे जमीन की कीमत और नौ फीसद ब्याज की राशि जमा कराकर अपनी जमीन वापस ले सकते हैं। 

कैबिनेट की बैठक के बाद सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री कृष्ण कुमार बेदी तथा सीएम के मीडिया सलाहकार राजीव जैन ने बताया कि डैमेज नहीं मांगने वाले किसानों से नौ फीसद ब्याज नहीं लिया जाएगा। किसान अपनी जमीन वापस लेने के लिए 30 अगस्त तक आवेदन कर सकेंगे। दादुपुर नलवी नहर परियोजना 1985 में शुरू हुई थी। यमुनानगर, कुरुक्षेत्र और अंबाला जिलों में सिंचाई और भू-जल की रिचार्जिंग के लिए 13 करोड़ रुपये की लागत से इस परियोजना को सरकार ने मंजूरी दी थी। इस योजना के लिए 1987-90 के दौरान 190.67 एकड़ जमीन एक्वायर हुई थी, मगर योजना आगे नहीं बढ़ी। 

अक्टूबर 2005 के दौरान सरकार द्वारा इस परियोजना को 267.27 करोड़ रुपये के साथ फिर से मंजूरी दी गई, जिसमें शाहबाद फीडर, शाहबाद डिस्ट्रीब्यूटरी और नलवी डिस्ट्रीब्यूटरी के साथ-साथ 590 क्यूसिक डिस्चार्ज के उपयोग के लिए 23 नंबर ऑफटेकिंग चैनलों का निर्माण किया जाना था। परियोजना के निर्माण के लिए 2246.53 एकड़ जमीन को एक्वायर कर इस्तेमाल में लाया जाना था। विभाग ने मुख्य चैनलों शाहबाद फीडर, शाहबाद डिस्ट्रीब्यूटरी और नलवी डिस्ट्रीब्यूटरी को बनाने के लिए इसमें से कुल 1019.2994 एकड़ जमीन एक्वायर की गई थी।

इस भूमि के अधिग्रहण पर 75.98 करोड़ रुपये खर्च हुए। अदालत के आदेश पर एन्हांसमेंट के रूप में 116.35 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। तीनों चैनलों के लिए  111.167 करोड़ रुपये का व्यय भी किया गया है। किसानों ने मुआवजा राशि कम बताते हुए जब अदालत का दरवाजा खटखटाया तो कोर्ट ने केवल 167.27 एकड़ जमीन के लिए 566.49 करोड़ रुपये की एन्हांसमेंट दी। इसलिए सरकार ने इसे गैर व्यावहारिक मानते हुए परियोजना ही रद कर दी। अंबाला स्थित सिंचाई कार्यालय में मुआवजा राशि और ब्याज जमा कराने वाले लोगों को तीन माह के अंदर जमीन पर कब्जा दे दिया जाएगा। 

पांच जातियां भी उठा सकेंगी सरकार की योजनाओं का लाभ 

हरियाणा कैबिनेट की बैठक में पांच जातियों जोगी, जंगम, जोगी नाथ (तीनों एक ही श्रेणी), मनियार, भाट, रहबारी और मदारी (हिंदू) को घुमंतू और अर्ध घुमंतू जनजातियों की सूची में शामिल करने का निर्णय लिया गया। इसके साथ ही विमुक्त, घुमंतू और अर्ध-घुमंतू जनजातियों की सूची में कुछ जातियों के मूल नामों के साथ  पर्यायवाची शब्द जोडऩे का निर्णय लिया गया, ताकि इन जातियों को सरकार की योजनाओं का लाभ मिल सके। अब से पहले राज्य की विमुक्त, घुमंतू और अर्ध-घुमंतू जनजातियों की सूची में 24 जातियां थी जो कि अब 29 हो गई है। 

हरियाणा में दालों पर बाजार शुल्क माफ 

हरियाणा कैबिनेट में दलहन और दालों पर बाजार शुल्क माफ करने का निर्णय लिया है। राज्य मंत्री कृष्ण कुमार बेदी ने दावा किया कि इस निर्णय से राज्य में औद्योगिकीकरण को बढ़ावा मिलेगा जिससे रोजगार सृजित होगा तथा राच्य की अर्थव्यवस्था में सुधार होगा। किसानों को उनके उत्पाद का अच्छा खरीद मूल्य मिलने से किसानों को भी लाभ होगा।

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Posted By: Kamlesh Bhatt

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