जेएनएन, चंडीगढ़। सरकारी स्कूलों में चल रही दाखिला प्रक्रिया के बीच उन स्कूलों पर फिर से तलवार लटक गई है जिनमें 25 से कम बच्चे पढ़ रहे हैं। शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. महावीर सिंह ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों से कम छात्र संख्या वाले स्कूलों की रिपोर्ट मांगी है। इसके बाद खंड शिक्षा अधिकारी और खंड मौलिक शिक्षा अधिकारी व्यक्तिगत रूप से ऐसे स्कूलों का भौतिक निरीक्षण कर रिपोर्ट तैयार करने में जुटे हैं।

एसीएस की जिला शिक्षा अधिकारियों के साथ वीडियो कांफ्रेंसिंग में 25 से कम छात्र संख्या वाले स्कूलों पर चर्चा हुई। इसमें साफ हिदायत दी गई कि जिन स्कूलों में छात्र संख्या के मानक पूरे नहीं होते हैं, उन्हें पड़ोसी गांवों के स्कूल में मर्ज करने की दिशा में काम किया जाए।

इससे पहले साल की शुरुआत में ही शिक्षा विभाग ने पूरे प्रदेश में 1026 स्कूलों की सूची तैयार की थी जिनमें 25 से कम बच्चे थे। इन स्कूल को नए शिक्षा सत्र में नजदीक के स्कूलों में मर्ज करने की पूरी तैयारी थी, लेकिन मामले के तूल पकड़ने और शिक्षक संगठनों द्वारा छात्र संख्या बढ़ाने के भरोसे पर सरकार ने मोहलत दे दी थी। अब देखना है कि इनमें से कितने स्कूलों में छात्र संख्या 25 से ऊपर हुई या नहीं।

बता दें कि जनवरी में जिन 1026 स्कूलों को पड़ोस के स्कूलों में मर्ज करने की तैयारी थी, उनमें 34 स्कूलों में तो एक भी शिक्षक नहीं था। इनमें महेंद्रगढ़ में 14, यमुनानगर में पांच, गुरुग्राम में चार, पंचकूला में तीन, अंबाला और रेवाड़ी के दो-दो तथा रोहतक, करनाल व फतेहाबाद में एक-एक बच्चे पढ़ रहे थे। 79 स्कूलों में तो पांच या इससे भी कम बच्चे थे। इनमें महेंद्रगढ़ में 16, कुरुक्षेत्र में दस, भिवानी के नौ, चरखी दादरी के सात, रेवाड़ी में छह, करनाल, सिरसा और यमुनानगर के चार-चार, गुरुग्राम, हिसार, सोनीपत, झज्जर व कैथल में तीन-तीन तथा फरीदाबाद, जींद, पलवल व पंचकूला में एक-एक स्कूल शामिल थे।

 

Posted By: Kamlesh Bhatt

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