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हरियाणा 657 करोड़ का बैंक घोटाला, CBI ने खोला सरकारी धन की मनी ट्रेल का राज; शेल कंपनियों से ज्वेलर तक पहुंचे 329 करोड़

Published: Fri, 10 Jul 2026 07:25 PM (IST)

सीबीआई ने 657 करोड़ रुपये के बैंक घोटाले में 329 करोड़ रुपये से अधिक की नई मनी ट्रेल का खुलासा ...और पढ़ें

657 करोड़ बैंक घोटाले में 'गोल्ड रूट' से 329 करोड़ की मनी ट्रेल का पर्दाफाश।

657 करोड़ बैंक घोटाले में 'गोल्ड रूट' से 329 करोड़ की मनी ट्रेल का पर्दाफाश।

HighLights

  1. सीबीआई ने 657 करोड़ बैंक घोटाले में 329 करोड़ की मनी ट्रेल खोजी

  2. सरकारी विभागों से धन शेल कंपनियों, ज्वेलर तक पहुंचा

  3. सोने के कागजी लेन-देन से नकदी में बदला गया पैसा

जागरण संवाददाता, चंडीगढ़। 657 करोड़ रुपये के बहुचर्चित बैंक घोटाले की जांच में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने कथित तौर पर सरकारी धन की नई मनी ट्रेल का खुलासा किया है।

जांच एजेंसी के अनुसार, सरकारी विभागों से कथित रूप से निकाली गई 329 करोड़ रुपये से अधिक की राशि पहले शेल कंपनियों के खातों में पहुंचाई गई। इसके बाद यह रकम चंडीगढ़ के एक ज्वेलर तक पहुंची, जहां सोने के कागजी लेन-देन के जरिए इसे नकदी में बदला गया।

सीबीआई का दावा है कि बाद में यही नकदी कथित साजिशकर्ताओं और अन्य लाभार्थियों तक पहुंचाई गई। जांच अब इस धन के इस्तेमाल, निवेश और पूरे वित्तीय नेटवर्क की परतें खोलने पर केंद्रित है। इस मामले में तीन आईएएस व आईएफएस सहित कई अधिकारियों व बैंक स्टॉफ को सीबीआई गिरफ्तार कर चुकी है।

बैंक फ्रॉड मामला अभी जांचाधीन है। ऐसे में उक्त सभी आरोप सीबीआई के जांच दस्तावेजों और दावों पर आधारित हैं। आरोपों की पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी। सीबीआई का आरोप है कि पूरे कथित नेटवर्क का संचालन पूर्व आईडीएफसी फर्स्ट बैंक शाखा प्रबंधक रिभव ऋषि ने किया। उसने बाद में एयू स्माल फाइनेंस बैंक में कार्यरत रहते हुए भी गतिविधियां जारी रखीं।

एजेंसी के अनुसार, आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू स्माल फाइनेंस बैंक के कुछ अधिकारियों ने हरियाणा सरकार के कुछ अधिकारियों (जिनमें कुछ आईएएस अधिकारी भी शामिल हैं) के साथ कथित मिलीभगत कर आठ हरियाणा सरकारी विभागों और चंडीगढ़ प्रशासन के दो विभागों के खातों से धन की हेराफेरी की। जांच एजेंसी अब पूरे नेटवर्क, धन के अंतिम गंतव्य और कथित रूप से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की पड़ताल कर रही है।

शेल कंपनियों से ज्वेलर तक पहुंची रकम

सीबीआई सूत्रों के अनुसार, सरकारी विभागों के खातों से कथित तौर पर हेराफेरी कर निकाली गई राशि को स्वस्तिक देश प्रोजेक्ट्स, कैपको फिनटेक सर्विसेज, आरएस ट्रेडर्स, एसआरआर प्लानिंग गुरुज, विस्टामेड सॉल्यूशंस और मां वैभव लक्ष्मी इंटीरियर जैसी शेल कंपनियों के जरिए आगे भेजा गया।

एजेंसी का आरोप है कि नवंबर 2024 से फरवरी 2026 के बीच सेक्टर-35 स्थित सावन ज्वेलर्स के संचालक राजन सिंह कटोडिया को 329.57 करोड़ रुपये प्राप्त हुए। इनमें करीब 138 करोड़ रुपये कैपको फिनटेक सर्विसेज, 131 करोड़ रुपये स्वस्तिक देश प्रोजेक्ट्स और लगभग 45 करोड़ रुपये आरएस ट्रेडर्स से आए।

सोना कागजों में, नकदी हाथों में

जांच एजेंसी का आरोप है कि ज्वेलर ने सोना खरीदकर शेल कंपनियों के नाम पर बिल और जीएसटी इनवॉइस तैयार किए, जिससे लेन-देन वैध दिखाई दे। सीबीआई के अनुसार, सोना संबंधित कंपनियों तक पहुंचाने के बजाय खुले बाजार में बेच दिया जाता था और उससे मिली नकदी कथित तौर पर पूर्व बैंक अधिकारी रिभव ऋषि और उसके सहयोगियों तक पहुंचाई जाती थी।

एजेंसी ने कर्मचारियों के बयान भी दर्ज किए हैं, जिनमें ज्वेलर के प्रतिष्ठान से नियमित रूप से नकदी उठाने और बुलियन कारोबारियों से 155 करोड़ रुपये से अधिक नकदी एकत्र कर आगे पहुंचाने का उल्लेख है। तलाशी के दौरान सीबीआई ने 5,589 ग्राम बिना हिसाब का सोना और 54.20 लाख रुपये नकद भी जब्त किए हैं।

रियल एस्टेट तक पहुंची जांच

सीबीआई ने जांच में चंडीगढ़ के रियल एस्टेट कारोबारी और होटल लैंडमार्क के संचालक विक्रम वाधवा को भी कथित लाभार्थी बताया है। एजेंसी के अनुसार, उन्हें इस नेटवर्क से 4.57 करोड़ रुपये नकद और 33.25 करोड़ रुपये बैंकिंग चैनलों के जरिए मिले।

आरोप है कि इस राशि का उपयोग चंडीगढ़ और मुल्लांपुर में 55 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की संपत्तियां खरीदने या उनके लिए अग्रिम भुगतान करने में किया गया। इंडस्ट्रियल एरिया स्थित एक अन्य संपत्ति भी जांच के दायरे में है।