चंडीगढ़, जेएनएन। खाप नेताओं द्वारा चौटाला परिवार की राजनीतिक एकजुटता की मुहिम के बीच दुष्यंत समर्थक चार विधायकों का अचानक इस्तीफा देना किसी झटके से कम नहीं है। पिछले एक साल से जननायक जनता पार्टी का मंच साझा कर रहे इन चारों विधायकों ने उस समय इस्तीफे दिए, जब परिवार में फिर से एकजुटता की कोशिश चल रही है। इसके साथ ही दुष्यंत चौटाला तिहाड़ जेल में अपने पिता अजय सिंह चौटाला से परिवार की राजनीतिक एकजुटता पर राय मशविरा भी कर चुके हैं। ऐसे में एकता की कोशिशों पर इन विधायकों के इस्‍तीफे भारी पड़ सकते हैं।

दुष्यंत चौटाला के इशारे पर एक रणनीति के तहत दिया चारों जेजेपी समर्थक विधायकों ने इस्तीफे

बता दें कि खाप नेताओं की पेशकश पर अभय चौटाला ने परिवार की एकजुटता के मामने में अपने बड़े भाई अजय सिंह चौटाला के कोर्ट गेंद डाल दी है। अभय ने कहा था कि अजय चौटाला जो फैसला करेंगे और उन्‍हें जो कहेंगे वह उसे मानेंगे। इसके बारे में दुष्यंत चौटाला को अपने पिता की राय से आज खाप नेताओं को अवगत कराना है।

अभय सिंह चौटाला के अचानक दांव खेलने के बाद असमंजस में दुष्यंत चौटाला

हरियाणा में विधानसभा चुनाव सिर पर है और भाजपा ने 75 से अधिक विधानसभा सीटें जीतने का लक्ष्य निर्धारित कर रखा है। भाजपा के विजय रथ को रोकने के लिए गुटों में बंटी कांग्रेस कामयाब होती दिखाई नहीं दे रही है। ऐसे में खाप नेताओं ने चोटाला की राजनीतिक एकजुटता के प्रयास शुरू कर रखे हैं। इन प्रयासों में आगे बढ़ते हुए अभय चौटाला ने हर तरह का फैसला खाप नेताओं और अपने भाई अजय सिंह चौटाला पर छोड़ दिया है।

दुष्यंत चौटाला ने अपने पिता से राय करने और बसपा नेताओं के साथ मंत्रणा के बाद किसी तरह के नतीजे पर पहुंचने की बात कही थी। अब चार जेजेपी समर्थक विधायकों नैना सिंह चौटाला, अनूप धानक, पृथ्वी नंबरदार और राजदीप फौगाट ने दल बदल कानून के तहत कार्रवाई होने से पहले ही अपने पदों से इस्तीफे दे दिए तो इसका मतलब साफ है कि खाप नेताओं को अपने प्रयासों में अभी और मशक्कत करनी पड़ सकती है।

चारों विधायक अब खुले तौर पर दुष्यंत सिंह चौटाला के मंच पर जा सकेंगे, लेकिन इसका मतलब यह भी नहीं है कि अभय सिंह चौटाला की दल बदल कानून के तहत दी गई अर्जी पर इन चारों विधायकों के विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं होगी। स्पीकर ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है और इन चारों विधायकों की विधानसभा से सदस्यता किसी भी समय जा सकती है। इनेलो के 19 विधायकों में से अब सिर्फ दो विधायक ओमप्रकाश बारवा और वेद नारंग अभय सिंह चौटाला के साथ रह गए है। चार विधायकों के अचानक अपने पद से इस्तीफा देने के बाद खाप नेताओं के चौटाला परिवार की एकजुटता के प्रयासों को धक्का लगा है।

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जेजेपी समर्थक इनेलो के चार विधायकों ने दलबदल के मामले में कार्रवाई से पहले दिया इस्‍तीफा 

बता दें कि जननायक जनता पार्टी के समर्थक चार इनेलो नैना चौटाला, राजदीप फौैगाट, अनूप धानक व पिरथी सिंह नंबरदार ने मंगलवार को विधानसभा की सदस्यता से इस्‍तीफा दे दिया था। मंगलवार को अप्रत्याशित घटनाक्रम में इन विधायकों ने विधानसभा अध्यक्ष कंवरपाल गुर्जर को त्यागपत्र सौंप दिया। स्पीकर कंवर पाल गुर्जर ने इस्तीफे स्वीकार करते हुए दोपहर बाद दल-बदल मामले में सुनवाई की और दोनों पक्षों की बहस के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया।

चारों विधायक दल-बदल मामले में सुनवाई के लिए विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष पेश हुए थे। स्पीकर ने जब विधायकों से जवाब मांगा तो उन्होंने कहा, वे तो पहले ही अपना इस्तीफा दे चुके हैं। अब वे विधायक नहीं रहे। ऐसे में इस केस का भी कोई औचित्य नहीं। इस पर स्पीकर ने कहा, जिस समय याचिका दायर हुई उस समय वे विधायक थे। ऐसे में उस स्थिति के हिसाब से अपना जवाब दें।

विधायकों ने अभय द्वारा लगाए गए आरोपों को भी खारिज किया है। उन्होंने दो टूक कहा कि इनेलो नहीं छोड़ी है। न ही उन्होंने जेजेपी की सदस्यता ग्रहण की है। वैचारिक तौर पर किसी पार्टी की नीतियों का समर्थन करना दल-बदल नहीं हो सकता। स्पीकर अब सप्ताह-दस दिन में अपना फैसला सुना सकते हैं।

आरोप है कि चारों विधायक इनेलो से इस्तीफा दिए बगैर ही जेजेपी के कार्यक्रमों में शामिल होते रहे। इसके चलते इनेलो विधायक रामचंद्र कांबोज ने स्पीकर के समक्ष याचिका दायर करके चारों विधायकों के खिलाफ दल-बदल विरोधी कानून के तहत कार्रवाई किए जाने की मांग की थी। बाद में रामचंद्र कांबोज भाजपा में शामिल हो गए।

इसके बाद अभय चौटाला खुद आगे आए और चारों विधायकों के खिलाफ नए सिरे से याचिका दायर की। अभय ने चारों विधायकों द्वारा जेजेपी के मंच पर दिए गए भाषणों की सीडी, समाचार पत्रों में प्रकाशित खबरें स्पीकर को दी थीं। अब इनेलो विधायक दल के नेता अभय सिंह चौटाला के साथ सिर्फ दो विधायक लोहारू से ओमप्रकाश बरवा और बरवाला से वेद नारंग बचे हैं।

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21 विधायक दे चुके इस्तीफा, विधानसभा में बचे सिर्फ 69 सदस्य

हरियाणा में पहली बार इतने बड़े स्तर पर दल-बदल हुआ है कि मौजूदा विधायक भारी संख्या में सत्तारूढ़ भाजपा में शामिल हुए हैं। हरियाणा में अब तक इनेलो के कुल 14, बहुजन समाज पार्टी व कांग्रेस के एक-एक और चार निर्दलीय इस्तीफा दे चुके। इसके अलावा भाजपा विधायक नायब सिंह सैनी ने सांसद बनने के बाद अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। इनेलो के चार और विधायकों के इस्तीफा देने के बाद विधानसभा में कुल 68 विधायक बचे हैं। एक सीट पेहवा से विधायक रहे जसविंद्र सिंह संधू के निधन की वजह से खाली है।

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अब इस्‍तीफा देना लोकतंत्र से धोखा : इनेलो

उधर इनेलो प्रदेशाध्यक्ष बीरबल दास ढालिया ने कहा कि चारों विधायकों ने दल बदलने के 11 महीने बाद इस्तीफा दिया है। यह लोकतंत्र के साथ धोखा है। ढालिया ने कहा कि पिछले वर्ष अक्टूबर में जब इन विधायकों ने जेजेपी का समर्थन करते हुए उनका मंच सांझा किया था तो ये उसी समय दलबदल कानून के दायरे में आ गए थे। अब जब विधानसभा के चुनावों की घोषणा में कुछ दिन शेष हैं तो ये इस्तीफा दे रहे हैं। 11 महीनों तक विधायक के तौर पर इनके द्वारा लिए गए वेतन-भत्तों और पैटी-ग्रांट इनसे वसूली जानी चाहिए।

 

Posted By: Sunil Kumar Jha

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