विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

न्यायपालिका में AI पर नो एंट्री, पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट का सख्त आदेश; अब ChatGPT या जेमिनी का इस्तेमाल नहीं करेंगे जज

Published: Mon, 06 Apr 2026 04:15 PM (IST)

पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ के न्यायिक अधिकारियों को एआई टूल्स जैसे चैट जीपीटी और ...और पढ़ें

न्यायिक कार्य में एआई के इस्तेमाल पर पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट की सख्त रोक

न्यायिक कार्य में एआई के इस्तेमाल पर पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट की सख्त रोक

HighLights

  1. न्यायिक अधिकारियों को एआई टूल्स के उपयोग से रोका गया

  2. चैट जीपीटी, जैमिनी जैसे एआई प्लेटफॉर्म प्रतिबंधित किए गए

  3. पारदर्शिता, विश्वसनीयता और मानवीय विवेक बनाए रखने हेतु निर्णय

राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने एक अहम और सख्त निर्णय लेते हुए पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ में कार्यरत न्यायिक अधिकारियों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टूल्स के उपयोग से दूर रहने के निर्देश जारी किए हैं। हाई कोर्ट प्रशासन द्वारा जिला एवं सत्र न्यायाधीशों को भेजे गए आधिकारिक पत्र में स्पष्ट कहा गया है कि कोई भी न्यायिक अधिकारी फैसले लिखने या कानूनी शोध के लिए एआई प्लेटफार्म का इस्तेमाल नहीं करेगा।

हाई कोर्ट के इस आदेश में विशेष रूप से चेट जीपीटी, जैमिनी और अन्य समान तकनीकों का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि ये उपकरण न्यायिक कार्यों के लिए उपयुक्त नहीं माने गए हैं। आदेश में यह भी चेतावनी दी गई है कि इन निर्देशों का उल्लंघन गंभीरता से लिया जाएगा और संबंधित अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई संभव है।

मुख्य न्यायाधीश की ओर से जारी इस निर्देश का उद्देश्य न्यायिक प्रक्रिया की पारदर्शिता, विश्वसनीयता और मानवीय विवेक को सुरक्षित रखना बताया गया है। हाल के समय में एआई टूल्स के बढ़ते उपयोग को देखते हुए यह आशंका जताई जा रही थी कि कहीं न्यायिक फैसलों की मौलिकता और कानूनी सटीकता प्रभावित न हो जाए।

इसी पृष्ठभूमि में यह कदम उठाया गया है। इससे पहले भी कई बेंच जिला जजों द्वारा एआई के आधार पर लिखी गई जजमेंट पर कई बार सवाल उठा चुकी है। इससे पहले गुजरात हाई कोर्ट भी इसी तरह की नीति लागू कर चुका है, जिसमें न्यायाधीशों और कोर्ट स्टाफ को आदेशों के मसौदे, निर्णय तैयार करने या किसी भी न्यायिक कार्य में एआई के इस्तेमाल से दूर रहने को कहा गया था।