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गर्भवती भैंस को जहर किसने दिया? साबित नहीं कर पाई पंचकूला पुलिस, 7 साल बाद पति-पत्नी बरी

Published: Mon, 12 Oct 2026 10:36 AM (IST)

पंचकूला कोर्ट ने गर्भवती भैंस को जहर देने के मामले में 7 साल बाद एक दंपती को बरी कर दिया। ...और पढ़ें

फोटो क्रेडिट: AI

फोटो क्रेडिट: AI

HighLights

  1. दंपती को गर्भवती भैंस जहर मामले में बरी किया गया

  2. पुलिस सात साल में आरोप साबित नहीं कर पाई

  3. कोई फोरेंसिक रिपोर्ट या प्रत्यक्षदर्शी गवाह नहीं मिला

जागरण संवाददाता, पंचकूला। गर्भवती भैंस की हत्या के मामले में मजिस्ट्रेट कोर्ट में चल रहे एक केस का फैसला सात साल बाद आया। पुलिस इस मामले में यह साबित करने में नाकामयाब रही कि गर्भवती भैंस को जहर किसने दिया।

कोर्ट ने आरोपित दंपती को बरी कर दिया है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने चंडीमंदिर के गांव गणेशपुर निवासी महिला सुमन देवी और उसके पति राय सिंह को संदेह का लाभ देते हुए बरी करने का फैसला सुनाया।

साबित नहीं हुआ दोष

अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को साबित नहीं कर सका। वहीं, पुलिस भैंस की मौत के कारण की पुष्टि करने वाली फोरेंसिक रिपोर्ट पेश नहीं की गई और न ही किसी गवाह ने आरोपितों को भैंस को जहर देते हुए देखा।

2019 का है मामला

पति-पत्नी के खिलाफ शिकायतकर्ता रंजना की शिकायत पर जुलाई 2019 में विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज हुआ था। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि 19 जुलाई 2019 को उसकी नौ वर्षीय बेटी महक के हाथ से चाय गिरने की घटना के बाद विवाद हुआ।

आरोप था कि सुमन और राय सिंह ने उसके साथ मारपीट की और राय सिंह ने उसके देवर नायब सिंह को भी पीटा।

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