नई दिल्ली, जेएनएन। इनेलो सुप्रीमो के दोनों बेटों की सियासी राह जुदा होने के बाद भी चौटाला परिवार की समस्या दूर नहीं होने वाली। अब अभय चौटाला और दुष्यंत चौटाला के बीच अपने चेहरे को सर्वमान्य बनाने की लंबी लड़ाई चलेगी।

पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी देवीलाल की संघर्ष स्थली जींद से अजय चौटाला ने इनेलो छोड़कर नई पार्टी गठित करने का एलान तो कर दिया है मगर नई पार्टी के कर्णधारों के सामने अगले पड़ाव पार करना कड़ी चुनौती से कम नहीं होंगे। 7 अक्टूबर को गोहाना की रैली के बाद परिवार में वर्चस्व की लड़ाई का कारण चाचा अभय सिंह चौटाला (विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष) और भतीजे दुष्यंत चौटाला (हिसार से इनेलो के टिकट पर बने सांसद) का चेहरा ही बना था। दुष्यंत समर्थक अभय के सामने अपने नेता को सीएम प्रोजेक्ट कर रहे थे।

बात इतनी बढ़ी कि पार्टी सुप्रीमो ओमप्रकाश चौटाला ने अनुशासनहीनता मानते हुए दुष्यंत व उनके छोटे भाई दिग्विजय और पिता अजय सिंह चौटाला को निष्कासित कर दिया। अब दुष्यंत चौटाला को नई पार्टी का सर्वमान्य चेहरा बनाने के लिए अजय समर्थकों को ऐड़ी-चोटी का जोर लगाना होगा। वहीं, अभय चौटाला के साथ पिता ओमप्रकाश चौटाला का साया है और इनेलो के ज्यादातर विधायक व पदाधिकारियों का साथ भी है।

नई पार्टी का आधार बनेगा दुष्यंत का मृदुभाषी और साफ छवि चेहरा

नई पार्टी का नाम अभी भविष्य के गर्भ में है। तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। फिलहाल दुष्यंत समर्थकों ने हरियाणा व दिल्ली में बनाए गए अपने समर्थकों के ग्रुपों के नाम इनेलो से बदलकर जननायक सेवादल रख दिया है। हालांकि माना जा रहा है कि नई पार्टी का नाम जननायक सेवा दल से अलग होगा। नई पार्टी का नाम जनता दल या लोकदल जोड़कर ही दिया जा सकता है। इस पार्टी का आधार दुष्यंत चौटाला का मृदुभाषी और साफ छवि चेहरा ही रहेगा।

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