जेएनएन, चंडीगढ़। राष्ट्रमंडल खेलों के पदक विजेता खिलाडिय़ों की पुरस्कार राशि को लेकर उपजे विवाद के बाद हरियाणा सरकार ने इन खिलाडिय़ों का सम्मान समारोह ही रद कर दिया। पुरस्कार राशि को लेकर पदक विजेता खिलाड़ी दो धड़ों में बंट गए। 11 खिलाड़ी राज्य सरकार की खेल नीति के मुताबिक पुरस्कार राशि हासिल करने को तैयार थे, जबकि 11 खिलाडिय़ों को पुरस्कार राशि काटकर देने पर कड़ी आपत्ति थी। ये खिलाड़ी इस कार्यक्रम का बहिष्‍कार करने की तैयारी में थे। पुरस्कार वितरण समारोह बृहस्पतिवार को पंचकूला में आयोजित किया जाने वाला था। यह भी चर्चा है कि सरकार विरोध करने वाले खिलाडियों को अब इनाम देने का निर्णय वापस ले सकती है।

पुरस्कार राशि को लेकर खेमों में बंटे खिलाड़ी, 11 खिलाडिय़ों ने किया कम राशि लेने से इन्‍कार

कॉमनवेल्थ गेम्स में पदक जीतने वाले हरियाणा के खिलाडिय़ों के सम्मान में राज्य सरकार एक कार्यक्रम आयोजित करने जा रही थी। यह कार्यक्रम 26 अप्रैल को पंचकूला में होना था। बताया जा रहा है इस कार्यक्रम को लेकर खिलाड़ी नाराज थे। खिलाड़ियों का कहना है कि सरकार नौकरी तो देती नहीं उल्टा इनाम में मिलने वाली राशि में भी भारी कटौती कर रही है।

हरियाणा सरकार की नई खेल नीति में प्रावधान है कि उसी खिलाड़ी को पुरस्कार राशि प्रदान की जाएगी, जो हरियाणा का रहने वाला है तथा उसने खेलों में हरियाणा का प्रतिनिधित्व किया हो। राज्य में 13 खिलाड़ी ऐसे हैं, जो हरियाणा के रहने वाले हैं, लेकिन उन्होंने हरियाणा की बजाय रेलवे सहित अन्‍य संस्‍थाओं का प्रतिनिधित्व करते हुए भारत के लिए पदक जीते। सरकार का कहना है कि नियमों के मुताबिक ये खिलाड़ी पुरस्कार राशि के बिल्कुल भी हकदार नहीं हैं। लेकिन, खेल मंत्री अनिल विज ने मुख्यमंत्री मनोहर लाल से बातचीत के बाद यह प्रावधान करा दिया था कि इन खिलाडिय़ों को एजेंसी से मिलने वाली राशि की कटौती कर हरियाणा द्वारा दी जाने वाली बाकी राशि प्रदान कर दी जाएगी।

उदाहरण के लिए यदि हरियाणा सरकार गोल्ड मेडलिस्ट को एक करोड़ 50 लाख रुपये प्रदान करती है और संबंधित खिलाड़ी को 25 लाख रुपये रेलवे से मिले हैं तो इस 25 लाख की कटौती के बाद खिलाड़ी को सवा करोड़ रुपया प्रदान किया जाएगा। हरियाणा सरकार की इस बदली हुई नीति से 11 खिलाड़ी सहमत नहीं हुए और उन्होंने पुरस्कार राशि में कटौती करने के फार्मूले को सिरे से खारिज कर दिया।

कम पुरस्कार राशि दिए जाने का बाॅक्सर मनोज कुमार, महिला पहलवान साक्षी मलिक, बाॅक्सर अमित पंघल, गौरव सोलंकी, पहलवान किरण बिश्नोई, नीरज चोपड़ा, महिला पहलवान विनेश फौगाट और बजरंग पुनिया ने खुला विरोध किया। सरकार को आशंका थी कि पुरस्कार वितरण समारोह में हंगामा हो सकता है। मौके पर कुछ अन्य खिलाड़ी भी विरोध जता सकते हैं। लिहाजा विज ने मुख्यमंत्री मनोहर लाल से बातचीत करने के बाद समारोह ही रद करने का ऐलान कर दिया।

विज की मुख्यमंत्री के साथ हुई आधा घंटा मीटिंग

बताया जाता है कि खेल मंत्री अनिल विज को जब यह पूरी तरह से अहसास हो गया कि अब खिलाडिय़ों के साथ बात नहीं बनने वाली है तो वह स्वास्थ्य विभाग की मीटिंग करने के बाद सीधे सीएम निवास पर गए। वहां उन्होंने मुख्यमंत्री को अवगत कराया और साथ ही कहा कि यदि समारोह किया जाता है तो स्थिति अधिक बिगड़ सकती है।

विज मुख्यमंत्री को यह समझाने में कामयाब रहे कि खेल नीति में इस बात का कतई प्रावधान नहीं है कि हरियाणा की तरफ से नहीं खेलने वाले किसी खिलाड़ी को पुरस्कार राशि मिले, लेकिन विशेष प्रावधान के बाद सरकार उन्हें पुरस्कृत करने वाली थी। इसके बाद भी यदि विरोध किया जाता है तो इसका गलत संदेश जाएगा।

विरोध करने वाले खिलाडिय़ों को अब शायद ही मिले पुरस्कार राशि

खिलाडिय़ों के साथ उपजे विवाद के बाद सरकार राज्य की खेल नीति पर पुनर्विचार करेगी। इसके तहत हरियाणा से नहीं खेलने वाले खिलाडिय़ों की पुरस्कार राशि नहीं देने का फैसला भी हो सकता है। ऐसे में इन खिलाडिय़ों को अपनी राशि के लिए लंबा इंतजार करना पड़ सकता है। सूत्रों के अनुसार सरकार विरोध करने वाले खिलाडिय़ों के सामने कतई भी झुकने को तैयार नहीं है।

'हम तो खिलाडिय़ों की हीन भावना खत्म करना चाहते थे'

'' हरियाणा के खिलाडिय़ों में अमूमन यह हीन भावना रहती थी कि उनकी पुरस्कार राशि विभिन्न एजेंसियों से खेलने वाले अन्य खिलाडिय़ों से कम होती है। इस हीन भावना को खत्म करने के लिए सरकार ने यह फैसला लिया था कि सभी खिलाडिय़ों को एक समान पुरस्कार राशि दी जाए और जो खिलाड़ी एजेंसियों से भी पुरस्कार प्राप्त करेंगे, उस राशि को हरियाणा की ओर से मिलने वाली पुरस्कार राशि से काट लिया जाए। मुझे लगता है कि इसका कोई विरोध नहीं होना चाहिए था, फिर भी खिलाडिय़ों ने जो मंशा जाहिर की है, उसे देखते हुए इस समारोह को रद करने का फैसला लेना पड़ा है। यह बेहद दुखद है। अब समारोह कब होगा, यह मैं कह नहीं सकता।

                                                                                                  - अनिल विज, खेल मंत्री, हरियाणा।

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प्रदेश की खेल नीति के मुताबिक कॉमनवेल्थ गेम्स में हरियाणा के किसी खिलाड़ी के स्वर्ण पदक जीतने पर उसे डेढ़ करोड़ रुपये का इनाम दिया जाता है। इसी तरह रजत पदक पर 75 लाख रुपये और कांस्य पदक जीतने वाले खिलाड़ी को 50 लाख रुपये दिए जाते हैं।

कॉमनवेल्थ गेम्स की बॉक्सिंग में कांस्य पदक जीतने वाले बॉक्सर मनोज कुमार का कहना है कि किसी दूसरे राज्‍य की सरकार ने यह फैसला नहीं किया है। उन्होंने कहा ‘हरियाणा सरकार खिलाड़ियों को नौकरी भी नहीं देती और अब यह इनाम की रकम में भी कटौती कर रही है। यह इनाम की रकम पर टैक्स लगाने जैसा है।’

महिला पहलवान साक्षी मलिक ने भी सरकार के इस फैसले की आलोचना की है। राज्य सरकार के सम्मान समारोह में जिन खिलाडि़याें के भाग नहीं लगने की चर्चा थी उनमें बॉक्सर अमित पंघल और गौरव सोलंकी के अलावा पहलवान किरण बिश्नोई भी शामिल हैं। बताया जाता है नीरज चोपड़ा, विनेश फौगाट और बजरंग पुनिया ने भी इस कार्यक्रम का बहिष्कार करने का फैसला किया था।

 

Posted By: Sunil Kumar Jha

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