चंडीगढ़, [अनुराग अग्रवाल]। हरियाणा मेें कोरोना वायरस COVID-19 के कारण संक्रमण के खतरे और लागू लॉक डाउन के कारण राजनेताओं का लाइफ स्‍टाइल बदल गया है। इनेलाे के वरिष्‍ठ नेता और हरियाणा विधानसभा के पूर्व नेता विपक्ष अभय चौटाला की जीवनशैली और दिनचर्या बदल गई है। वह आजकल पेरोल पर आए अपने पिता पूर्व मुख्‍यमंत्री ओमप्रकाश चौटला के साथ समय बिता रहे हैं। पिता-पुत्र साथ ही टीवी पर रामायण सीरियल देखते हैं। इसके साथ ही वह फोन और सोशल मीडिया के माध्‍यम से लोगों से जुड़ रहे हैं।

कोरोना के चलते अभय सिंह ने किया दिनचर्या में बदलाव, फोन से संवाद बढ़ाया

हरियाणा की राजनीति में अभय सिंह चौटाला एक बड़ा नाम हैं। पूर्व उप प्रधानमंत्री स्व. देवीलाल के पोते और पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला के बेटे अभय सिंह चौटाला हरियाणा विधानसभा में विपक्ष के नेता रह चुके हैं। उनकी पार्टी इनेलो भले ही दोफाड़ हो चुकी और भतीजे दुष्यंत चौटाला जननायक जनता पार्टी बनाकर मुख्यमंत्री मनोहर लाल की सरकार में शामिल हो गए, लेकिन अभय चौटाला अपनी पार्टी के एकमात्र विधायक होने के बावजूद जिस तरह से विधानसभा में गरजते हैं, वह देखने लायक होता है। आजकल उनका वक्त अपने पिता ओमप्रकाश चौटाला के साथ सिरसा के चौटाला गांव स्थित फार्म हाउस पर बीत रहा है। वहीं आर्गेनिक फलों व सब्जियों की खेती की देखभाल होती है।

कोरोना के लिए रिलीफ फंड बनाने वाले हरियाणा के पहले राजनेता, एक साल का वेतन और पांच लाख दिए

इनेलो सुप्रीमो और पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला आजकल पैरोल पर सिरसा आए हुए हैं। अभय सिंह अपने पिता ओमप्रकाश चौटाला के साथ सिरसा के चौटाला गांव स्थित फार्म हाउस पर रुके हुए हैं। अभय सिंह का पूरा परिवार चंडीगढ़ के सेक्टर आठ स्थित 80 नंबर कोठी में है। चौटाला गांव में अभय सिंह का करीब 200 एकड़ का फार्म हाउस है, जिसमें चार एकड़ में उनका घर बना हुआ है। बाकी जगह पर आर्गेनिक फल व सब्जियों की खेती होती है। यहां पैदा होने वाले फल और सब्जियां ही खाने में इस्तेमाल की जाती हैं।

सोशल मीडिया व फोन के जरिये बनाए गांव दर गांव युवाओं के ग्रुप, जो बांट रहे मदद

कोरोना महामारी की वजह से अभय सिंह चौटाला ने अपनी नियमित दिनचर्या में बदलाव किया है, लेकिन कार्यकर्ताओं से फोन के जरिये संपर्क तथा जरूरतमंद लोगों की मदद बढ़ा दी है। अभय प्रदेश के ऐसे पहले विधायक हैं, जिन्होंने अपने पूरे एक साल का वेतन और पांच लाख रुपये सबसे पहले मुख्यमंत्री राहत कोष में दिए। उन्हीं के सुझाव पर मुख्यमंत्री ने वालियंटर्स से सेवाएं लेने की पेशकश की, जिनकी संख्या बढ़कर आज 60 से 65 हजार हो गई है। अभय सिंह चौटाला ने ऐलनाबाद हलके के हर गांव में युवाओं के वाट्सएप ग्रुप बना रखे हैं, जिनके जरिये वह लोगों से जु़ड़ते हुए जरूरतमंद लोगों तक मदद पहुंचा रहे हैं।

मेडिकल कालेज के सौ छात्र कर रहे चिकित्सा सेवा

सिरसा में जननायक ताऊ देवीलाल के नाम से एक मेडिकल कालेज है, जिसमें सौ छात्र-छात्राओं ने मेडिकल की पढ़ाई पूरी की है। इन सभी विद्यार्थियों को छोड़कर बाकी को छुट्टी दे दी गई है। इन नवोदित डाक्टरों से समाज के जरूरतमंद तबके की मदद की सेवा अभय सिंह चौटाला ले रहे हैं। पार्टी के स्तर पर सबसे पहले कोविड-19 रिलीफ फंड बनाने वाले नेता भी अभय चौटाला हैं। उन्‍होंने इनेलो कोविड-19 रिलीफ फंड बनाया। इसमें आने वाली राशि को जरूरतमंद लोगों की मदद पर खर्च किया जाएगा।

सुबह शाम की सैर और कड़े व्यायाम पर जोर

अभय सिंह चौटाला सुबह छह बजे उठते हैं। करीब एक घंटे फार्म हाउस में सैर करने के बाद योग करते हैं। उन्होंने अपना पर्सनल इंस्ट्रक्टर भी रखा हुआ है, जो उन्हें हर रोज व्यायाम कराता है। चौटाला की फिटनेस बढ़ रही है। अभय के पिता ओमप्रकाश चौटाला सुबह साढ़े पांच बजे उठ जाते हैं और योग करने के बाद नाश्ते में ड्राई फ्रूट लेते हैं। आजकल टीवी पर रामायण धारावाहिक प्रसारित हो रहा है।

अभय चौटाला और ओमप्रकाश चौटाला दोनों मिल बैठकर यह धारावाहिक देखते हैं। तभी उनके बीच विभिन्न मसलों पर बातचीत होती है। नाश्ते में अभय सिंह दलिया और फ्रूट लेते हैं। दोपहर में दाल, चपाती और सब्जी तथा रात को कढ़ी खाना उन्हें पसंद है। कभी दाल भी होती है। कभी कभी शक्कर के साथ एक रोटी से ही उनका काम चल जाता है। रात को दूध पीना उनकी आदत में शामिल है।

अभय चौटाला गांवों को करा रहे सेनेटाइज

अभय चौटाला के अनुसार पूरे इलाके के गांवों को सेनेटाइज करने के लिए उन्होंने अभियान छेड़ा हुआ है। सेनेटाइजर की बोतलों पर पार्टी विशेष के नेताओं के फोटो के अभय सिंह सख्त खिलाफ हैं। उनका कहना है कि यह राजनीति का नहीं बल्कि जरूरतमंद लोगों की सेवा का वक्त है। अभय सिंह चौटाला शाम के समय भी एक घंटे की नियमित सैर करते हैं। सुबह शाम फोन के जरिये लोगों तथा कार्यकर्ताओं को दिशा निर्देश देते हैं।

अभय कहते हैं कि उन्हें किताब पढ़ने का वक्त नहीं मिलता। किताब वे लोग पढ़ रहे हैं, जिन्हें पब्लिक, कार्यकर्ता और समाज के जरूरतमंद लोगों की चिंता नहीं है। हम वाट्सएप ग्रुप और सोशल मीडिया के जरिये लोगों तक उनकी जरूरत का सामान पहुंचा रहे हैं, जिन्हें हमारे कार्यकर्ता देकर आते हैं।

Posted By: Sunil Kumar Jha

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