चंडीगढ़, [दयानंद शर्मा]। ओल्ड एज होम को लेकर दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। हुडा की तरफ से हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार रिपोर्ट देने के लिए समय की मांग की गई।

सुनवाई के दौरान ने हरियाणा सरकार ने इस मामले में उठाए गए कदमों की जानकारी भी कोर्ट को दी। हाईकोर्ट ने सरकार की रिपोर्ट की कापी हरियाणा लीगल सर्विस अथारिटी को देने का आदेश देते हुए सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की जांच करने को भी कहा।

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हरियाणा, पंजाब की सरकारों के रूख पर हाईकोर्ट ने अपनी टिप्पणी में कहा  था कि जिन लोगों के बच्चे उन्हें घर से निकाल देते हैं उन्हें ओल्ड एज होम की जरूरत होती है और यह सरकार की जिम्मेदारी बनती है कि ऐसे लोगों को सहारा दे।

सरकार ने 2002 में बनाई पॉलिसी में प्रत्येक जिले में एक ओल्ड एज होम बनाने को अनिवार्य किया था परंतु 2015 तक हरियाणा में केवल 2 व पंजाब में केवल 1 सरकारी ओल्ड एज होम है। ऐसा प्रतीत होता है कि घर से निकाले गए इन वृद्धों के लिए सरकार के पास संवेदना नहीं है। सरकार उन्हें उन्हीं के हाल पर छोड़ देना चाहती है। हाईकोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि यह मामला इतना गंभीर है कि इसे ऐसे नहीं छोड़ा जा सकता।

हरियाणा सरकार और हुडा की ओर से हाईकोर्ट में हलफनामा दाखिल किया गया था। हुडा ने हलफनामे में बताया था कि 2002 में ओल्ड एज होम के लिए पॉलिसी का निर्माण किया गया था। इस पॉलिसी के तहत हर जिले में ओल्ड एज होम की अनिवार्यता का प्रावधान किया गया। हाईकोर्ट ने इसपर कहा था  कि वे शब्दों का जाल न बनाएं और सीधे बताएं कि हरियाणा में कितने ओल्ड एज होम है।

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इसपर हुडा के काउंसिल ने बताया कि हरियाणा में 9 डे केयर सेंटर तथा 2 ओल्ड एज होम है। हाईकोर्ट ने इसपर हैरानी जताते हुए कहा कि पॉलिसी बनने के डेढ़ दशक बाद भी हुडा ने केवल दो ओल्ड एज होम तैयार किए हैं। हाईकोर्ट ने कहा कि हुडा फर्जी सोसाईटी को तो जमीन बांट रहा है लेकिन ओल्ड एज होम बनाने के लिए उनके पास जमीन तक नहीं है। कई ऐसे लोग हैं जो खुद से ओल्ड एज होम बनाना चाहते हैं उनकी जमीन के लिए अर्जी दफ्तरों में पड़ी धूल फांकती हैं।

इस दौरान हाईकोर्ट ने पूछा कि पॉलिसी के अनुरूप हर जिले में ओल्ड एज होम क्यों नहीं है। हुडा की ओर से मौजूद काउंसिल ने बताया कि हरियाणा बड़े महानगरों की तरह नहीं है। यहां पर लोग अपने परिजनों को घर से बाहर नहीं निकालते। ऐसी घटनाएं होती हैं लेकिन वे छुट-पुट ही हैं। हाईकोर्ट ने इस जवाब पर टिप्पणी करते हुए कहा कि लगता है कि हरियाणा की सरकार किसी और दुनिया से आई है या फिर उनकी आंखों पर कोई विदेशी चश्मा चश्मा लगा है। यदि कभी ओल्ड एज होम में जाकर देखें तो पता चलेगा कि हकीकत क्या है। 

हरियाणा सरकार से कहीं गुना ज्यादा प्रयास कर रहें हैं अन्य लोग :  हाईकोर्ट

हाईकोर्ट में हरियाणा सरकार के हलफनामे में बताया गया  था कि राज्य में 18 ओल्ड एज होम निजी हाथों में चले रहें हैं तथा 5 को एन.जी.ओ. हरियाणा सरकार की मदद से चला रही है। इसपर हाईकोर्ट ने कहा कि यह सरकार की जिम्मेदारी होती है कि वे वृद्ध लोगों को बेसहारा न छोड़े। इस मामले में जिन लोगों की जिम्मेदारी तक नहीं हैं वे आगे आकर ओल्ड एज होम बना रहें हैं जबकि हरियाणा सरकार इस दिशा में काम नहीं कर रही है। जो प्राइवेट लोग सेवा के इस काम को करना चाहते हैं उनकी राह में भी रोड़े अटका दिए जाते हैं।

हाईकोर्ट ने हरियाणा, पंजाब व चंडीगढ़ से मांगी जानकारी

हाईकोर्ट ने हरियाणा, पंजाब व चंडीगढ़ को निर्देश दिया है कि वो कोर्ट  में यह बताए कि उनके राज्य में कितने ओल्ड एज होम चल रहे है। उनमें कितने लोग रह रहे है। उनके रहने सहने व चिकित्सा की क्या सुविधा हैं। उनके लिए कितना स्टाफ नियुक्त है और प्रबंध किस तरह का है।

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Posted By: Ankit Kumar

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