चंडीगढ़, जेएनएन। पति-पत्‍नी के बीच अलगाव के बाद सबसे अधिक कश्‍मकश और विवाद बच्‍चों की कस्‍टडी को लेकर होता है। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने इस मामले में अब बड़ा फैसला दिया है। हाई कोर्ट ने एक मामले में कहा कि मां के कानूनी अधिकार से जरूरी यह है कि बच्‍चों की इच्‍छा और उनका भविष्‍य महत्‍वपूर्ण है। हाई कोर्ट ने पति पत्‍नी के बीच वैवाहिक विवाद के मामले में बच्चों द्वारा मां की अपेक्षा पिता को चुनने के खिलाफ दायर याचिका को हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया।

हाई कोर्ट ने कहा, मां के कानूनी अधिकार से जरूरी बच्चों की इच्छा व भविष्य

इस मामले में पत्‍नी की तरफ दायर याचिका में कहा गया कि उसके ससुराल पक्ष वाले दहेज के कारण उसको तंग करते थे। उसको मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताडि़त करते थे। इसके बाद 2006 में उनकी पहली बेटी हुई जिसके बाद अत्याचार और बढ़ गया। 2007 में जब वह दोबारा गर्भवती हुई तो लिंग जांच के लिए भी दबाव बनाया गया। इस सब से परेशान होकर वह घर छोड़कर चली गई थी।

बेटियों की ओर से पिता का साथ चुनने के बाद हाईकोर्ट ने खारिज की मां की याचिका

महिला ने दो साल बाद पुलिस की महिला सेल में शिकायत दी। इसके बाद पति ने हलफनामा दिया कि वह अब कोई अत्याचार नहीं करेगा। महिला ने याचिका में कहा कि अइसके बावजूद पति के बर्ताव में कोई बदलाव नहीं आया। इसके कारण वह 2010 में मायके चली गई। इसके बाद से ही लगातार बच्चों की कस्टडी पाने के लिए संघर्ष कर रही है।

दूसरी ओर, पति की ओर से आरोपों को सिरे से खारिज किया गया। हाईकोर्ट ने केस पर फैसला सुनाते हुए कहा कि बच्चे हिसार के अच्छे स्कूल में पढ़ रहे हैं जबकि पत्नी भिवानी के एक गांव में रहती है। साथ ही बच्चों ने कोर्ट में पिता के साथ रहने की बात कही है। महिला की सास घर पर रहती है और ऐसे में पति के बाहर जाने पर वह बच्चियों का ख्याल रख सकती हैं। हाई कोर्ट ने पत्‍नी की याचिका को खारिज करते हुए कहा कि मां के कानूनी अधिकार की अपेक्षा कोर्ट बच्चों की इच्छा व उनके  बेहतर भविष्य को देखते हुए बच्चों को पिता के पास रखने को सही मानता है लेकिन कोर्ट ने महीने में दो बार बच्चों से मिलने की मांग में छूट दे दी।

Posted By: Sunil Kumar Jha

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