अंतिम तारीख के बाद हासिल जाति प्रमाणपत्र अमान्य, हरियाणा में 1456 शिक्षक भर्ती मामले में हाईकोर्ट का फैसला
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा में 1456 प्राथमिक शिक्षकों की भर्ती में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने कहा ...और पढ़ें

हाईकोर्ट ने कहा कि विज्ञापन में निर्धारित पात्रता की शर्तें समान रूप से लागू हों।
HighLights
आवेदन की अंतिम तारीख से पहले ही प्रमाणपत्र हो चुका था समाप्त।
बाद में बनवाया नया प्रमाणपत्र भी नहीं आया काम, मामला पहुंचा कोर्ट।
नया प्रमाणपत्र बनवा लेने से उसकी उम्मीदवारी वैध नहीं मानी।
राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। हरियाणा में 1456 प्राथमिक शिक्षकों के पदों पर भर्ती में पिछड़ा वर्ग-ए श्रेणी के प्रमाणपत्र को लेकर चल रहे मामले में अहम फैसला आया है।
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि किसी अभ्यर्थी का पिछड़ा वर्ग प्रमाणपत्र आवेदन जमा करने की अंतिम तारीख से पहले ही समाप्त हो चुका था और उसने उसी प्रमाणपत्र के आधार पर आवेदन किया तो बाद में नया प्रमाणपत्र बनवा लेने से उसकी उम्मीदवारी वैध नहीं हो जाती।
अदालत ने कहा कि भर्ती प्रक्रिया शुरू होने के बाद विज्ञापन में निर्धारित पात्रता की शर्तों को सभी अभ्यर्थियों के लिए समान रूप से लागू किया जाना जरूरी है।
वैध प्रमाणपत्र आवेदन के साथ लगाना अनिवार्य था
मामला हरियाणा के मेवात संवर्ग में प्राथमिक शिक्षक के पद पर भर्ती से जुड़ा है। हरियाणा सरकार की ओर से 1456 प्राथमिक शिक्षकों के पदों के लिए विज्ञापन जारी किया गया था। आवेदन जमा करने की अंतिम तारीख 21 अगस्त 2024 थी।
पिछड़ा वर्ग-ए श्रेणी के अभ्यर्थियों के लिए वैध प्रमाणपत्र आवेदन के साथ लगाना अनिवार्य था। अपीलकर्ता ने जनवरी 2024 में जारी पिछड़ा वर्ग-ए प्रमाणपत्र के आधार पर आवेदन किया था।
शुरुआत में अस्थायी रूप से भर्ती में शामिल होने की अनुमति
शुरुआत में उसे अस्थायी रूप से भर्ती प्रक्रिया में शामिल होने की अनुमति दी गई, लेकिन दस्तावेजों की जांच के दौरान पता चला कि हरियाणा सरकार के 22 मार्च 2022 के निर्देशों के अनुसार आय और क्रीमी लेयर से संबंधित प्रमाणपत्र की वैधता संबंधित वित्तीय वर्ष की 31 मार्च तक ही रहती है।
इस मामले में जनवरी 2024 में जारी प्रमाणपत्र 31 मार्च 2024 को समाप्त हो गया था, जबकि भर्ती के लिए आवेदन की अंतिम तारीख 21 अगस्त 2024 थी। यानी आवेदन करते समय अभ्यर्थी के पास वैध प्रमाणपत्र नहीं था।
दस्तावेजों की जांच के दौरान अभ्यर्थी ने नया प्रमाणपत्र भी प्रस्तुत किया। उसका तर्क था कि जांच के समय उसके पास वैध प्रमाणपत्र मौजूद था और इससे यह साबित होता है कि वह पिछड़ा वर्ग-ए श्रेणी के लिए पात्र है।
खंडपीठ ने एकल पीठ के फैसले के खिलाफ दायर अपील खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि भर्ती विज्ञापन की शर्तों का पालन करना सभी अभ्यर्थियों के लिए अनिवार्य है। केवल इसलिए कि आवेदन की अंतिम तारीख के बाद नया प्रमाणपत्र जारी हो गया, इससे पहले जमा किया गया आवेदन पात्र नहीं माना जा सकता।
