हादसे में शिक्षिका 100 प्रतिशत दिव्यांग, न पदोन्नति और ना वेतन वृद्धि का लाभ; हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार से मांगा जवाब
सड़क हादसे में 100 दिव्यांग हुई हरियाणा की शिक्षिका वंदना अग्रवाल को सेवा संबंधी लाभ न मिलने पर हाईकोर्ट में ...और पढ़ें

हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार को जारी किया नोटिस। (सांकेतिक फोटो)
HighLights
शिक्षिका को सड़क हादसे में 100% दिव्यांगता हुई।
पदोन्नति, वेतन वृद्धि और पेंशन लाभ नहीं मिले।
हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार को नोटिस जारी किया।
राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। स्कूल जाते समय सड़क हादसे में 100 प्रतिशत दिव्यांग हुई हरियाणा की शिक्षिका वंदना अग्रवाल को सेवा संबंधी लाभ नहीं मिलने का मामला पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट पहुंच गया है।
शिक्षिका ने आरोप लगाया है कि दिव्यांगता के बाद उन्हें न तो वैकल्पिक पद पर समायोजित किया गया और न ही पदोन्नति, वेतन वृद्धि तथा पूर्ण पेंशन सहित अन्य लाभ दिए गए। जस्टिस हरप्रीत सिंह बराड़ की पीठ ने याचिका पर हरियाणा सरकार को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने के लिए समय दिया है।
मामले की अगली सुनवाई तीन दिसंबर को होगी। याचिकाकर्ता के अनुसार, उनकी नियुक्ति 27 नवंबर, 1995 को प्राथमिक शिक्षिका के पद पर हुई थी। बाद में आठ अक्टूबर, 2002 को उन्हें संस्कृत शिक्षिका के पद पर पदोन्नत किया गया। छह जुलाई, 2006 को अपने निर्धारित स्कूल जाते समय वह गंभीर सड़क हादसे का शिकार हो गईं। इस दुर्घटना में उन्हें 100 प्रतिशत दिव्यांगता हुई।
पीजीआइएमईआर, चंडीगढ़ और नागरिक अस्पताल के चिकित्सा बोर्डों ने उनकी दिव्यांगता का आकलन किया था। याचिका में बताया गया है कि वह शरीर के दाहिने हिस्से में पक्षाघात और गंभीर दृष्टि संबंधी अक्षमता से भी पीड़ित हैं।
शिक्षिका की ओर से अदालत में दलील दी गई कि हादसे के बाद संबंधित विभाग को चिकित्सा दस्तावेज सौंपने के बावजूद उन्हें किसी वैकल्पिक पद पर समायोजित नहीं किया गया। उनके अनुसार, विभाग ने सेवा में निरंतरता बनाए रखने के लिए अतिरिक्त पद भी सृजित नहीं किया।
इसके कारण वह पदोन्नति और दूसरे सेवा लाभों से वंचित रह गईं। याचिका में कहा गया है कि उन्हें हाई स्कूल के प्रधानाध्यापक और प्राथमिक विद्यालय की प्रधानाध्यापिका के पदों पर पदोन्नति के लिए भी विचार नहीं किया गया। इसके अलावा, सुनिश्चित कैरियर प्रगति योजना के तहत मिलने वाले वेतन लाभ भी नहीं दिए गए।
31 मई, 2026 को सेवानिवृत्त हो चुकी
वंदना अग्रवाल 31 मई, 2026 को सेवानिवृत्त हो चुकी हैं। उनका कहना है कि विभाग की कार्रवाई के कारण उनकी पूरी सेवा को पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति लाभों की गणना में शामिल करने का लाभ नहीं मिला।
उन्होंने अदालत से मांग की है कि उनकी सेवा को सेवानिवृत्ति की आयु तक अतिरिक्त पद पर जारी मानते हुए सभी परिणामी लाभ दिए जाएं।साथ ही, पदोन्नति के दावों पर संबंधित सेवा नियमों के तहत विचार करने, वेतन बकाया जारी करने और पेंशन की गणना में पूरी अर्हकारी सेवा शामिल करने के निर्देश देने की मांग की है।
याचिका में दिव्यांगजन अधिनियम का हवाला दिया गया है। शिक्षिका का तर्क है कि सेवा के दौरान दिव्यांगता होने पर कर्मचारी के सेवा हितों की रक्षा करना विभाग की वैधानिक जिम्मेदारी है।
उन्होंने उच्चतम न्यायालय के विभिन्न फैसलों का उल्लेख करते हुए बकाया राशि और अन्य सेवा लाभों पर 18 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देने की भी मांग की है। सुनवाई के दौरान हरियाणा सरकार की ओर से जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा। हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई तीन दिसंबर के लिए स्थगित कर दी।
