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Haryana News: क्राफ्ट इंस्ट्रक्टर के 3206 पदों पर नियुक्तियां रद हों, हाई कोर्ट में ये तर्क देकर दर्ज की गई याचिका

Haryana Latest News हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग (एचएसएससी) ने राज्य में विभिन्न ट्रेडों में क्राफ्ट इंस्ट्रक्टर (Craft Instructor) के 3206 पदों पर नियुक्तियां की थीं। अब इस बाबत इन्हें रद करने को लेकर पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट (Punjab Haryana High Court) में याचिका दर्ज हुई है। याचिका को आगे की सुनवाई के लिए दो जुलाई के लिए सूची किया गया है।

By Dayanand Sharma Edited By: Prince Sharma Sat, 15 Jun 2024 05:55 PM (IST)
हाई कोर्ट ने माना था कि भर्ती के नियम राजनीतिक एजेंडे पर आधारित नहीं हो सकते

राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में एक याचिका दायर कर हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग (एचएसएससी) द्वारा राज्य में विभिन्न ट्रेडों में क्राफ्ट इंस्ट्रक्टर के 3206 पदों पर की गई नियुक्तियों को रद्द करने की मांग की गई है।

हाल ही में अदालत ने भर्ती में सामाजिक-आर्थिक मानदंडों को अवैध घोषित करने का फैसला सुनाया है। याचिका के अनुसार एचएसएससी ने क्राफ्ट इंस्ट्रक्टर के चयन में चयनित उम्मीदवारों को सामाजिक-आर्थिक मानदंडों (अब असंवैधानिक घोषित) के तहत अतिरिक्त अंक दिए थे, इसलिए पूरी चयन प्रक्रिया को अवैध घोषित किया जाना चाहिए।

दो जुलाई को होगी सुनवाई

हरियाणा के पानीपत जिले के निवासी दीपक कुमार और कई अन्य लोगों द्वारा दायर याचिका के मद्देनजर यह मामला हाई कोर्ट के समक्ष पहुंचा है। याचिका को अब आगे की सुनवाई के लिए दो जुलाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है।

याचिकाकर्ताओं ने 15 सितंबर, 2022 के अंतिम परिणाम और हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग (एचएसएससी) द्वारा 2019 में जारी विज्ञापन के बदले की गई नियुक्तियों सहित चयन प्रक्रिया को रद्द करने के निर्देश मांगे हैं।

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याचिकाकर्ताओं के अनुसार, सफल उम्मीदवारों को कानून के स्थापित प्रावधान की अनदेखी करते हुए अवैध रूप से अतिरिक्त अंक दिए गए।

याचिकाकर्ताओं के अनुसार वह विभिन्न ट्रेडों में शिल्प प्रशिक्षकों के विज्ञापित पदों के लिए पूरी तरह से पात्र थे, उन्होंने विज्ञापित पदों के लिए आवेदन किया था।

लेकिन यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि लिखित परीक्षा में उच्च योग्यता रखने के बावजूद याचिकाकर्ताओं को विभिन्न अधिसूचनाओं के माध्यम से पेश किए गए

हाई कोर्ट के इस फैसले का दिया हवाला

सामाजिक आर्थिक मानदंडों के कारण चयन से बाहर रखा गया, जो अवैध, मनमाना और असंवैधानिक था। याचिकाकर्ताओं ने हाल ही में 31 मई को दिए गए हाई कोर्ट के फैसले का भी हवाला दिया, जिसमें हाईकोर्ट की एक खंडपीठ ने सामाजिक-आर्थिक मानदंडों को रद्द कर दिया था।

हाई कोर्ट ने माना था कि भर्ती के नियम राजनीतिक एजेंडे पर आधारित नहीं हो सकते। कोर्ट ने माना था कि राज्य द्वारा अपनाए गए सामाजिक-आर्थिक मानदंड संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन करते हैं और समान लोगों के बीच असमानता का वर्ग बनाने का प्रयास करते हैं।

राज्य मूल सिद्धांतों को समझने में विफल: हाई कोर्ट

हाई कोर्ट ने यह भी माना था कि हरियाणा राज्य संविधान के प्रावधानों के मूल सिद्धांतों को समझने में बुरी तरह विफल रहा है।

हाई कोर्ट ने कहा था जब अनुच्छेद 15 और 16 तथा निर्देशक सिद्धांतों के तहत प्रावधान निर्धारित कर दिए गए हैं, तो वे पूरे भारत में लागू होंगे और राज्य सरकार को सार्वजनिक रोजगार में विशेष आरक्षण लागू करने की अनुमति नहीं दी जा सकती, जहां सभी नागरिक भाग लेने और रोजगार पाने के हकदार हैं।

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