हरियाणा के खेल मंत्री गौतम की जीत को चुनौती वाली याचिका से रिकॉर्ड कैसे गायब हुए? चीफ जस्टिस के आदेश पर जांच जारी
हरियाणा के खेल मंत्री गौरव गौतम की पलवल सीट पर जीत को चुनौती देने वाली याचिका से महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक सबूत ...और पढ़ें

खेल मंत्री गौरव गौतम की जीत को कांग्रेस नेता करण दलाल ने दी हुई है चुनौती।
HighLights
पलवल विधानसभा सीट पर जीत का मामला।
कांग्रेस नेता करण दलाल ने जीत को दी है चुनौती।
मुख्य न्यायाधीश के आदेश पर आंतरिक जांच जारी।
दयानंद शर्मा, चंडीगढ़। हरियाणा के खेल मंत्री गौरव गौतम की पलवल विधानसभा सीट जीत को चुनौती देने वाली याचिका से महत्वपूर्ण इलेक्ट्रानिक सबूत पेन ड्राइव के गायब के मामले में हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। इस दौरान बताया गया कि चीफ जस्टिस के आदेशों के तहत हाईकोर्ट के भीतर नियुक्त जांच अधिकारी द्वारा जांच की जा रही है।
कोर्ट ने इस तथ्य को गंभीरता से लिया कि जांच लंबित है और उससे जुड़े तथ्यों का सामने आना आवश्यक है। स्पष्ट किया कि जब तक इस प्रकरण की आंतरिक जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक मामले पर अंतिम निर्णय लेना संभव नहीं है।
याचिकाकर्ता कांग्रेस नेता करण दलाल की ओर से पेश वकील ने हाईकोर्ट को यह भी सूचित किया कि इस मामले से संबंधित विवाद फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में भी लंबित है। वहां 28 नवंबर 2025 को पारित आदेश पर रोक लगी हुई है। इसके बाद हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई 30 अप्रैल के लिए स्थगित कर दी।
साथ की हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि मामले की संबंधित फाइल को पुन जांच अधिकारी के पास भेजा जाए, ताकि जांच प्रक्रिया निर्बाध रूप से आगे बढ़ सके और अगली सुनवाई तक प्रगति रिपोर्ट उपलब्ध कराई जा सके।
चुनाव के दौरान कथित भ्रष्ट आचरण के आरोप
गायब पेन ड्राइव चुनाव याचिका करण सिंह दलाल बनाम गौरव गौतम मामले में एनेक्सचर पी-4 के रूप में दाखिल की गई थी, जिसमें चुनाव के दौरान कथित भ्रष्ट आचरण से जुड़े वीडियो, तस्वीरें और स्क्रीनशाट सुरक्षित थे। करण सिंह दलाल ने हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार को शिकायत दर्ज कराई थी कि 21 जनवरी 2026 को उन्हें चुनाव शाखा की ओर से सूचित किया गया कि अदालत की फाइल से पेन ड्राइव गायब है।
पेन ड्राइव को किसी ने निकाल लेने का आरोप
करण दलाल के वकील को बताया गया कि कागजी बंडल के पृष्ठ संख्या 72 पर प्लास्टिक पाउच में लगी पेन ड्राइव को किसी ने निकाल लिया है। शिकायत में बताया गया है कि यह पेन ड्राइव सीरियल नंबर बीएम2409003429 जेड की थी, जिसमें वे सभी वीडियो और डिजिटल सबूत थे, जिनके आधार पर राज्य मंत्री गौरव गौतम पर जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 123 के तहत भ्रष्ट आचरण का आरोप लगाया गया है।
हैरानी की बात यह है कि हाई कोर्ट के 28 नवंबर 2025 के आदेश में भी इन्हीं वीडियो सबूतों का उल्लेख किया गया था, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह सामग्री मामले की रीढ़ है।
लेक्ट्रानिक सबूत का गायब होना बेहद गंभीर मामला
इस मामले में पैरवी करने वाले हरियाणा के पूर्व एडवोकेट जनरल और भारत सरकार के पूर्व अतिरिक्त साॅलिसिटर जनरल मोहन जैन ने कहा कि अदालत की फाइल से प्राथमिक इलेक्ट्रानिक सबूत का गायब होना बेहद गंभीर मामला है, जो न्याय की निष्पक्षता और रिकार्ड की सुरक्षा प्रणाली पर सवाल खड़ा करता है।
उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रानिकस साक्ष्य आधुनिक न्याय व्यवस्था में बेहद अहम हैं और इनके साथ छेड़छाड़ पूरी प्रक्रिया को दूषित कर सकती है ।ज्ञात रहे कि जस्टिस अर्चना पुरी ने 28 नवंबर 2025 को गौतम की साक्ष्यों के खिलाफ अर्जी को खारिज करते हुए कहा था कि याचिका में लगाए गए आरोप प्रथम दृष्टया विचारणीय हैं और उनका फैसला साक्ष्यों के आधार पर किया जाना आवश्यक है ।
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