हरियाणा सरकार से रिटायर हुआ ड्राइवर, IAS ने उनके लिए खुद चलाई कार; हर कोई कह रहा वाह-भई-वाह
हरियाणा विकास एवं पंचायत विभाग के निदेशक आईएएस सुशील सारवान ने सेवानिवृत्त हो रहे ड्राइवर यब्बू प्रसाद पांडे को खुद ...और पढ़ें

ड्राइवर यब्बू प्रसाद पांडे को विदाई देने खुद स्टेयरिंग संभाल घर छोड़ने पहुंचे आईएएस सुशील सारवान।
HighLights
आईएएस सुशील सारवान ने सेवानिवृत्त ड्राइवर को घर तक पहुंचाया।
यब्बू प्रसाद पांडे ने 33 साल की सेवा के बाद सेवानिवृत्ति ली।
अधिकारी के इस मानवीय व्यवहार की सभी ने सराहना की।
जागरण संवाददाता, पंचकूला। सरकारी दफ्तरों में अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच औपचारिक संबंध आम बात है, लेकिन हरियाणा विकास एवं पंचायत विभाग के निदेशक एवं आईएएस अधिकारी सुशील सारवान ने अपने व्यवहार से मानवीय रिश्तों की एक खूबसूरत मिसाल पेश की।
उन्होंने हरियाणा रूरल डेवलपमेंट फंड (एचआरडीएफ) बोर्ड में ड्राइवर के पद पर कार्यरत यब्बू प्रसाद पांडे को सेवानिवृत्ति के दिन खुद गाड़ी चलाकर उनके घर तक पहुंचाया। अधिकारी की इस सादगी, विनम्रता और अपनत्व ने सभी का ध्यान आकर्षित किया।
यब्बू प्रसाद पांडे ने 28 अप्रैल 1993 को हरियाणा सरकार में अपनी सेवाएं शुरू की थीं। 31 अक्टूबर 2026 को 33 वर्ष 6 माह की लंबी सेवा पूरी करने के बाद वह सेवानिवृत्त हो गए।
अपने सेवाकाल में उन्होंने विभिन्न कार्यालयों में जिम्मेदारियां निभाईं और कई वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों, मुख्य सचिवों एवं अतिरिक्त मुख्य सचिवों के साथ काम करने का अवसर प्राप्त किया।
ड्राइवर बोले-सरकारी नौकरी जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा
अपने विदाई संदेश में पांडे ने कहा कि उनके लिए सरकारी नौकरी केवल रोजगार नहीं, बल्कि जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा रही है। इस दौरान उन्हें वरिष्ठ अधिकारियों और सहकर्मियों से बहुत कुछ सीखने को मिला।
उन्होंने आरके तेजा, आरके वर्मा, आरपी चंद्रा, हरदीप कुमार, अमिलश लिखी, एसके मोगा, अमित झा, अनुराग रस्तोगी, शिव रमन गौड़, उर्वशी गुलाटी, पी. राधाकृष्ण राव, राम निवास, नवराज सिद्धू और सुधीर राजपाल सहित अनेक वरिष्ठ अधिकारियों के प्रति आभार जताया।
पांडे ने भावुक होते हुए कहा कि भले ही वह सरकारी जिम्मेदारियों से सेवानिवृत्त हो रहे हैं, लेकिन अपने अधिकारियों और सहकर्मियों के साथ बने रिश्ते कभी सेवानिवृत्त नहीं होंगे।
बॉस का कर्मचारी के प्रति सम्मान
निदेशक सुशील सारवान का खुद वाहन चलाकर अपने सहयोगी को घर छोड़ने जाना महज विदाई की औपचारिकता नहीं, बल्कि कर्मचारी के प्रति सम्मान और अपनत्व का उदाहरण बन गया। उनकी इस पहल की अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच सराहना हो रही है।
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