हरियाणा में फोरमैन इंस्ट्रक्टरों के तबादलों पर हाईकोर्ट का अहम निर्देश, सरकार को चार सप्ताह में लेना होगा फैसला
हरियाणा हाईकोर्ट ने तकनीकी शिक्षा विभाग के फोरमैन इंस्ट्रक्टरों की तबादला सूची पर आपत्तियों को लेकर हरियाणा सरकार को निर्देश दिए हैं।

हरियाणा में फोरमैन इंस्ट्रक्टरों के तबादलों पर हाईकोर्ट का अहम निर्देश (फाइल फोटो)
HighLights
फोरमैन इंस्ट्रक्टरों की तबादला सूची पर हाईकोर्ट में आपत्ति।
सरकार को चार सप्ताह में कारण सहित फैसला लेने का आदेश।
कर्मचारियों को सुनवाई का पूरा अवसर दिया जाएगा।
राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। हरियाणा में आनलाइन तबादला नीति को लेकर तकनीकी शिक्षा विभाग के कर्मचारियों की आपत्तियां हाईकोर्ट पहुंचीं। वर्कशॉप इंस्ट्रक्टर से पदोन्नत होकर फोरमैन इंस्ट्रक्टर बने कर्मचारियों ने सरकार की तबादला प्रक्रिया को चुनौती दी।
उनका कहना है कि निर्धारित संख्या से कम पद होने के कारण वर्कशाप इंस्ट्रक्टरों को प्रक्रिया से बाहर रखा गया था, लेकिन फोरमैन इंस्ट्रक्टरों के अलग-अलग ट्रेड को मिलाकर तबादला सूची में शामिल किया गया।
जस्टिस हरप्रीत सिंह बराड़ ने हरियाणा सरकार को निर्देश दिया कि कर्मचारियों के मांगपत्र पर चार सप्ताह के भीतर कारण सहित आदेश पारित किया जाए। इससे पहले कर्मचारियों को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर दिया जाए।
14 जुलाई, 2026 को मिला प्रमोशन
विकास कुमार और अन्य याचिकाकर्ताओं ने बताया कि वे वेल्डर और इलेक्ट्रिशियन ट्रेड में वर्कशाप इंस्ट्रक्टर थे। 14 जुलाई 2026 को पदोन्नति के बाद उन्हें फोरमैन इंस्ट्रक्टर बनाया गया।
उनके अनुसार, तबादला नीति के दिशा-निर्देशों में किसी ट्रेड या विषय के संवर्ग को प्रक्रिया में शामिल करने के लिए 80 से अधिक स्वीकृत पद होना जरूरी है।
याचिकाकर्ताओं ने कहा कि 2025 में भी सरकार ने अलग-अलग ट्रेड के वर्कशाप इंस्ट्रक्टरों को मिलाकर तबादला प्रक्रिया में शामिल करने की कोशिश की थी।
जयबीर सिंह एवं अन्य बनाम हरियाणा सरकार मामले में इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। इसके बाद सरकार ने 25 फरवरी और 31 मार्च 2025 को निर्णय लेकर वर्कशाप इंस्ट्रक्टरों को प्रक्रिया से बाहर कर दिया था।
50 कर्मचारियों के नाम अस्थायी सूची में आए
आरटीआइ से मिली जानकारी का हवाला देते हुए कर्मचारियों ने कहा कि सभी ट्रेड मिलाकर फोरमैन इंस्ट्रक्टरों के कुल स्वीकृत पद 66 हैं, जो 80 की सीमा से कम हैं। उनका आरोप है कि विभाग की अस्थायी सूची में केवल 50 कर्मचारियों के नाम हैं, जबकि समान स्थिति वाले कुछ कर्मचारी बाहर हैं। कुछ कर्मचारियों की सेवा अवधि की गणना में भी गड़बड़ी का दावा किया गया।
कर्मचारियों ने 15 सितंबर 2026 को विभाग को मांगपत्र दिया था, लेकिन उस पर निर्णय नहीं हुआ और तबादला प्रक्रिया आगे बढ़ती रही। सुनवाई में सरकार के वकील ने समयबद्ध निर्णय की मांग पर आपत्ति नहीं जताई।
हाईकोर्ट ने कहा कि आदेश की प्रमाणित प्रति मिलने के बाद चार सप्ताह की समयसीमा लागू होगी। यदि कर्मचारी मांगी गई राहत के हकदार पाए जाते हैं, तो उन्हें इसका लाभ तत्काल दिया जाए। इसी निर्देश के साथ याचिका का निपटारा कर दिया गया। अदालत ने तबादला नीति रद नहीं की, बल्कि आपत्तियों पर नियमानुसार निर्णय लेने को कहा।