21 साल की सेवा के बाद भी नहीं होंगे परमानेंट, हरियाणा सरकार का गेस्ट टीचर्स को बड़ा झटका
हरियाणा सरकार ने 21 साल से कार्यरत अतिथि अध्यापकों को नियमित करने से साफ इनकार कर दिया है, जिससे लगभग 12 हजार शिक्षकों की उम्मीदों को झटका लगा है।

हरियाणा में गेस्ट टीचर्स नहीं होंगे परमानेंट (फाइल फोटो)
HighLights
हरियाणा सरकार ने अतिथि अध्यापकों को नियमित करने से किया इनकार।
लगभग 12 हजार शिक्षक 21 साल से कर रहे थे नियमितीकरण की मांग।
सरकार ने अध्यापकों को अदालत जाने का दिया सुझाव।
राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। हरियाणा के अतिथि अध्यापकों को नियमित नहीं करने के संबंध में स्पीकिंग ऑर्डर निकाल चुकी प्रदेश सरकार ने यह आदेश वापस लेने से साफ मना कर दिया है।
मुख्यमंत्री के मुख्य प्रधान सचिव राजेश खुल्लर ने अतिथि अध्यापकों के प्रतिनिधिमंडल से स्पष्ट कह दिया है कि अतिथि अध्यापक नियमित होने की शर्तें पूरी नहीं करते, इसलिए उन्हें नियमित नहीं किया जा सकता।
प्रदेश सरकार ने यह भी संकेत दिया है कि इन अतिथि अध्यापकों की भर्ती हुड्डा सरकार में कुछ समय के लिए हुई थी, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि वे नियमित होने के हकदार बन गए। भाजपा सरकार ने इन अतिथि अध्यापकों को हटाने के बजाय उन्हें जॉब सिक्योरिटी दी है, जो कि उन्हें रास नहीं आ रही है।
21 साल से नौकरी कर रहे अध्यापक
राज्य में करीब 12 हजार अतिथि अध्यापक हैं, जो नियमितीकरण की मांग कर रहे हैं। उनकी सेवाओं को 21 साल से ज्यादा का समय हो चुका है। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में कानूनी लड़ाई लड़ने के दौरान अदालत ने राज्य सरकार को तीन माह में उन पर निर्णय लेने का आदेश दिया था।
हाई कोर्ट के आदेश में यह स्पष्ट रूप से इंगित नहीं था कि इन अतिथि अध्यापकों को आवश्यक तौर पर नियमित किया जाए, लेकिन कानून व पालिसी के आधार पर फैसला लेने की बात जरूर कही गई थी। इस आदेश के आधार पर अतिथि अध्यापक लगातार राज्य सरकार पर पक्का करने का दबाव बना रहे थे।
अतिथि अध्यापकों के प्रदेश में दो गुट संचालित हैं। एक गुट लंबे समय से आंदोलन कर रहा है, जबकि दूसरा गुट शांति वार्ताओं के माध्यम से सरकार से अनुरोध करने की मुद्रा में है।
तीन दिन पहले अध्यापकों ने खत्म किया था आंदोलन
अनुरोध की मुद्रा वाले गुट ने जितनी बार भी सरकार के समक्ष पक्का करने की याचना की, उनके अनुरोध पर विचार करने का भरोसा मिला, लेकिन आंदोलनकारियों ने जब उग्र रूप अपनाया तो सरकार का इरादा बदल गया। तीन दिन पहले अतिथि अध्यापकों ने आंदोलन किया था, जिसके बाद कैबिनेट मंत्री अनिल विज ने सीएम के मुख्य प्रधान सचिव से सोमवार को उनकी वार्ता कराने का भरोसा दिलाया था। नियत समय पर यह वार्ता हुई, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला।
आंदोलनकारी अतिथियों का नेतृत्व कर रहे अतिथि अध्यापक संयुक्त संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष कृष्ण धारशूल, प्रवक्ता कुलदीप झरौली, महासचिव रघु वत्स, प्रदीप गुर्जर एवं महिला विंग की प्रदेश अध्यक्ष मैना यादव ने वार्ता में भागीदारी की। रघु वत्स के अनुसार बैठक में अधिकारियों ने उनके दस्तावेजों और नियुक्ति संबंधी तथ्यों पर कोई स्पष्ट चर्चा नहीं की।
अधिकारियों का रवैया टालमटोल वाला रहा तथा नियमितीकरण के मुद्दे पर सरकार की ओर से कोई ठोस आश्वासन नहीं दिया गया। बैठक में मुख्य प्रधान सचिव राजेश खुल्लर ने सुझाव दिया कि वे शिक्षा विभाग द्वारा जारी स्पीकिंग आर्डर को चाहें तो न्यायालय में चुनौती दे सकते हैं।
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