हरियाणा में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए अच्छी खबर, छोटी गलती पर भर्ती से नहीं होंगे बाहर
हाईकोर्ट ने हरियाणा में सरकारी भर्ती प्रक्रिया में आवेदन की छोटी गलतियों या तकनीकी कमियों के कारण उम्मीदवारों को बाहर ...और पढ़ें

हरियाणा में सरकारी भर्ती प्रक्रिया के लिए हाईकोर्ट का आदेश। (सांकेतिक फोटो)
HighLights
दस्तावेज जांच में सुधार के लिए मिलेगा समय।
तीन महीने में बनेगी सरकारी भर्ती की नई नीति।
हाईकोर्ट का हरियाणा सरकार को आदेश जारी।
राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। हरियाणा में सरकारी भर्ती प्रक्रिया में लिखित परीक्षा पास करने और कटऑफ से अधिक अंक पाने के बावजूद ऑनलाइन आवेदन की छोटी गलती, गलत दस्तावेज अपलोड होने या प्रमाणपत्र में तकनीकी कमी के आधार पर अभ्यर्थियों को चयन से बाहर करना उचित नहीं है।
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा कि भर्ती का उद्देश्य योग्य उम्मीदवारों का चयन करना है, न कि आवेदन या दस्तावेज अपलोड करने में हुई मानवीय गलतियों के लिए उन्हें बाहर करना। जस्टिस हरप्रीत सिंह बराड़ की एकल पीठ ने प्रदीप सहित 145 याचिकाओं का एक साथ निपटारा करते हुए यह व्यवस्था दी।
याचिकाएं हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग (एचएसएससी) और हरियाणा लोक सेवा आयोग (एचपीएससी) की विभिन्न भर्तियों से जुड़ी थीं। मुख्य मामला प्राथमिक शिक्षक (पीआरटी), मेवात संवर्ग की भर्ती का था।
याचिकाकर्ता प्रदीप ने आवेदन में पिछड़ा वर्ग-बी के नए प्रमाणपत्र की जारी होने की तारीख और संदर्भ संख्या सही दर्ज की थी, लेकिन साइबर कैफे संचालक की गलती से पुराना प्रमाणपत्र अपलोड हो गया। उन्हें 72.2 अंक मिले थे, जबकि संबंधित श्रेणी की कट ऑफ 70.30 अंक थी। इसके बावजूद उनकी उम्मीदवारी पर विचार नहीं किया गया।
अदालत ने कहा कि बड़ी संख्या में अभ्यर्थी साइबर कैफे और साझा सेवा केंद्रों के माध्यम से आवेदन करते हैं। डिजिटल व्यवस्था की कमियों या तकनीकी गलतियों का पूरा खामियाजा उम्मीदवारों को नहीं भुगतना चाहिए। संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 के तहत समान अवसर सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है।
भविष्य की भर्तियों के लिए हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि आवेदन की अंतिम तारीख के बाद आवेदन और अपलोड किए दस्तावेजों में सुधार का पर्याप्त समय मिले। दस्तावेज जांच में कमी पाए जाने पर अस्थायी अस्वीकृति का नोटिस देकर कम से कम सात दिन दिए जाएं।
प्रमाणपत्र अपलोड न होने पर, आवेदन में प्रमाणपत्र संख्या या परिवार पहचान संख्या दी गई हो तो सरकारी अभिलेखों और सरल पोर्टल से सत्यापन किया जाए। आवेदन की अंतिम प्रति में अपलोड दस्तावेजों के नाम स्पष्ट हों और भर्ती विज्ञापन में प्रमाणपत्र की अवधि, जारी होने की अंतिम तारीख तथा निर्धारित प्रारूप बताया जाए।
एचएसएससी और एचपीएससी अपनाएं समान नीति
एचएसएससी और एचपीएससी को समान और सार्वजनिक नीति अपनानी होगी। अदालत ने आयोगों और संबंधित अधिकारियों को याचिकाकर्ताओं की पात्रता पर नए सिरे से विचार करने तथा कटआफ तारीख तक मौजूद दस्तावेज देने का अवसर देने को कहा। प्रमाणपत्र जारी करने वाले अधिकारियों से सत्यापन के बाद आठ सप्ताह में कारण सहित आदेश पारित करना होगा।
पात्र पाए जाने पर खाली पदों पर नियुक्ति मिलेगी
पात्र और मेधावी पाए जाने पर उपलब्ध रिक्तियों में नियुक्ति दी जाएगी, जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त पद भी बनाए जा सकते हैं। ऐसे अभ्यर्थियों को कम अंक पाने वाले चयनित उम्मीदवारों की नियुक्ति तारीख से काल्पनिक वरिष्ठता और अन्य परिणामी लाभ मिलेंगे, लेकिन वास्तविक वेतन कार्यभार ग्रहण करने की तारीख से मिलेगा।
पहले से नियुक्त और लगातार काम कर रहे कर्मचारियों को नहीं हटाया जाएगा। मुख्य सचिव को तीन महीने में बाध्यकारी नीति बनाने का निर्देश दिया गया है, जिसका पालन दोनों आयोग करेंगे।
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