जेएनएन, चंडीगढ़। हरियाणा के सबसे गरीब एक लाख परिवारों को ढूंढने में लगी प्रदेश सरकार इनके उत्थान के लिए उद्योगपतियों और 40 हजार स्वयं सहायता समूहों की मदद लेगी। उद्योगपतियों से गरीब परिवारों को गोद लेने की गुजारिश करने के साथ ही स्वरोजगार के लिए ब्याज रहित ऋण दिया जाएगा।

मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने सोमवार को अति गरीब एक लाख परिवारों की आमदनी सालाना एक लाख रुपये तक करने का संकल्प दोहराते हुए अधिकारियों को योजना पर तेजी से काम करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि एक लाख अति गरीब परिवारों की आमदनी बढ़ाने के बाद अगले एक लाख का लक्ष्य निर्धारित किया जाएगा। इस प्रकार यह क्रम लगातार जारी रहेगा।

ड्रीम प्रोजेक्ट की प्रगति की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह अति गरीब एक लाख परिवार योजना का लाभ लेने के लिए खुद आगे आने वाले नहीं, बल्कि हमें पहल करके इनकी पहचान करनी है। यह अति गरीब किसी झुग्गी झोपड़ी या मलिन बस्तियों में रहने वाले हो सकते हैं। उन तक योजना का लाभ पहुंचाने के लिए हमें खुद उनके पास पहुंचना है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जो लोग पहले से रोजगार में लगे हैं, हमें उन्हेंं नहीं छेड़ना है बल्कि नए काम ढूंढ़कर एक लाख परिवारों की आमदनी बढ़ानी है। हमारा लक्ष्य सबको काम देना है। अति गरीब परिवारों की पहचान परिवार पहचान पत्र के सर्वे के माध्यम से की जाएगी। यह सर्वे लोकल कमेटियों द्वारा किया जाएगा जो जिले में अतिरिक्त उपायुक्त की देखरेख में काम कर रही हैं। जल्द ही ऐसे एक लाख परिवारों की सूची तैयार हो जाएगी।

मुख्यमंत्री ने इस दौरान विश्वकर्मा कौशल विकास विश्वविद्यालय के कुलपति डाक्टर राज नेहरू को कम पढ़े-लिखे व अन्य कारणों से पिछड़े लोगों के लिए रोजगार की उपलब्धता के लिए आवश्यक कोर्स तैयार करें। इन परिवारों के योग्य युवा, महिला एवं अन्य को कौशल विकास योजना के तहत कोर्स कराकर आमदनी बढ़ाने का काम किया जाएगा।

उन्होंने औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों में बेसिक कोर्स कराने की भी योजना बनाने के निर्देश दिए।सरकारी कर्मचारी खुद ऐसे परिवारों के पास जाकर कोर्सों के लिए आवेदन कराएंगे। मुख्यमंत्री ने मुख्य प्रधान सचिव डीएस ढेसी, मुख्य सचिव विजय वर्धन, प्रधान सचिव उमाशंकर, अतिरिक्त प्रधान सचिव डा. अमित अग्रवाल और अतिरिक्त मुख्य सचिव टीसी गुप्ता को योजना पर तेजी से काम करने के निर्देश दिए।

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