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हरियाणा में बीमार नवजात शिशुओं को मिलेगा मां का साथ, 7 करोड़ से खरीदे जाएंगे 19 वेंटिलेटर

Published: Wed, 04 Nov 2026 06:20 PM (IST)

हरियाणा सरकार गंभीर रूप से बीमार नवजात शिशुओं के इलाज में सुधार कर रही है, जिसके तहत 7 करोड़ रुपये से 19 नए वेंटिलेटर खरीदे जाएंगे।

हरियाणा में बीमार नवजात शिशुओं को मिलेगा मां का साथ, 19 नए वेंटिलेटर से सुधरेगी देखभाल। एआई जेनरेटेड तस्वीर।

हरियाणा में बीमार नवजात शिशुओं को मिलेगा मां का साथ, 19 नए वेंटिलेटर से सुधरेगी देखभाल। एआई जेनरेटेड तस्वीर।

HighLights

  1. 19 नए नवजात वेंटिलेटर खरीदे जाएंगे, लागत 7 करोड़।

  2. मां अपने बीमार नवजात बच्चे के साथ अस्पताल में रह सकेंगी।

  3. एसएनसीयू को एमएनसीयू में बदलने की योजना, बेहतर देखभाल।

राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। हरियाणा सरकार गंभीर रूप से बीमार नवजात शिशुओं के इलाज की व्यवस्था को बेहतर बनाने जा रही है। इसके लिए करीब सात करोड़ रुपये की लागत से 19 नए नवजात वेंटिलेटर खरीदे जाएंगे।

इनकी मदद से सांस लेने में परेशानी वाले बच्चों को बेहतर इलाज मिल सकेगा। फिलहाल प्रदेश के अस्पतालों में 54 नवजात वेंटिलेटर उपलब्ध हैं। नए वेंटिलेटर मिलने के बाद इनकी संख्या बढ़कर 73 हो जाएगी।

इसके साथ ही सरकार अस्पतालों में ऐसी व्यवस्था भी शुरू कर रही है, जिसमें इलाज के दौरान मां अपने नवजात बच्चे के साथ रह सकेगी। स्वास्थ्य विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा ने बुधवार को यह जानकारी दी।

स्वास्थ्य विभाग प्रदेश की विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाइयों (एसएनसीयू) को मातृ-नवजात शिशु देखभाल इकाइयों (एमएनसीयू) में बदलने की योजना पर काम कर रहा है। इसका उद्देश्य यह है कि अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान मां अपने बच्चे के पास रह सके और उसकी देखभाल में भी हिस्सा ले सके।

इस व्यवस्था से समय से पहले जन्म लेने वाले और कम वजन वाले बच्चों को विशेष फायदा होगा। मां की मौजूदगी से बच्चों को दूध पिलाने और उनकी देखभाल में मदद मिलेगी। इस योजना के तहत कंगारू मदर केयर को भी बढ़ावा दिया जाएगा। इसमें मां बच्चे को अपने सीने से लगाकर रखती है। इससे बच्चे के शरीर का तापमान सामान्य रखने, स्तनपान कराने और मां-बच्चे के बीच जुड़ाव बढ़ाने में मदद मिलती है।

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, इस योजना के तहत मां को अस्पताल में बच्चे के साथ रहने की सुविधा मिलेगी। डाक्टरों और नर्सों की देखरेख में बच्चे की देखभाल होगी। स्तनपान और बच्चे के पोषण के बारे में जानकारी मिलती रहेगी। संक्रमण से बचाव और साफ-सफाई पर विशेष ध्यान होगा तथा अस्पताल से छुट्टी के बाद घर पर देखभाल की जानकारी दी जाएगी।

डॉ. सुमिता मिश्रा के अनुसार, योजना को आगे बढ़ाने के लिए अंबाला और कुरुक्षेत्र के अस्पतालों में शुरू की गई व्यवस्था से अनुभव लिया गया है। प्रदेश में कुल 29 विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाइयां संचालित हैं। सरकार का उद्देश्य इन सभी इकाइयों में मां और बच्चे को साथ रखने की बेहतर सुविधा उपलब्ध कराना है। डॉ. मिश्रा ने कहा कि गंभीर रूप से बीमार बच्चों को अच्छे इलाज के साथ मां का प्यार और देखभाल भी मिलनी चाहिए।

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