जेएनएन, चंडीगढ़। श्रम कानूनों में मजदूर विरोधी संशोधनों और सार्वजनिक क्षेत्र की सेवाओं एवं उपक्रमों के निजीकरण का आरोप लगाते हुए मजदूर संगठनों ने 8 जनवरी को राष्ट्रव्यापी हड़ताल का निर्णय लिया है। हरियाणा के सरकारी कर्मचारी भी इस हड़ताल में शामिल होंगे।

सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के अध्यक्ष सुभाष लांबा, महासचिव सतीश सेठी व वरिष्ठ उपाध्यक्ष नरेश कुमार शास्त्री के अनुसार इस हड़ताल में सभी सरकारी विभागों, बोर्ड, निगम, विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों, शहरी निकायों, पंचायती राज संस्थाओं और केंद्रीय परियोजनाओं में कार्यरत कर्मचारी शामिल होंगे। इनके अलावा कारखानों में काम करने वाले ट्रेड यूनियनों से जुड़े श्रमिकों ने भी हड़ताल में शामिल होने का निर्णय लिया है।

राष्ट्रव्यापी हड़ताल का आह्वान 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों व कर्मचारी संघों की अखिल भारतीय फेडरेशन ने संयुक्त रूप से लिया है। सुभाष लांबा के अनुसार केंद्र सरकार जनता के खून-पसीने से खड़े किए सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों को निजी हाथों में सौंपने का काम कर रही है। कोयला क्षेत्र, बैंक व बीमा क्षेत्र में 100 प्रतिशत एफडीआइ के लिए खोलने, बैंकों का विलय करने और श्रम कानूनों में पूंजीपतियों के हक में मजदूर विरोधी संशोधन पहले हमले हैैं।

प्रदेश अध्यक्ष के अनुसार आरबीआइ से 1.76 लाख करोड़ रुपये लेकर सार्वजनिक क्षेत्र में निवेश करने के बजाय 1.45 लाख करोड़ कारपोरेट घरानों को देने का काम किया गया है। आर्थिक मंदी के कारण आटोमोबाइल, टेक्स्टाइल, एक्सपोर्ट सेक्टर में लाखों मजदूरों को नौकरी से हाथ धोना पड़ा है।

हड़ताल के लिए छह जोन में होंगे मजदूर कर्मचारी सम्मेलन

प्रदेश अध्यक्ष सुभाष लांबा ने बताया कि 8 जनवरी की हड़ताल के लिए कर्मचारी व मजदूर संगठनों ने कमर कस ली है। प्रदेश में छह जोन में मजदूर कर्मचारी सम्मेलन किए जाएंगे। 1 दिसंबर को गुरूग्राम व अंबाला, 8 दिसंबर को फरीदाबाद व हिसार और 15 दिसंबर को पानीपत व भिवानी में सम्मेलन होंगे।

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Posted By: Kamlesh Bhatt

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