यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Apr 10, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
हरियाणा: आठ साल 125 मौत.... सीवर की जहरीली गैसों में घुट रहा मजदूरों का दम, ठेकेदारों की ताक पर नियम
सोनीपत में सीवर सफाई के दौरान दो मजदूरों की मौत ने फिर ठेकेदारों की लापरवाही उजागर की है। आठ साल ...और पढ़ें

HighLights
- सीवर में मजदूरों की मौत के बाद भी कार्यप्रणाली में सुधार नहीं
- सीवरेज की सफाई के लिए खरीदी जाएंगी 18 सुपर सकर मशीनें
सुधीर तंवर, चंडीगढ़। सोनीपत में सीवर की सफाई के दौरान दो मजदूरों की मौत के बाद एक बार फिर ठेकेदारों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं।
सीवर की सफाई के दौरान जहरीली गैसों से पिछले आठ साल में 125 लोगों की मौत हो चुकी है। हादसों को रोकने के लिए प्रदेश सरकार ने 19 पेज की मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी की हुई है, लेकिन अधिकतर मामलों में इसका पालन नहीं किया जा रहा।
दिसंबर 2022 में जारी एसओपी के अनुसार सीवर की मैन्युअल सफाई अंतिम विकल्प होना चाहिए। ब्लॉकेज होने पर पहले जेटिंग और सक्शन मशीन से ब्लॉकेज को साफ करने का प्रयास करना होगा। अगर उसके बाद भी ब्लॉकेज साफ नहीं होता है तो एक्सपर्ट की मौजूदगी में सीवरेज की सफाई करवानी चाहिए। वह भी केवल प्रशिक्षित व्यक्तियों से।
सीवर सफाई के दौरान ये चीजें होना आवश्यक
सीवर सफाई करते समय रोशनी की पूरी व्यवस्था के साथ डिटेक्टर लैंप, ग्लव्स, गीला एसीटेट पेपर या गैस डिटेक्टर मास्क का प्रयोग अनिवार्य है। साथ ही मौके पर एंबुलेंस का होना जरूरी है।
सीवर में जहरीली गैस का पता लगाने के लिए मौके पर गैस मॉनिटर होना आवश्यक है। सफाई के लिए मजदूर मैनहोल में उतरें तो वहां तीन लोग जरूर होने चाहिए। अधिकतर स्थानों पर ठेकेदार इन नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं।
18 मशीनें खरीदेगी सरकार
सीवर की सफाई के दौरान हादसों को रोकने के लिए प्रदेश सरकार ने 18 सुपर सकर मशीनें खरीदने को हरी झंडी दे दी है। इसके अलावा रोबोटिक मशीनें भी खरीदने की तैयारी है। प्रदेश में वर्तमान में स्थानीय निकायों के पास सीवर की सफाई के लिए कुल 934 कर्मचारी हैं।
इनमें से 92 प्रतिशत कर्मचारी एससी-एसटी और ओबीसी समुदायों से हैं। नगर पालिका कर्मचारी संघ के प्रधान नरेश कुमार शास्त्री का दावा है कि सीवर की सफाई के दौरान होने वाली मौतें सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज संख्या से कहीं ज्यादा है क्योंकि अधिकतर मामलों में एफआईआर दर्ज नहीं होती।
मृतक के परिजनों को 30 लाख रुपये मुआवजा देना आवश्यक
नरेश शास्त्री का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक सीवर की सफाई के दौरान हादसे में मौत पर आश्रितों को 30 लाख रुपये मुआवजा और स्थायी दिव्यांगता के मामले में 20 लाख रुपये मुआवजा दिया जाए। साथ ही सीवरमैन के सभी रिक्त पदों को भरकर उन्हें आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने चाहिए ताकि हादसों को रोका जा सके।
