यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 18, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
घुमंतू और टपरीवास जातियों की सुध लेगी सरकार, कमेटी ने सीएम को सौंपी रिपोर्ट
अह विमुक्त, घुमंतू, अद्र्ध घुमंतू और टपरीवास जातियां समाज की मुख्यधारा में लौट सकेंगी। इन जातियों के उत्थान के लिए ...और पढ़ें

जेएनएन, चंडीगढ़। हरियाणा में रहने वाली विमुक्त, घुमंतू, अद्र्ध घुमंतू और टपरीवास जातियां अब समाज की मुख्यधारा में लौट सकेंगी। इन जातियों को अनुसूचित जनजाति (एसटी) श्रेणी में शामिल किए जाने की सिफारिश की गई है। इन जातियों के उत्थान की दिशा में काम कर रही हरियाणा की सलाहकार समिति ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री मनोहर लाल को अपनी रिपोर्ट सौंप दी है।
भाजपा मीडिया विभाग के चेयरमैन राजीव जैन इस समिति के अध्यक्ष हैैं। विमुक्त घुमंतू विकास बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. बलवान सिंह और हनुमान गोदारा भी समिति में शामिल हैैं। इस समिति ने संबंधित जातियों के कल्याण के लिए 15 सिफारिशें की हैैं। हरियाणा सरकार की सिफारिश के बाद केंद्र सरकार विमुक्त, घुमंतू, अद्र्ध घुमंतू और टपरीवास जातियों को अनुसूचित जन जाति (एसटी) श्रेणी में शामिल कर सकती है।
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मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने 2015 में पानीपत में विमुक्त घुमंतू विकास बोर्ड का गठन करने और सलाहकार समिति के माध्यम से सर्वे कराने का एलान किया था। जैन कमेटी ने इन जातियों के स्थायी विकास और उन्हें कल्याणकारी योजनाओं के दायरे में लाने की सिफारिश की।
जोगी, जंगम, रैबारी, भाट, मनियार एवं भंजरा को विमुक्त टपरीवास सूची में शामिल करने, महात्म के साथ राय सिख जोडऩे, बाजीगर, गवांरिया, बंजारा व बादी (एक ही जाति के पर्यायवाची) को एक ही क्रम संख्या पर दर्ज किए जाने, टपरीवास की सूची में शेरगीर के साथ शोरगीर जोडऩे, हेड़ी-नायक के साथ अहेरिया, अहेरी, थोरी नाम भी शामिल करने और डूमना जाति के साथ महास्य व डूम नामों को शामिल करने की सिफारिश जैन कमेटी ने की है।
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जैन कमेटी ने गड़रिया, हेड़ी, नायक, सांसी, डेहा, बावरिया, बाजीगर और बंजारा जाति के लोगों के लिए भेड़-बकरी पालन एवं ऊन उन्मूलन बोर्ड का गठन करने की मांग की। पंचकूला में कम आरक्षित मूल्य पर विमुक्त घुमंतू भवन के लिए जगह देने, ग्रामीण क्षेत्रों में 10 साल या इससे अधिक सालों से पंचायती जमीन पर रह रहे लोगों को मालिकाना हक देने, रोजगार में न्यूनतम अंक, पात्रता में 10 फीसद छूट देने, मुख्यधारा में लाने के लिए स्थानीय स्वशासन, जिला परिवाद एवं कष्ट निवारण समितियों में स्थान देने तथा गाडिय़ा लोहार, डेहा, सिंगीकाट, सिकलीगर विमुक्त, घुमंतू जातियों को स्थायी आवास देने की भी सिफारिश की गई है।
