पंचकूला, जेएनएन। हरियाणा के पूर्व मुख्‍यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा बृहस्‍पतिवार को पंचकूला की अदालत में पेश हुए। हुड्डा की पेशी मानेसर भूमि घोटाला मामले और एजेएल प्‍लाॅट आवंटन मामले में हुए। मानेसर भूमि घोटाला मामले में कोर्ट में आज आरोप पर बहस हुई। दोनों मामलों में हुड्डा के साथ अन्‍य आरोपित भी अदालत में पेश हुए।

पूर्व मुख्‍यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा आज कोर्ट परिसर में कई कांग्रेस नेताओं और अपने वकीलों के साथ पहुंचे। इसके बाद वह पंचकूला के एजेएल प्‍लॉट आवंटन मामले में पेश हुए। हुड्डा के साथ मामले के अन्‍य आरोपित भी अदालत में पेश हुए। मामले में आरोपित मध्‍य प्रदेश के पूर्व मुख्‍यमंत्री मोतीलाल वोरा पेश नहीं हुए। उनको अदालत ने स्‍वास्थ्‍य कारणों से पेशी से छूट दे रखी है। मामले में अब 18 फरवरी को सुनवाई होगी।

एजेएल मामला

26 अगस्त को इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय (इडी) ने हुड्डा एवं वोरा के खिलाफ अभियोजन की शिकायत दाखिल कर दी थी। हुड्डा पर आरोप है कि उन्होंने 64.93 करोड़ रुपये का प्लॉट एजेएल को 69 लाख 39 हजार रुपये में दिया था। कुछ समय पहले प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पंचकूला में असोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (एजेएल) को एक भूखंड आवंटन से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा से पूछताछ की थी। भूपेंद्र सिंह हुड्डा के धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत बयान दर्ज किए गए थे।

पंचकूला स्थित यह भूखंड सेक्टर 6 में सी-17 नंबर एजेएल को आवंटित किया गया था। इसे पिछले साल ईडी ने कुर्क कर लिया था। एजेएल को कथित तौर पर नेहरू-गांधी परिवार के सदस्यों सहित कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं द्वारा संचालित किया जाता था। यह ग्रुप नेशनल हेरल्ड अखबार निकालता था।

ईडी की जांच में पाया गया है कि हुड्डा ने हरियाणा का मुख्यमंत्री रहने के दौरान अपने आधिकारिक पद का दुरुपयोग करते हुए यह भूखंड पुन:आवंटन की आड़ में नए सिरे से एजेएल को 1982 की दर (91 रुपये प्रति वर्ग मीटर) और ब्याज के साथ फर्जी तरीके से आवंटित कर दिया। एजेंसी ने कहा था कि 2005 में इस पुन: आवंटन से एजेएल को अनुचित फायदा हुआ। ईडी के मुताबिक, इस भूखंड का बाजार मूल्य 64.93 करोड़ रुपये था, जबकि इसे हुड्डा को 69.39 लाख रुपये में आवंटित कर दिया था।

मानेसर मामले में अब 11 फरवरी को होगी सुनवाई

इसके साथ ही भूपेंद्र सिंह हुड्डा मानेसर भूमि घोटाले में अदालत में पेश हुए। उनके साथ अन्‍य आरोपित भी अदालत में पेश हुए। अदालत में आज की सुनवाई में आरोपों पर बहस पूरी हो चुकी है। अब इस मामले में अगली सुनवाई 11 फरवरी को होगी।

मानेसर जमीन घोटाले में सीबीआइ ने भादसं की धारा 420, 465, 467, 468, 471 व 120 बी के तहत केस दर्ज किया था। इसी मामले में ईडी ने भी हुड्डा के खिलाफ सितंबर 2016 में मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया था। ईडी ने हुड्डा और अन्य के खिलाफ सीबीआई की एफआईआर के आधार पर आपराधिक मामला दर्ज किया था।

यह है आरोपित

पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा, पूर्व सीएम हुड्डा के पूर्व प्रधान सचिव एमएल तायल, हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण के पूर्व मुख्य प्रशासक एसएस ढिल्लो, संघ लोक सेवा आयोग के सदस्य पूर्व आईएएस अफसर छतर सिंह, पूर्व डीटीपी जसवंत, एबीडब्ल्यू बिल्डरर्स अतुल बंसल सहित कई बिल्डर आरोपित हैं। अतुल बंसल को भगौड़ा घोषित कर दिया था।

क्या है मामला

हरियाणा में भूपेंद्र सिंह हुड्डा की सरकार के दौरान 27 अगस्त 2004 से 27 अगस्त 2007 के बीच निजी बिल्डरों ने हरियाणा सरकार के अज्ञात जनसेवकों के साथ मिलीभगत कर गुरुग्राम जिले में मानसेर, नौरंगपुर व लखनौला गांवों के किसानों और भूस्वामियों को अधिग्रहण के नोटिस जारी करके डर पैदा किया। इसके चलते किसानों ने बिल्डरों को जमीन बेंची। जब बिल्डरों ने किसानों से जमीन खरीद ली। तो जमीन को रिलीज कर दिया। करीब 400 एकड़ जमीन औने-पौने दाम पर खरीद ली थी। हरियाणा में सत्ता बदलने के बाद पहली बार सत्ता में आई बीजेपी सरकार ने साल 2015 में मामले को सीबीआई के सुपुर्द कर दिया था।

 

 

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Posted By: Sunil Kumar Jha

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