जेएनएन, चंडीगढ़। हरियाणा में सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू हुए सवा दो साल बीत चुके है, लेकिन अभी तक मकान किराया और मेडिकल के संशोधित भत्ते लागू नहीं हो पाए। इससे प्रदेश के हर कर्मचारी को हर महीने औसतन 2500 रुपये की चपत लग रही है।

प्रदेश के कुल तीन लाख कर्मचारियों के हिस्से के करीब 75 करोड़ रुपये हर महीने सरकारी खाते में जमा हो जा रहे हैं। चूंकि प्रदेश सरकार भत्तों में बढ़ोतरी का एरियर देने से पहले ही इन्कार कर चुकी है। ऐसे में सरकार व कर्मचारियों में टकराव बढ़ता दिख रहा है।

उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार ने पिछले साल जुलाई में मकान किराये के लिए मूल वेतन में क्रमश: 8, 16 और 24 फीसद व मेडीकल भत्ता दोगुना कर दिया था। हरियाणा में फैसले का लाभ देने के लिए कमेटी गठित कर मामले को लटका दिया गया। सर्व कर्मचारी संघ के महासचिव सुभाष लांबा ने बताया कि 29 अप्रैल को जींद में होने वाली कर्मचारी ललकार रैली में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया जाएगा।

मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने सर्व कर्मचारी संघ के साथ पिछले साल 11 अगस्त को हुई मीटिंग में पहली नवंबर से संशोधित भत्ते देने की घोषणा की थी, लेकिन अभी तक इस पर अमल नहीं हो पाया। अगर जल्द ही बढ़ा मकान किराया और मेडिकल भत्ते नहीं मिले तो कर्मचारी सड़कों पर उतरने को मजबूर होंगे।

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Posted By: Kamlesh Bhatt

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